क्या आप भी कैश में रेंट देते या लेते हैं अगर हां तो ये खबर आपके काम की साबित हो सकती है। दरअसल, कैश लेन-देन को लेकर RBI ने कुछ नियम बनाए हैं जो इनकम टैक्स एक्ट के तहत हैं। अगर आप भी किराए के घर में रहते हैं और हर महीने मकान मालिक को कैश में किराया देते हैं, तो यह तरीका आपको मुश्किल में डाल सकता है। दरअसल, आयकर विभाग (Income Tax Department) के नियमों के मुताबिक, कैश में किराया देने पर आपको टैक्स नोटिस मिल सकता है। आइए जानते हैं आखिर कैश में रेंट देने से इनकम टैक्स नोटिस कैसे भेज सकता है?
क्या कहता है इनकम टैक्स विभाग का नियम?
अगर आप हर महीने नकद किराया देते हैं और इसका कोई सबूत नहीं है, तो इनकम टैक्स विभाग को शक हो सकता है। ऐसे में विभाग आपसे कैश पेमेंट का सबूत मांग सकता है। अगर आप यह साबित नहीं कर पाए कि आपने किराया कैश में ही दिया था, तो जुर्माना भी लग सकता है।
इसलिए टैक्स एक्सपर्ट हमेशा सलाह देते हैं कि किराया हमेशा चेक, बैंक ट्रांसफर या UPI से ही दें। ऐसा करने से आपके पास पेमेंट का रिकॉर्ड रहेगा, जिसे आप जरूरत पड़ने पर इनकम टैक्स विभाग को दिखा सकते हैं। इसके अलावा आपको कुछ अन्य बातों का भी ध्यान रखना चाहिए जिससे आप इनकम टैक्स की रडार में आने से बच सकते हैं।
अगर नोटिस आ जाए तो क्या करें?
अगर इनकम टैक्स विभाग की ओर से आपको नोटिस मिल जाए, तो घबराएं नहीं। उस नोटिस में जो सवाल पूछे गए हैं, उनके जवाब में आपको भुगतान का सबूत और संबंधित दस्तावेज़ देने होंगे। ऐसा करने से मामला आसानी से निपट जाएगा।
टैक्स नोटिस से बचने के आसान तरीके
- हर पेमेंट का रिकॉर्ड रखें खासकर किराया, डिपॉजिट या बड़ी राशि का।
- किराया हमेशा डिजिटल तरीके से दें, जैसे चेक, बैंक ट्रांसफर या UPI।
- अपनी इनकम और खर्चे सही तरीके से टैक्स फाइल में दिखाएं।
