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New Tax Regime में भी बचेगा भारी टैक्स! जानिए सैलरीड क्लास के लिए टैक्स छूट पाने के 7 बेहतरीन तरीके

New Tax Regime में भी सैलरीड कर्मचारी NPS में नियोक्ता के योगदान, EPF लाभ, 75,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन, होम लोन ब्याज, टैक्स-फ्री रीइम्बर्समेंट, कुछ भत्तों और गिफ्ट छूट का फायदा उठाकर टैक्स देनदारी कम कर सकते हैं।

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Income Tax

नौकरीपेशा लोगों (Salaried Class) के बीच अक्सर यह चर्चा रहती है कि नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) में टैक्स बचाना नामुमकिन है, क्योंकि इसमें पुरानी व्यवस्था की तरह होम लोन प्रिंसिपल या 80C जैसी छूटें नहीं मिलतीं। लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है। न्यू टैक्स रिजीम में भले ही कई पुरानी और पारंपरिक छूटें खत्म कर दी गई हों, लेकिन सही और स्मार्ट टैक्स प्लानिंग के जरिए अब भी अपनी कमाई पर लगने वाले टैक्स को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सरकार ने इस व्यवस्था को आकर्षक बनाने के लिए कई ऐसे प्रावधान छोड़े हैं, जिनका फायदा उठाकर सैलरीड क्लास के लोग टैक्स लायबिलिटी को घटा सकते हैं। आइए बताते हैं 7 बेहतरीन तरीके जो वित्तीय वर्ष 2025-26 में आपका टैक्स(Income Tax) बचाने में मददगार साबित होंगे।

7 तरीकों से आप बचा सकते हैं टैक्स

स्टैण्डर्ड डिडक्शन

इस लिस्ट में सबसे पहला और बड़ा फायदा 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन है। न्यू टैक्स रिजीम चुनने वाले सभी सैलरीड कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को सरकार की तरफ से फ्लैट 75,000 रुपये की सीधी छूट मिलती है। इस डिडक्शन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसके लिए आपको अपने दफ्तर या इनकम टैक्स विभाग को कोई भी निवेश का प्रूफ, मेडिकल बिल या मकान किराये की रसीद दिखाने की जरूरत नहीं होती। यह आपकी कुल सालाना सैलरी में से सीधे घटा दी जाती है, जिससे आपकी टैक्स योग्य आय (Taxable Income) तुरंत कम हो जाती है।

NPS

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में नियोक्ता (Employer) का योगदान है। भले ही नई टैक्स व्यवस्था में कर्मचारी द्वारा खुद किए गए एनपीएस निवेश पर कोई टैक्स लाभ नहीं मिलता, लेकिन यदि आपकी कंपनी या नियोक्ता आपके एनपीएस खाते में योगदान करता है, तो आप धारा 80CCD(2) के तहत टैक्स कटौती का दावा कर सकते हैं। इसके नियम के मुताबिक, नियोक्ता आपकी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (DA) के कुल 14% तक की राशि आपके एनपीएस में जमा कर सकता है और यह पूरी राशि टैक्स फ्री होगी। उदाहरण के लिए, यदि आपकी बेसिक सैलरी और डीए मिलाकर सालाना 12 लाख रुपये है, और कंपनी इसका 14% यानी 1.68 लाख रुपये आपके एनपीएस में डालती है, तो इस पूरी रकम पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा। यह लाभ 75,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन के अतिरिक्त मिलता है।

EPF

तीसरा तरीका एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) में कंपनी का योगदान है। पुरानी व्यवस्था की तरह आप खुद जो ईपीएफ में योगदान देते हैं, उस पर 80C के तहत यहाँ कोई छूट नहीं मिलेगी। लेकिन, आपकी कंपनी द्वारा आपके पीएफ खाते में किया जाने वाला योगदान एक तय सीमा तक पूरी तरह टैक्स फ्री रहता है। आपको बस इस बात का ध्यान रखना है कि नियोक्ता द्वारा आपके ईपीएफ, एनपीएस और सुपरएन्युएशन फंड में किया गया कुल सालाना योगदान 7.5 लाख रुपये से अधिक न हो। यदि यह योगदान 7.5 लाख रुपये सालाना की सीमा को पार करता है, तो केवल अतिरिक्त राशि पर ही टैक्स लागू होगा।

