Dollar vs Rupee : क्रूड और गोल्ड के दाम बढ़ने से रुपये में आ रही की लगातार कमजोरी और विदेशी निवेशकों (FII / PFI) की निकासी के Forex Reserve में कमी ने सरकार को चौकन्ना कर दिया है। इसके लिए सरकार ने विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के साथ ही विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाने के उपायों पर भी काम शुरू किया है।
Bloomberg की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय सरकारी बॉन्ड पर लगने वाले टैक्स में कटौती पर विचार कर रही है। माना जा रहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त मंत्रालय को इस दिशा में सिफारिश भेजी है। इस खबर के सामने आते ही बॉन्ड यील्ड में गिरावट और रुपये में रिकवरी देखने को मिली।
विदेशी निवेशकों के लिए राहत
रिपोर्ट के मुताबिक सरकार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) पर लगने वाले टैक्स बोझ को कम करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसका मकसद भारत को दूसरे उभरते बाजारों के मुकाबले ज्यादा आकर्षक बनाना है। फिलहाल विदेशी निवेशकों को भारत में सरकारी बॉन्ड निवेश पर शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ता है। इसके अलावा बॉन्ड के कूपन पेमेंट यानी ब्याज आय पर करीब 20% टैक्स लगता है। हालांकि 2023 तक विदेशी निवेशकों को ब्याज आय पर सिर्फ 5% टैक्स देना पड़ता था। इसके खत्म होने के बाद विदेशी निवेशकों की लागत काफी बढ़ गई थी।
रुपए पर बढ़ता दबाव
2026 में अब तक भारतीय रुपया एशिया की सबसे कमजोर मुद्राओं में शामिल रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपया 6% से ज्यादा टूट चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान युद्ध की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ने का खतरा है। ऐसे में सरकार और RBI विदेशी पूंजी आकर्षित कर रुपये को स्थिर रखने की कोशिश कर रहे हैं। अब तक नीति निर्माताओं ने रुपये को संभालने के लिए डिफेंसिव कदम उठाए थे, जैसे ट्रेडिंग पोजिशन की सीमा तय करना। लेकिन अब फोकस सीधे विदेशी निवेश बढ़ाने पर है।
खबर आते ही बाजार में असर
सरकारी बॉन्ड पर टैक्स कटौती की चर्चा सामने आने के बाद बॉन्ड बाजार में तेजी दिखी। भारत के 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड करीब 5 बेसिस पॉइंट गिरकर 7% तक आ गई। वहीं रुपया, जो पहले कमजोरी में कारोबार कर रहा था, उसने भी नुकसान से रिकवरी कर ली।
दूसरे देशों से पीछे भारत
विदेशी निवेशक लंबे समय से भारत में ऊंचे टैक्स ढांचे को लेकर शिकायत करते रहे हैं। इंडोनेशिया, मलेशिया, मेक्सिको और दक्षिण अफ्रीका जैसे उभरते बाजारों की तुलना में भारत में टैक्स ज्यादा माना जाता है। यही वजह है कि JPMorgan और FTSE Russell जैसे ग्लोबल बॉन्ड इंडेक्स में शामिल होने के बावजूद विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी भारतीय सरकारी बॉन्ड बाजार में सिर्फ 3% के आसपास है। भारत का सरकारी बॉन्ड बाजार करीब 1.3 ट्रिलियन डॉलर का है।
2047 विजन से भी जुड़ा फैसला
सरकार का मानना है कि अगर भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनना है, तो उसे वैश्विक वित्तीय बाजारों के अनुरूप टैक्स और निवेश नीतियां बनानी होंगी। विदेशी निवेशकों के लिए टैक्स ढांचा आसान बनाना उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
