FDI Inflow in India : वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बेहद मजबूत और सकारात्मक खबर आई है। हालिया आंकड़ों और रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के मामले में भारत की स्थिति में बड़ा सुधार हुआ है। भारत वैश्विक FDI रैंकिंग में 2 पायदान ऊपर चढ़ गया है, जो दुनिया भर के निवेशकों के बीच देश की मजबूत साख को दर्शाता है।
यूनाइटेड नेशन्स ट्रेड एंड डेवलपमेंट (UNCTAD) की लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक सालाना आधार पर भारत में FDI इनफ्लो में 44% का ऐतिहासिक उछाल देखने को मिला है। इसकी वजह से भारत में विदेशी निवेश पिछले 5 वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। जहां एक तरफ चीन जैसे पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग हब से विदेशी पूंजी का प्रवाह धीमा हुआ है, वहीं भारत रणनीतिक निवेश और 'ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स' (नए उद्योगों की स्थापना) के लिए वैश्विक निवेशकों की पहली पसंद बनकर उभरा है।
क्यों आया ट्रेंड में बदलाव
नीतिगत स्थिरता और आर्थिक सुधार FDI की आवक में बड़ी वजह हैं। खासतौर पर सरकार की तरफ से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने और नियमों को सरल बनाने से निवेशकों का हौसला बढ़ा है। इसके अलावा दुनियाभर के निवेशकों को भारत की इकोनॉमी की ताकत में दिलचस्पी है। भारत की विशाल और युवा आबादी (Demographic Dividend) के कारण घरेलू बाजार में मांग लगातार मजबूत बनी हुई है, जो लंबी अवधि के निवेशकों को आकर्षित कर रही है।
चीन के विकल्प की तलाश
ग्लोबल सप्लाई चेन पर चीन के कब्जे को लेकर दुनियाभर में अब असहजता दिख रही है। अब दुनिया सप्लाई चेन में विविधीकरण चाहती है। इसके लिए वैश्विक कंपनियां अब चीन पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए 'चाइना प्लस वन' (China+1) रणनीति के तहत भारत को एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प के रूप में देख रही हैं।
11वें पायदान पर भारत
UNCTAD की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक भारत 39 अरब डॉलर के साथ दुनिया में 11वां सबसे बड़ा FDI डेस्टिनेशन बना है। इस लिस्ट में USA 277 अरब डॉलर के इनफ्लो के साथ टॉप पर है। वहीं, 105 अरब डॉलर के साथ चीन 4 पायदान पर है। चीन की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। वहीं, बॉस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) की 'इंडिया इकोनॉमिक मॉनिटर' जून 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक ग्लोबल फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) का पूरा डायनेमिक्स बदल रहा है। बदलता हुआ ट्रेंड बता रहा है कि चीन जो कभी दुनिया का सबसे बड़ा FDI डेस्टिनेशन हुआ करता था, वह अब एक 'कैपिटल एक्सपोर्टर' बन रहा है। इसके विपरीत, भारत रणनीतिक 'ग्रीनफील्ड FDI' (नए प्रोजेक्ट्स में सीधे विदेशी निवेश) के लिए दुनिया का नया हॉटस्पॉट बनकर उभरा है।
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