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चिप नहीं बनाई, फिर भी AI से छप्परफाड़ कमाई! डेटा सेंटर बूम से खुली भारतीय कंपनियों की किस्मत

AI Chips और डेटा सेंटर बनाने की पूरी दुनिया में रेस चल रही है। लेकिन, कुछ भारतीय कंपनियां सीधे तौर पर रेस में शामिल नहीं होकर भी प्रॉफिब बना रही हैं। यह सोना खोजने वालों को कुदाल बेचने जैसा है।

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AI डाटा सेंटर ग्रोथ का भारत को मिल रहा फायदा

AI Chips and Data Center Rush : दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की होड़ तेज हो गई है। अमेरिका और चीन जहां नए AI मॉडल और एडवांस चिप बनाने की रेस में आगे हैं, वहीं भारत ने इस दौड़ में एक अलग रास्ता पकड़ लिया है। भारत भले ही अभी दुनिया के सबसे ताकतवर AI चिप या बड़े लैंग्वेज मॉडल नहीं बना रहा हो, लेकिन AI इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने वाली भारतीय कंपनियां रिकॉर्ड कमाई कर रही हैं। विशेषज्ञ इसे "गोल्ड रश" का नया दौर बता रहे हैं। जैसे सोने की खोज के समय फावड़े और औजार बेचने वालों ने सबसे ज्यादा कमाई की थी, वैसे ही AI के दौर में डेटा सेंटर के लिए केबल, पावर सिस्टम, ट्रांसफॉर्मर, कूलिंग सिस्टम और नेटवर्किंग उपकरण बनाने वाली कंपनियां सबसे बड़े फायदे में हैं।

भारतीय कंपनियों की मांग

AI मॉडल चलाने के लिए दुनिया भर में बड़े-बड़े डेटा सेंटर बनाए जा रहे हैं। इन डेटा सेंटरों को हाई-स्पीड फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क, भारी बिजली आपूर्ति, कूलिंग सिस्टम और इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती है। यही वह क्षेत्र है जहां भारतीय कंपनियां तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं। ET की रिपोर्ट के मुताबिक

स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज (Sterlite Technologies) के प्रबंध निदेशक अंकित अग्रवाल का कहना है कि यह कंपनी के लिए "जीवन में एक बार मिलने वाला अवसर" है। पहले कंपनी मुख्य रूप से टेलीकॉम नेटवर्क के लिए फाइबर ऑप्टिक केबल बनाती थी, लेकिन अब वह दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों के AI डेटा सेंटरों के लिए नेटवर्क तैयार कर रही है।

400% तक उछले शेयर

AI इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग का असर शेयर बाजार में भी साफ दिख रहा है। स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज के शेयर इस साल करीब 400% चढ़ चुके हैं। कंपनी को इस वर्ष एक अमेरिकी हाइपरस्केल क्लाउड कंपनी से 1.1 अरब डॉलर का बहुवर्षीय ऑर्डर मिला। HFCK ने अप्रैल-जून तिमाही में अपने इतिहास का सबसे मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया। AI से जुड़ी मांग के कारण कंपनी का राजस्व एक साल पहले की तुलना में दोगुने से अधिक हो गया। HFCL के संस्थापक महेंद्र नाहटा कहते हैं कि पहले उत्पादन क्षमता हर तीन-पांच साल में बढ़ाई जाती थी, लेकिन अब लगभग रोज क्षमता बढ़ानी पड़ रही है। उनके मुताबिक AI इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग "सुनामी" जैसी है।

कई सेक्टरों को फायदा

AI डेटा सेंटरों की वजह से केवल फाइबर ऑप्टिक कंपनियां ही नहीं, बल्कि कई अन्य उद्योग भी तेजी से बढ़ रहे हैं। TD Power Systems के शेयर इस साल लगभग 68% चढ़ चुके हैं। MTAR टेक्नोलॉजीज को फ्यूल सेल आधारित पावर यूनिट्स की मांग से फायदा मिल रहा है। ट्रांसफॉर्मर, स्विचगियर, पावर बैकअप, कूलिंग सिस्टम और ग्रिड कनेक्टिविटी बनाने वाली कंपनियों के लिए भी नए अवसर पैदा हुए हैं।

भारत AI में पीछे, कमाई का रास्ता अलग

भारत अभी तक वैश्विक स्तर का AI मॉडल विकसित नहीं कर पाया है और एडवांस सेमीकंडक्टर के लिए आयात पर निर्भर है। दूसरी ओर, निवेशकों को यह भी चिंता है कि जनरेटिव AI भारत के लगभग 315 अरब डॉलर के आईटी सेवा उद्योग पर दबाव डाल सकता है, क्योंकि कई पारंपरिक आउटसोर्सिंग कार्य AI से ऑटोमेट हो सकते हैं। इसी वजह से इस साल शेयर बाजार पर दबाव रहा और विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से बड़ी रकम निकाली। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर इस कमजोरी की भरपाई कर सकता है।

    Yateendra Lawaniya
    यतींद्र लवानियाauthor

    प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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