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14 जुलाई से भारत की अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया रिपोर्ट कार्ड, क्या है ISP और आप पर कैसे पड़ेगा असर?

  • Agency by: Agency
  • Updated Jul 8, 2026, 08:24 AM IST

भारत की अर्थव्यवस्था को बेहतर तरीके से मापने की दिशा में सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। 14 जुलाई से देश में पहली बार इंडेक्स ऑफ सर्विसेज प्रोडक्शन (ISP) जारी किया जाएगा।

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सेवा क्षेत्र के डेटा देगा ग्रोथ को रफ्तार

What is ISP : भारत की अर्थव्यवस्था को मापने का तरीका अब बदलने जा रहा है। 14 जुलाई से सरकार पहली बार इंडेक्स ऑफ सर्विसेज प्रोडक्शन (ISP) जारी करेगी। यह ऐसा मासिक इंडिकेटर होगा, जिससे पता चलेगा कि देश का सेवा क्षेत्र कितनी तेजी से बढ़ रहा है या उसमें सुस्ती आ रही है। अब तक सरकार के पास उद्योग क्षेत्र की गतिविधियों को मापने के लिए इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) था, लेकिन सेवा क्षेत्र के लिए ऐसा कोई मासिक इंडेक्स नहीं था। जबकि आज भारत की अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा योगदान सेवा क्षेत्र का ही है। ऐसे में ISP को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

आखिर ISP क्या है?

ISP यानी इंडेक्स ऑफ सर्विसेज प्रोडक्शन। यह एक मासिक आर्थिक संकेतक होगा, जो बताएगा कि देश के अलग-अलग सेवा क्षेत्रों में गतिविधियां बढ़ रही हैं या घट रही हैं। इसे सेवा क्षेत्र का "IIP" भी कह सकते हैं। जिस तरह IIP फैक्ट्री और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की स्थिति बताता है, उसी तरह ISP सेवा क्षेत्र की सेहत बताएगा।

इसकी जरूरत क्यों पड़ी?

भारत की अर्थव्यवस्था में पिछले कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव आया है। पहले मैन्युफैक्चरिंग और कृषि का योगदान ज्यादा था, लेकिन अब सेवा क्षेत्र देश की जीवीए (ग्रॉस वैल्यू एडेड) का 50% से ज्यादा हिस्सा देता है। इसके बावजूद सरकार के पास सेवा क्षेत्र का कोई मासिक इंडिकेटर नहीं था। ऐसे में आर्थिक गतिविधियों की पूरी तस्वीर सामने नहीं आ पाती थी। नया ISP इसी कमी को दूर करेगा।

किन सेक्टरों को इसमें शामिल किया गया है?

नए इंडेक्स में कई बड़े सेवा क्षेत्रों को शामिल किया गया है। क्योंकि व्यापार, परिवहन, दूरसंचार, होटल और आवास, मनोरंजन, रियल एस्टेट, बैंकिंग और बीमा मिलकर सेवा क्षेत्र के करीब दो-तिहाई जीवीए का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में इस इंडेक्स में इन सभी सेक्टर को शामिल किया गया है।

स्वास्थ्य और शिक्षा को क्यों छोड़ा गया?

फिलहाल स्वास्थ्य और शिक्षा इस इंडेक्स का हिस्सा नहीं होंगे। क्योंकि इन क्षेत्रों का नियमित और भरोसेमंद डेटा अभी उपलब्ध नहीं है। सरकार आगामी Annual Survey of Incorporated Services Sector Enterprises (ASISSE) के बाद इन क्षेत्रों को भी इंडेक्स में शामिल करने की योजना बना रही है। इसके अलावा अनौपचारिक सेवा क्षेत्र, लोक प्रशासन, रक्षा, सामाजिक सेवाएं और केंद्रीय बैंक से जुड़ी गतिविधियां भी अभी बाहर रहेंगी।

यह डेटा कहां से आएगा?

ISP तैयार करने के लिए कई सरकारी और प्रशासनिक स्रोतों का इस्तेमाल किया जाएगा। सबसे बड़ा स्रोत होगा GSTN (जीएसटी नेटवर्क) का डेटा। इसके अलावा रेलवे, विमानन, बैंकिंग और बीमा क्षेत्रों के प्रशासनिक आंकड़ों का भी उपयोग किया जाएगा। यानी इंडेक्स वास्तविक आर्थिक गतिविधियों के आधार पर तैयार होगा।

इससे सरकार को क्या फायदा होगा?

अब सरकार को हर महीने यह पता चल सकेगा कि सेवा क्षेत्र में तेजी है या मंदी। अगर किसी सेक्टर में गिरावट दिखती है तो समय रहते नीतिगत फैसले लिए जा सकेंगे। इससे आर्थिक नीति बनाना ज्यादा आसान होगा।

निवेशकों के लिए क्यों अहम है?

विदेशी निवेशक, रेटिंग एजेंसियां और बाजार के विशेषज्ञ किसी भी देश के आर्थिक संकेतकों पर नजर रखते हैं। अब उन्हें सेवा क्षेत्र की भी हर महीने अपडेट मिलने लगेगी। इससे भारत की अर्थव्यवस्था का आकलन पहले से ज्यादा सटीक हो सकेगा और निवेश संबंधी फैसले लेने में आसानी होगी।

आम लोगों पर इसका क्या असर पड़ेगा?

ISP सीधे आपकी जेब में पैसा नहीं डालेगा, लेकिन इसके जरिए सरकार और उद्योग जगत को समय पर संकेत मिलेंगे कि अर्थव्यवस्था किस दिशा में जा रही है। अगर सेवा क्षेत्र मजबूत रहेगा तो रोजगार, निवेश, कारोबार और आय बढ़ने की संभावना भी मजबूत होगी। वहीं अगर किसी सेक्टर में कमजोरी दिखेगी तो सरकार समय रहते कदम उठा सकेगी।

डिजिटल अर्थव्यवस्था पर भी होगी नजर

नीति आयोग की समिति भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था को मापने के लिए भी अलग ढांचा तैयार कर रही है। आने वाले समय में डिजिटल सेवाओं का योगदान भी अलग से मापा जा सकेगा।

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