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Panipuri Vendor Gets GST Notice: पानीपुरी वाले की गजब कमाई, GST विभाग ने भेजा 40 लाख का नोटिस; 'जॉब छोड़ने का समय आ गया!'

Panipuri Vendor Gets GST Notice: तमिलनाडु के एक पानी पूरी विक्रेता को वस्तु एवं सेवा कर ( जीएसटी ) नोटिस मिलने से सोशल मीडिया उपयोगकर्ता हैरान हैं, तथा कुछ लोग यह भी सोच रहे हैं कि क्या अब अपना करियर बदलने का समय आ गया है।

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पानीपुरी विक्रेता जीएसटी नोटिस

Photo : Twitter

Panipuri Vendor Gets GST Notice: हाल ही में सोशल मीडिया पर एक हैरान करने वाली खबर वायरल हो रही है, जिसमें बताया गया है कि कुछ पानीपुरी विक्रेताओं को जीएसटी नोटिस प्राप्त हुए हैं, क्योंकि उनकी ऑनलाइन भुगतान प्लेटफार्मों जैसे RazorPay और PhonePe के माध्यम से लेन-देन 40 लाख रुपये से अधिक हो गए हैं। लेकिन यह खबर इस नोटिस से कहीं ज्यादा सोशल मीडिया पर वायरल हो रही प्रतिक्रियाओं के कारण सुर्खियों में है!

पानीपुरी को अब 'PP Waterballs' बनाने का वक्त!

सोशल मीडिया पर इस खबर को लेकर तरह-तरह की मजेदार प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक उपयोगकर्ता ने लिखा, "अब उसे पूंजी बाजार में एंट्री करना चाहिए: PP Waterballs," जबकि एक और उपयोगकर्ता ने चुटकी लेते हुए कहा, "लंदन में निर्यात के बेहतरीन मौके हैं!" कुछ उपयोगकर्ताओं ने तो "विदेशी साझेदारी" और "80% निर्यात यूनिट" जैसे मजेदार सुझाव भी दिए।

क्या सड़क विक्रेता जीएसटी और आयकर से मुक्त हैं?

भारत में, आमतौर पर सड़क विक्रेता जीएसटी या आयकर का भुगतान करने से मुक्त होते हैं, क्योंकि उनकी कारोबारी गतिविधियां छोटे पैमाने पर होती हैं। जीएसटी पंजीकरण सिर्फ उन व्यवसायों के लिए अनिवार्य है, जिनका वार्षिक कारोबार 40 लाख रुपये से अधिक हो। इसी तरह, आयकर केवल उन व्यक्तियों पर लागू होता है, जिनकी वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से अधिक हो, यदि वे 60 वर्ष से कम आयु के हैं।

इसलिए, अधिकतर सड़क विक्रेता छोटे लाभ पर काम करते हैं और ये सीमाएं उनके कारोबार के दायरे में नहीं आतीं, जिसके कारण वे इस कर दायरे से बाहर रहते हैं। यदि वे नकद में भुगतान प्राप्त करते हैं, तो वे और भी आसानी से कर के दायरे से बाहर रह सकते हैं।

ऑनलाइन भुगतान का बढ़ता प्रभाव

हालांकि, अब यह विक्रेता ऑनलाइन भुगतान के बढ़ते चलन की वजह से चर्चा में आ गए हैं। आजकल ग्राहक अक्सर डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से भुगतान करना पसंद करते हैं, जिससे विक्रेताओं की लेन-देन राशि बढ़ गई है। इससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या छोटे विक्रेता अब टैक्स के दायरे में आ सकते हैं।

सोशल मीडिया पर हलचल और हंसी मजाक

इस पूरी स्थिति में सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का तांता लगा हुआ है। एक उपयोगकर्ता ने मजाकिया अंदाज में कहा, "अब तो करियर बदलने का वक्त आ गया है!" इन चुटकुलों के बावजूद यह मामला टैक्स नियमों और डिजिटल लेन-देन के प्रभाव पर गंभीर सवाल उठाता है।

Ashish Kushwaha
आशीष कुशवाहाauthor

<p>आशीष कुमार कुशवाहा Timesnowhindi.com में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर काम कर रहे हैं। वह 2023 से Timesnowhindi.com के साथ जुड़े हैं। वह यहां शेयर बाजार, स्टॉक्स, IPO, पर्सनल फाइनेंस, बिजनेस न्यूज, कंपनी डेवलपमेंट, सक्सेस स्टोरी, यूटिलिटी, ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी और गैजेट से जुड़ी स्टोरी पर काम करते हैं। उनके पास पिछले 3 साल के भारतीय बजट को भी कवर करने का एक्सपीरियंस है। उनके पास ऑटो एक्सपो 2023 को कवर करने का अनुभव है। इसके अलावा ग्राउंड की स्टोरी और रिसर्च बेस्ड स्टोरी करने में विशेष रुचि रखते हैं। उनके पास डिजिटल मीडिया में कुल 3 साल से ज्यादा का एक्सपीरियंस है। इससे पहले इन्होंने वन इंडिया, दैनिक भास्कर डिजिटल में काम किया है। इन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है। वहीं ग्रेजुएशन की पढ़ाई रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर से मास कम्यूनिकेशन में की है। उन्हें शुरू से ही डिबेट करने, सामाजिक मुद्दों पर बात करने और शेयर बाजार में रुचि थी। उन्हें बचपन से ही अखबार के संपादकीय पेज और न्यूज पढ़ने का सौख था। स्कूल के समय उन्होंने कई क्विज कंपटीशन में भी हिस्सा लिया और प्राइज जीते हैं।</p>

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