Oil Prices : अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिला है। इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका का ईरान से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले को माना जा रहा है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय (US Treasury Department) ने 21 जून को जारी किया गया वह सामान्य लाइसेंस (General Licence) रद्द कर दिया है, जिसके तहत सीमित मात्रा में ईरानी तेल की बिक्री की अनुमति दी गई थी। इस फैसले के बाद वैश्विक तेल बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई, जिससे कच्चे तेल की कीमतें तेजी से ऊपर चली गईं।
होर्मुज जलडमरूमध्य में हमलों से बढ़ी चिंता
अमेरिका का यह फैसला ऐसे समय आया है जब दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तीन तेल टैंकरों पर हमला हुआ। इस घटना ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंता और बढ़ा दी है। कतर, सऊदी अरब और बहरीन ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है और समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर इस क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है, तो दुनिया भर में तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
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ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी
बाजार में बढ़ती अनिश्चितता का असर तेल की कीमतों पर साफ दिखाई दिया। मंगलवार को कारोबार बंद होने के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत (Brent Crude Prices) में 3 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। एक बैरल ब्रेंट क्रूड 1.87 डॉलर महंगा होकर 76.03 डॉलर तक पहुंच गया। वहीं, ईरान पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की खबरों के बाद अमेरिकी कच्चे तेल (WTI Crude) की कीमत भी 3 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 72.65 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई।
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आगे क्या हो सकता है असर?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं हुआ और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी रही, तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। इसका सीधा असर पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधन की कीमतों पर भी पड़ सकता है। भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय है, क्योंकि महंगा कच्चा तेल आयात बिल बढ़ाने के साथ-साथ महंगाई पर भी दबाव डाल सकता है। अब बाजार की नजर अमेरिका, ईरान और पश्चिम एशिया के हालात पर बनी रहेगी।