हाउस प्रॉपर्टी

चौथा विकल्प उन लोगों के लिए है जिनके पास खुद का घर है और उन्होंने उसे किराये पर दिया हुआ है। यदि आपने कोई प्रॉपर्टी होम लोन पर ली है और उसे किराये पर उठा रखा है, तो उस लोन पर चुकाए जाने वाले ब्याज (Interest) पर मिलने वाली टैक्स कटौती का लाभ आप न्यू टैक्स रिजीम में भी उठा सकते हैं। हालांकि, इस नियम के साथ एक शर्त जुड़ी हुई है; इस ब्याज की कटौती का इस्तेमाल आप केवल 'हाउस प्रॉपर्टी' से होने वाली आय (यानी मिलने वाले किराये) के खिलाफ ही कर सकते हैं। खुद के रहने वाले मकान (Self-occupied property) के होम लोन ब्याज पर इसमें कोई छूट नहीं मिलती।

रीइम्बर्समेंट

पांचवां तरीका कंपनी से मिलने वाले कुछ खास परक्विजिट्स (Perquisites) और रीइम्बर्समेंट का सही इस्तेमाल करना है। नई टैक्स व्यवस्था में भी कई ऐसी ऑफिशियल सुविधाएं हैं जिन पर टैक्स नहीं लगता। उदाहरण के लिए, यदि आप ऑफिस के काम के लिए मोबाइल और इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं और कंपनी उसका बिल रीइम्बर्स (वापस) करती है, तो वह राशि टैक्स फ्री होती है। इसके अलावा कंपनी की तरफ से मिलने वाला मोबाइल फोन, कर्मचारियों के लिए हेल्थ और वेलनेस प्रोग्राम, और कुछ निर्धारित शर्तों के तहत मिलने वाले मील वाउचर (भोजन की सुविधा) पर भी टैक्स की छूट मिलती है।

Allowances

छठा रास्ता आधिकारिक काम से जुड़े भत्तों (Allowances) का है। अगर आप ऑफिस के काम से किसी यात्रा पर जाते हैं, आपका ट्रांसफर होता है, या ड्यूटी के दौरान आपको कोई ऑफिशियल खर्च करना पड़ता है, तो उसके एवज में मिलने वाले भत्ते पूरी तरह टैक्स फ्री होते हैं। इसके साथ ही दिव्यांग कर्मचारियों को मिलने वाला ट्रांसपोर्ट अलाउंस और नौकरी के दौरान जरूरी यूनिफॉर्म की खरीद या उसके रखरखाव के लिए मिलने वाला यूनिफॉर्म अलाउंस भी तय शर्तों के तहत टैक्स के दायरे से बाहर रहता है।

गिफ्ट और फैमिली पेंशन

सातवां और आखिरी तरीका नियोक्ता से मिलने वाले गिफ्ट और फैमिली पेंशन से जुड़ा है। वित्त वर्ष 2025-26 के नियमों के अनुसार, यदि आपकी कंपनी आपको सालभर में 5,000 रुपये तक का कोई गिफ्ट या वाउचर देती है, तो उस पर टैक्स नहीं लगेगा। इसके अलावा शादी, वसीयत या विरासत के जरिए मिलने वाले उपहार भी टैक्स से मुक्त होते हैं। वहीं, यदि किसी मृत कर्मचारी के परिवार के सदस्य को फैमिली पेंशन मिल रही है, तो उन्हें भी न्यू टैक्स रिजीम में राहत दी गई है। इसके तहत फैमिली पेंशन के एक-तिहाई हिस्से या 25,000 रुपये सालाना (दोनों में से जो भी कम हो) तक की कटौती का लाभ उठाया जा सकता है। इन सभी कानूनी तरीकों को समझकर यदि आप अपनी सैलरी को सही ढंग से स्ट्रक्चर करते हैं, तो न्यू टैक्स रिजीम में भी आप एक बड़ा टैक्स बचा सकते हैं।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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