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चादर चुराने में बीकानेर अव्वल, दिल्ली में तौलिया पर हाथ साफ! Railway को लगी 104 करोड़ की चपत

रेलवे की चादर चोरी होती हैं, ये तो आपको पता होगा। लेकिन, हैरानी की बात ये है कि पिछले 4 साल में चादर, तौलिया और तकिए जैसी चीजों के चोरी होने की वजह से 104 करोड़ का नुकसान हुआ है।

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एसी कोच में चादर तकिया की हो रही चोरी

Railway AC Coach Theft : अगर आपने ट्रेन के एसी कोच में सफर किया है, तो पता होगा कि चादर, कंबल, तकिया और तौलिया जैसी चीजें आपकी सुविधा के लिए मिलती हैं। लेकिन, ये सुविधा अब भारतीय रेलवे के लिए बड़ी सिरदर्द बन गई है। पिछले 4 साल में यात्रियों ने रेलवे के एसी कोच से 1.27 करोड़ से ज्यादा लिनेन आइटम गायब कर दिए। इनकी वजह से रेलवे के ठेकेदारों को करीब 104.51 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। यह खुलासा द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच में हुआ है। अखबार ने सूचना का अधिकार (RTI) के तहत भारतीय रेलवे के अलग-अलग मंडलों से जानकारी मांगी थी।

RTI में रेलवे से क्या पूछा गया?

भारतीय रेलवे के 69 रेलवे डिवीजनों में RTI आवेदन दायर किए गए। इनमें पूछा गया कि जनवरी 2022 से मई 2026 के बीच एसी कोच में यात्रियों को दिए जाने वाले लिनेन में से कितनी चादरें, तौलिए, कंबल, तकिए और तकिए के कवर चोरी हुए। इसके साथ ही इनकी वजह से कितना आर्थिक नुकसान हुआ और रेलवे इससे निपटने के लिए क्या कदम उठा रहा है।

1.27 करोड़ आइटम गायब हुए

रेलवे के 54 डिवीजनों ने इसका जवाब दिया। कुछ डिवीजनों ने पूरी जानकारी नहीं दी, लेकिन उपलब्ध आंकड़ों से सामने आया कि जनवरी 2022 से मई 2026 के बीच कम से कम 1.27 करोड़ लिनेन आइटम गायब हुए। साल 2022 के मुकाबले 2025 तक ऐसी चोरी की घटनाओं में करीब 56 प्रतिशत की बढ़ोतरी भी दर्ज की गई।

रेल मंत्रालय ने क्या कहा?

रेल मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस मामले को गंभीर चिंता का विषय बताया है। मंत्रालय का कहना है कि लिनेन चोरी रोकने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। रेल मंत्रालय ने यह भी कहा कि उसके पास ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो कि रेलवे का स्टाफ इन चोरी की घटनाओं में शामिल है। हालांकि, मंत्रालय ने माना कि चोरी की वजह से रेलवे को अतिरिक्त लिनेन खरीदने पड़ते हैं ताकि यात्रियों को सेवा प्रभावित न हो।

सबसे ज्यादा चोरी कहां हुई?

RTI से मिले आंकड़ों के मुताबिक कुल लिनेन चोरी के मामले में बीकानेर रेलवे डिवीजन सबसे ऊपर है। यहां चार साल में 25.76 लाख लिनेन आइटम गायब हुए। इसके बाद रांची डिवीजन में 9.31 लाख, दिल्ली में 8.21 लाख, मुंबई में 8.17 लाख, जोधपुर में 8.09 लाख, अहमदाबाद में 6.94 लाख और दानापुर 5.72 लाख लिनेन आइटम (चादर, तकिए, कंपल और पिलोकवर) गायब हुए। रिपोर्ट के मुताबिक देश के सिर्फ 10 रेलवे डिवीजन देश में हुई कुल लिनेन चोरी के करीब 67 फीसदी मामलों के लिए जिम्मेदार रहे।

सबसे ज्यादा क्या चोरी हुआ?

देशभर में सबसे ज्यादा चोरी होने वाली वस्तु फेस टॉवल रही। चार साल में चोरी हुए सामान का आंकड़ा इस प्रकार है।

  • फेस टॉवल – 46.54 लाख
  • बेडशीट – 41.13 लाख
  • तकिए के कवर – 23.59 लाख
  • कंबल – 12.95 लाख
  • तकिए – 2.76 लाख

कहां क्या सबसे ज्यादा चोरी हुआ?

यानी छोटी और आसानी से बैग में रखी जा सकने वाली चीजें सबसे ज्यादा गायब हुईं। बीकानेर में चादर, दिल्ली में तौलिया सबसे ज्यादा गायब हुए। दिलचस्प बात यह है कि हर रेलवे डिवीजन में चोरी का पैटर्न अलग रहा। बीकानेर में सबसे ज्यादा बेडशीट गायब हुईं। यहां चार साल में 12.42 लाख चादरें चोरी हुईं, जो वहां हुई कुल चोरी का लगभग आधा हिस्सा हैं। वहीं दिल्ली डिवीजन में सबसे ज्यादा फेस टॉवल चोरी हुए। यहां 4.78 लाख तौलिए गायब हुए, जो कुल चोरी का करीब 58 प्रतिशत हैं। जोधपुर में सबसे ज्यादा कंबल, जबकि सोनपुर और बिलासपुर में तकिए के कवर सबसे ज्यादा चोरी हुए।

चोरी का पैसा कौन भरता है?

रिपोर्ट में कई ठेकेदारों और कोच अटेंडेंट्स के हवाले से बताया गया है कि लिनेन रेलवे की संपत्ति होती है, लेकिन उसका प्रबंधन निजी एजेंसियां करती हैं। अगर कोई सामान गायब हो जाता है तो रेलवे पहले ठेकेदार के बिल से रकम काटता है। कई मामलों में ठेकेदार यह रकम कोच अटेंडेंट के वेतन से वसूल लेते हैं। एक अटेंडेंट ने बताया कि हर महीने उसके वेतन से 2,000 से 3,000 रुपये तक की कटौती सिर्फ चोरी हुए लिनेन की वजह से हो जाती है।

रेलवे चोरी रोकने के लिए क्या कर रहा है?

रेल मंत्रालय के मुताबिक लिनेन चोरी रोकने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। एक तरफ जहां कोच में सीसीटीवी लगाने की व्यवस्था की जा रही है। वहीं, कोच मित्र प्रणाली के जरिए लिनेन की निगरानी शुरू की जाएगी। इसके सज्ञथ ही अटेंडेंट्स को नियमित प्रशिक्षण और जागरूक करने पर जोर है। इसके साथ ही ठेका कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन जरूरी कर दिया गया है। इसके अलावा कुछ डिवीजनों में हर एसी कोच के लिए अलग अटेंडेंट की तैनाती शुरू की गई है। इसके साथ ही यात्रियों से स्टेशन आने से 30 मिनट पहले लिनेन वापस लेने की व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है।

पूरी तस्वीर शायद इससे भी बड़ी

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सभी रेलवे डिवीजनों से पूरी जानकारी नहीं मिल सकी। 69 में से सिर्फ 54 डिवीजनों ने जवाब दिया और उनमें भी कई ने सभी श्रेणियों का डेटा उपलब्ध नहीं कराया। इसलिए 104.51 करोड़ रुपये का अनुमानित नुकसान और 1.27 करोड़ चोरी हुए लिनेन आइटम वास्तविक आंकड़ों से कम भी हो सकते हैं।

    Yateendra Lawaniya
    यतींद्र लवानिया author

    प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों... और देखें

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