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PF Rules Change : ₹25000 तक बेसिक सैलरी वालों के लिए भी PF होगा अनिवार्य! लाखों कर्मचारियों को फायदा

केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने PF से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव को मंजूरी दी है। जल्द ही कैबिनेट इस संबंध में फैसला कर सकती है। मंत्रालय ने अनिवार्य PF कटौती की वेतन सीमा को बढ़ाकर 25 हजार कर दिया है।

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प्रोविडेंट फंड से जुड़े नियमों में हो सकता है बड़ा बदलाव

Finance Ministry Accept Change in PF Rules : निजी क्षेत्र में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की तैयारी है। केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। मनी कंट्रोल की एक रिपोर्ट के मुताबिक वित्त मंत्रालय ने मौजूदा ₹15,000 की सीमा बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने को हरी झंडी दे दी है। अब इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय कैबिनेट के सामने रखा जाएगा।

अगर कैबिनेट से मंजूरी मिलती है तो ₹15,000 से ₹25,000 तक बेसिक सैलरी पाने वाले लाखों कर्मचारी भी अनिवार्य रूप से EPF और EPS के दायरे में आ जाएंगे। सरकार इसे 1 अप्रैल 2027 से लागू कर सकती है, हालांकि अंतिम तारीख कैबिनेट तय करेगी।

अभी क्या नियम है?

फिलहाल जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी ₹15,000 या उससे कम है, उन्हें EPF और EPS के तहत अनिवार्य रूप से शामिल किया जाता है। यदि किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹15,000 से अधिक है, तो उसे अनिवार्य रूप से EPF में शामिल करना जरूरी नहीं होता। ऐसे मामलों में कंपनी और कर्मचारी आपसी सहमति से फैसला कर सकते हैं।

किन लोगों को सबसे ज्यादा फायदा?

सबसे ज्यादा फायदा उन लोगों को मिलेगा, जिनकी बेसिक सैलरी 15000 से अधिक है। मौजूदा नियमों के तहत 15 हजार से ज्यादा बेसिक पर पीएफ की कटौती अनिवार्य नहीं है। ऐसे में इन लोगों को पीएफ का फायदा नहीं मिल रहा है। लेकिन, नई सीमा लागू होने से 25000 तक बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों की पीएफ कटौती अनिवार्य होगी।

क्या बदलेगा?

नई व्यवस्था लागू होने के बाद ₹25,000 तक बेसिक सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए EPF अनिवार्य होगा। इस तरह ₹15,000 से ₹25,000 वेतन पाने वाले लाखों नए कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आएंगे। उन्हें भविष्य निधि और पेंशन दोनों का लाभ मिलेगा। रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी।

कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा?

इस फैसले से कंपनियों का वेतन खर्च भी बढ़ेगा। जिन कर्मचारियों को पहले EPF में शामिल करना अनिवार्य नहीं था, अब उनके लिए भी कंपनी को योगदान देना होगा। इससे खासकर श्रम-प्रधान उद्योगों की पेरोल लागत बढ़ सकती है।

सरकार पर भी बढ़ेगा खर्च

कर्मचारी पेंशन योजना में नियोक्ता के योगदान का एक हिस्सा जाता है, जबकि सरकार भी 1.16% का योगदान देती है। जैसे-जैसे अधिक कर्मचारी EPS के दायरे में आएंगे, सरकार का खर्च भी बढ़ेगा। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में कर्मचारी पेंशन योजना के लिए ₹11,144 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

क्या सभी कंपनियों पर लागू होगा?

यह नियम केवल उन प्रतिष्ठानों पर लागू होगा जहां 20 या उससे अधिक कर्मचारी काम करते हैं। 20 से कम कर्मचारियों वाली कंपनियां स्वेच्छा से EPF से जुड़ सकती हैं, लेकिन उनके लिए यह अनिवार्य नहीं है।

अभी लागू क्यों नहीं होगा?

सरकार का मानना है कि कंपनियों को अपने पेरोल सॉफ्टवेयर, एचआर सिस्टम और अनुपालन प्रक्रियाओं में बदलाव करने के लिए समय देना जरूरी है। इसी वजह से संभावना है कि नई वेतन सीमा 1 अप्रैल 2027 से लागू की जाए, हालांकि अंतिम फैसला कैबिनेट की मंजूरी के बाद होगा।

10 साल बाद होगा बड़ा बदलाव

EPF की वेतन सीमा में आखिरी बार सितंबर 2014 में बदलाव किया गया था। तब इसे ₹6,500 से बढ़ाकर ₹15,000 किया गया था। अब करीब एक दशक बाद सरकार इसे बढ़ाकर ₹25,000 करने की तैयारी में है, जिससे संगठित क्षेत्र के लाखों कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा का दायरा मिलेगा।

    Yateendra Lawaniya
    यतींद्र लवानियाauthor

    प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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