RBI और केंद्र सरकार की तरफ से विदेशी निवेशकों को लुभाने के लिए किए गए उपाय रंग दिखाने लगे हैं। जून महीने में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने बॉन्ड मार्केट में 16 महीने में सबसे बड़ा निवेश किया है। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने की बैठक के बाद बैंक ने जहां विदेशी निवेशकों की बॉन्ड और G-SEC में एंट्री व निकासी को आसान बनाया, वहीं सरकार ने कैपिटल गेन टैक्स में छूट दी। इसके बाद बॉन्ड मार्केट में विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ता हुआ दिख रहा है।
रुपये पर भी दिखा असर
पिछले करीब 1 साल से भी ज्यादा समय से विदेशी निवेशक भारत के बॉन्ड मार्केट से दूर ही रहे हैं। लेकिन, अब बॉन्ड मार्केट में FII एक्टिव खरीदार बन गए हैं। इस महीने FII ने 5 ट्रेडिंग सेशन में $1.84 अरब का निवेश किया है। इसकी वजह से जून में बॉन्ड मार्केट में विदेशी पूंजी का नेट इनफ्लो 16 महीनों में सबसे ज्यादा रहा है। इससे पहले FII ने मार्च 2025 में $3.69 अरब की खरीदारी की थी।
FII क्यों हुए आकर्षित ?
6 जून को केंद्र सरकार ने एक बड़ा पॉलिसी बदलाव किया। विदेशी पूंजी को अट्रैक्ट करने और रुपये को स्टेबल करने के लिए सरकार ने सरकारी बॉन्ड में FII इन्वेस्टमेंट पर लॉन्ग-टर्म और शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन टैक्स, साथ ही इन इंस्ट्रूमेंट्स से होने वाली इंटरेस्ट इनकम पर विदहोल्डिंग टैक्स खत्म कर दिया। अब तक, FII लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन पर 12.5 परसेंट, शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन पर 30 परसेंट, और इंटरेस्ट इनकम पर लगभग 20 परसेंट विदहोल्डिंग टैक्स दे रहे थे।
$50 अरब तक होगा इनफ्लो
अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि यह 2026-27 में $10 अरब से ज्यादा का इन्वेस्टमेंट देखने को मिल सकता है, जिससे भारत को $60 बिलियन के करंट अकाउंट डेफिसिट से निपटने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही अनुमान है कि FII की तरफ से भारत के बॉन्ड मार्केट में आने वाले 2 साल के भीतर $50 अरब डॉलर तक का निवेश देखने को मिल सकता है।
रुपया हुआ मजबूत
RBI और सरकार के कदमों का असर मार्केट पर तेजी से हुआ है। जून में अब तक रुपया लगभग 1 परसेंट मजबूत हुआ है। इसके साथ ही बॉन्ड यील्ड में भी सुधार हुआ है। बेंचमार्क 10 वर्षीय बॉन्ड्स की यील्ड 13 आधार अंक फिसलकर जून में मई के 7 फीसदी से 6.87 फीसदी आ गई है। वहीं, 5 साल के बॉन्ड्स की यील्ड 40 आधार अंक तक घटी है।
TIMES NOW Navbharat पर यह भी पढ़ें : FII-FPI को लुभाने के लिए RBI के 5 बड़े कदम, सरकारी बॉन्ड से लेकर ECB तक दी राहत
