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Nepal Petrol Price Hike: ईंधन संकट और महंगाई की दोहरी मार झेल रहा नेपाल, चौथी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम

पड़ोसी देश नेपाल इस वक्त एक बड़े आर्थिक संकट के जूझ रहा है। ईंधन संकट और बेकाबू होती महंगाई के बीच नेपाल सरकार ने एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा कर दिया है।

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Nepal Fuel Crisis: नेपाल में चौथी बार बढ़े Petrol-Diesel के दाम (Photo: iStock)

Nepal Petrol Price Hike: नेपाल इन दिनों ईंधन संकट और महंगाई की दोहरी मार झेल रहा है। नेपाल में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार चौथी बार बढ़ोतरी की गई है, जिससे आम लोगों की परेशानी और बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण माना जा रहा है।

पेट्रोल की कीमत 216 रुपये प्रति लीटर के पार

Nepal Fuel Crisis

Nepal Fuel Crisis : नेपाल में चौथी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम (Photo: Nepal Oil Corporation)

नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन (NOC) ने पेट्रोल (Petrol)की कीमत में 17 रुपए प्रति लीटर और डीजल (Diesel) की कीमत में करीब 25 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी की है। इस बढ़ोतरी के बाद नेपाल के कई शहरों में पेट्रोल की कीमत 216.50 रुपये प्रति लीटर और 1 लीटर डीजल के दाम 204.50 रुपये हो चुका है।

ईंधन आया पर निर्भर देश नेपाल

नेपाल क्योंकि पूरी तरह से ईंधन आयात पर निर्भर देश है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर यहां की कीमतों पर पड़ता है। खासकर भारत से आयात होने वाले पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत में बदलाव होने पर नेपाल में भी कीमतें तुरंत बढ़ा दी जाती हैं।

आम जनता पर महंगाई की मार

ईंधन महंगा होने का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। परिवहन महंगा होने से रोजमर्रा की चीजों के दाम भी बढ़ने लगते हैं, जिससे महंगाई और तेज हो जाती है। यही वजह है कि आम जनता के साथ-साथ व्यापारियों और उद्योगों पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है।

नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन को हो रहा नुकसान

इसके अलावा, नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन को लगातार नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की जाती, तो कंपनी को भारी आर्थिक घाटा उठाना पड़ता। यही कारण है कि मजबूरी में सरकार को बार-बार ईंधन की कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं।

सरकारी कंपनी के मुताबिक, कस्टम ड्यूटी और इंफ्रास्ट्रक्चर टैक्स में बदलाव किए जाने के बावजूद उसे हर 15 दिन में लगभग 10.21 अरब रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है। यानी दाम बढ़ाने के बाद भी घाटे में खास कमी नहीं आई है।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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