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सिल्वर मेडल में सोने की चमक... ईरानी महिला टीम के कोच ने बयां की संघर्षों की दास्तां

पिछले छह महीने से युद्ध का सामना कर रहे ईरान की महिला कबड्डी टीम आइची-नागोया एशियाई खेलों में सिल्वर मेडल जीतने में सफल रही। संघर्षों की राह से गुजरने के बाद मिला सिल्वर मेडल टीम के लिए गोल्ड से कम नहीं है।

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एशियाई खेलों में कबड्डी का रजत पदक जीतने वाली ईरान की महिला कबड्डी टीम

Photo : AP

नागोया: ईरान की महिला टीम को भारत के खिलाफ एशियाई खेलों के फाइनल में हार का सामना करना पड़ा। भारतीय महिलाओं ने अपना दबदबा कबड्डी में बरकरार रखते हुए चौथी बार स्वर्ण पदक अपने नाम किया। भारत ने ईरान को 37-34 के अंतर से मात दी। भारत ने इस मैच में पहले हाफ में ही 22-16 की बढ़त हासिल कर ली थी। इसके बाद ईरान की टीम ने दूसरे हाफ में वापसी की भरपूर कोशिश की। एक समय स्कोर 27-26 तक पहुंच गया था, लेकिन भारत की बेटियों ने दमदार खेल दिखाते हुए ईरान को पटखनी दी।

तीन बार टीम ने बदला शिविर, दस जगह किया अभ्यास

भले ही ईरानी टीम गोल्ड मेडल जीतने में नाकाम रही लेकिन उसे मिले सिल्वर की चमक गोल्ड से कम नहीं है। तकरीबन छह महीने से युद्ध का सामना कर रहे ईरान की महिला कबड्डी टीम ने कड़ा संघर्ष किया और अंतत: रजत पदक अपने नाम करने में सफल रही। एशियाई खेलों से पहले ईरान की महिला कबड्डी टीम ने तीन बार शिविर बदले, छह महीने में दस अलग अलग जगहों पर अभ्यास किया और अपने खिलाड़ियों का फोकस बनाये रखने के लिये मनोवैज्ञानिक की मदद ली क्योंकि युद्ध की वजह से खिलाड़ियों की एशियाई खेलों के लिये तैयारियों में बाधा पैदा हो रही थी ।

टीम ने ली मनोवैज्ञानिक की मदद

ईरान के कोच गुलाम रजा मजांदरानी ने भारत के खिलाफ फाइनल में मिली हार के बाद कहा,'हमने एक मनोवैज्ञानिक की मदद ली जिसने युद्ध के दौरान खिलाड़ियों को फोकस बनाये रखने में सहायता की।' अफगानिस्तान के कोच कहा ,'यह आसान नहीं है। आप साथ में तैयारी करते हैं , एक तरफ युद्ध छिड़ा है और आपका परिवार खतरे में है लेकिन आपको खेल पर फोकस रखना है।' प्रो कबड्डी लीग में मुंबई टीम के साथ जुड़े 50 बरस के मजांदरानी ने कहा,'सभी खिलाड़ी रोज अपने परिवार को फोन करते हैं और पूछते हैं कि वे सुरक्षित हैं या नहीं। पिछले छह महीने में हमने दस शिविर लगाये । तीन बार जगह बदलनी पड़ी।'

सुविधाओं के अभाव से जूझी टीम

बार बार जगह बदलने से सुविधाओं के अभाव से भी टीम को जूझना पड़ा। कोच ने कहा,'मेरे पास टीम तैयार करने के लिये छह महीने का ही समय था और इस बीच युद्ध छिड़ गया और दो महीने में सब कुछ खत्म हो गया । हमारे पास बहुत ही कम समय था।' उन्होंने कहा कि ईरान पर लगाई गई पाबंदियों के कारण दूसरी टीमों को वहां खेलने नहीं बुलाया जा सका और ईरान की टीम बाहर नहीं जा सकी। मजांदरानी ने कहा ,'चीनी ताइपे को बुलाने पर वे नहीं आ सकते और हम भी नहीं जा सकते थे। भारत को बुलाने पर वे नहीं आयेंगे और आप नहीं जा सकते । जापान के साथ भी ऐसा था तो हमने एक भी दोस्ताना मैच नहीं खेला।'

(भाषा)

Navin Chauhan
नवीन चौहानauthor

नवीन चौहान टाइम्स नाउ नवभारत की स्पोर्ट्स टीम में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं। जर्नलिज़्म में पीजी डिप्लोमा प्राप्त करने के बाद वे पिछले 15 वर्षों से सक्रिय रूप से मीडिया जगत में जुड़े हैं। प्रिंट मीडिया और डिजिटल—दोनों माध्यमों में काम करने के अनुभव ने उन्हें खेल पत्रकारिता में व्यापक दृष्टिकोण और गहरी समझ प्रदान की है। अपने लंबे करियर में नवीन ने कई बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों को कवर किया है। इनमें आईपीएल, बैडमिंटन प्रीमियर लीग, इंडियन सुपर लीग, टी20 विश्व कप, आईसीसी विश्व कप, और तीन ओलंपिक—लंदन, रियो और टोक्यो—जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट शामिल हैं। नवीन चौहान ने अपने करियर में कई प्रसिद्ध भारतीय खिलाड़ियों और कोचों के इंटरव्यू भी किए हैं, जिनमें पीवी सिंधू, विजेंदर सिंह और पुलेला गोपीचंद जैसे नाम शामिल हैं। अब तक नवीन 15,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं, जिनमें ग्राउंड रिपोर्टिंग, विश्लेषणात्मक लेख, स्पेशल स्टोरीज़, प्लेयर प्रोफाइल और टूर्नामेंट-आधारित एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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