देशभर के लाखों केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स नए वेतन आयोग लागू होने का इंतजार कर रहे हैं। नए वेतन आयोग लागू होने से कर्मचारियों की सैलरी और रिटायर हो चुके पेंशनर्स के पेंशन में बड़ी बढ़ोतरी होने की उम्मीद लगाई जा रही है। बता दें कि 8वें वेतन आयोग के गठन को आठ महीने से ज्यादा हो चुके हैं। अब इसके पास अपनी सिफारिशें सौंपने से पहले वेतन, भत्ते, पेंशन और सेवा से जुड़े दूसरे मुद्दों की समीक्षा करने के लिए तय 18 महीने की समय-सीमा में से 10 महीने से भी कम समय बचा है। इसलिए कर्मचारियों में बेकरारी और बढ़ रही है। पिछले कई वेतन आयोग की रिपोर्ट फिटमेंट फैक्टर और वेतन वृद्धि पर केंद्रित रही है, लेकिन आयोग की आधिकारिक गैजेट नोटिफिकेशन से पता चलता है कि इसका दायरा केवल मूल वेतन में संशोधन करने तक ही सीमित नहीं है।
केंद्र सरकार ने आयोग से कहा है कि वह केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के वेतन, भत्ते, पेंशन, ग्रेच्युटी और सेवा की अन्य शर्तों की व्यापक समीक्षा करे। साथ ही, उसे निर्देश दिया गया है कि सिफारिशें करते समय वह कर्मचारियों के कल्याण और देश की आर्थिक वास्तविकताओं व वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखे। ऐसे में आइए समझतें हैं कि सरकार की ओर जारी गैजेट नोटिफिकेशन से नए वेतन आयोग को लेकर क्या संकेत मिल रहे हैं। इसका असर कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन पर क्या होगा?
1. सभी भत्तों की समीक्षा की जाएगी
8वें वेतन आयोग से कहा गया है कि वह मौजूदा भत्तों के ढांचे और पात्रता से जुड़े नियमों की जांच करे। साथ ही, आयोग अभी मिल रहे कई तरह के भत्तों को आसान और तर्कसंगत बनाने के तरीके भी सुझाएगा। इसका मतलब है कि कर्मचारियों को न सिर्फ भत्तों की संशोधित दरें देखने को मिल सकती हैं, बल्कि पात्रता के नियमों, क्लेम करने के तरीकों में बदलाव या सिस्टम को आसान और ज़्यादा पारदर्शी बनाने के लिए कई भत्तों को एक साथ मिलाए जाने (मर्जर) जैसा बदलाव भी देखने को मिल सकता है।
2. परफॉर्मेंस-बेस्ड इंसेंटिव को मिल सकता है बढ़ावा
'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' के तहत आयोग को मौजूदा बोनस सिस्टम और परफॉर्मेंस-बेस्ड पेमेंट की जांच करनी है और एक ऐसा इंसेंटिव फ्रेमवर्क सुझाना है जो प्रोडक्टिविटी और परफॉर्मेंस के लिए इनाम दे। इससे पता चलता है कि भविष्य में सैलरी के मामले में सिर्फ समय-समय पर होने वाले वेतन संशोधन पर निर्भर रहने के बजाय, कार्यक्षमता, जवाबदेही, कर्मचारियों के भरोसे और मापने योग्य नतीजों पर ज्यादा जोर दिया जा सकता है।
3. NPS, UPS, पेंशन और ग्रेच्युटी की होगी समीक्षा
8वें वेतन आयोग से कहा गया है कि वह नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों के लिए 'डेथ-कम-रिटायरमेंट ग्रेच्युटी' (मृत्यु और सेवानिवृत्ति पर मिलने वाली ग्रेच्युटी) की जांच, विश्लेषण और समीक्षा करे। इसीलिए, आयोग उन कर्मचारियों के लिए भी पेंशन और ग्रेच्युटी लाभों की जांच करेगा।
4. प्राइवेट सेक्टर की सैलरी पर विचार
गजट में एक और कम चर्चित प्रावधान यह है कि 8वें वेतन आयोग से कहा गया है कि वह सेंट्रल पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (CPSUs) के साथ-साथ प्राइवेट सेक्टर में भी मौजूदा सैलरी स्ट्रक्चर, लाभ और काम की स्थितियों पर विचार करे। इसका मकसद एक ऐसा सैलरी स्ट्रक्चर सुझाना है जिससे सरकार अच्छे टैलेंट को आकर्षित कर सके और उन्हें बनाए रख सके, साथ ही आर्थिक रूप से समझदारी भी बरते। इसके अलावा, ध्यान सिर्फ कर्मचारियों की सैलरी की समीक्षा करने पर ही नहीं है, बल्कि ऐसा इस तरह से करने पर है जिससे मौजूदा कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का भरोसा बढ़े।
अंतरिम रिपोर्ट सौंप सकता है आयोग
नए वेतन आयोग अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए उसके गठन की तारीख से 18 महीने यानी 3 नवंबर 2025 तक का समय दिया गया है, लेकिन गैजेट कमीशन को जरूरत पड़ने पर खास मामलों पर अंतरिम रिपोर्ट सौंपने की भी इजाजत देता है।
