East India Company Bharat kyon aai: ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत के एक बड़े हिस्से को सैकड़ों सालों तक कंट्रोल किया और देश के लोगों पर हुकूमत की। लेकिन इतिहास में झांके तो पता चलता है कि ईस्ट इंडिया कंपनी भारत में केवल व्यापार करने आई थी, तो ऐसे में सवाल उठता है कि फिर वो सत्ता तक कैसे पहुंच गई? आइए जानें दिलचस्प किस्से के बारे में...शुरू में ईस्ट इंडिया कंपनी भारत में 'व्यापार करके मुनाफा कमाने' आई थी। कंपनी भारत से मसाले, कपड़ा, रेशम, नील और दूसरी मूल्यवान वस्तुएं खरीदकर यूरोप में बेचने का कारोबार करना चाहती थी। उस दौर में भारतीय वस्तुओं की कई देशों सहित यूरोप में काफी मांग थी।
ईस्ट इंडिया कंपनी पानी के रास्ते भारत आई थी। वे जिस जहाज से भारत आए थे, उसके कप्तान 'विलियम हॉकिन्स' थे। हॉकिन्स अपने साथ इंग्लैंड के राजा का पत्र और मुगल शासक के लिए उपहार लेकर आए थे। उनका उद्देश्य मुगल दरबार से अंग्रेज व्यापारियों के लिए सुविधाएं हासिल करना था। हॉकिन्स आगरा में जहांगीर के दरबार पहुंचे। उन्होंने अंग्रेजों के लिए व्यापार की अनुमति हासिल करने की कोशिश की, लेकिन पुर्तगालियों के विरोध और उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों के कारण उन्हें तत्काल सफलता नहीं मिली।
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इधर ईस्ट इंडिया कंपनी इस बात को अच्छे से समझती थी कि भारत के साथ सीधे समुद्री व्यापार से उसे बड़ा आर्थिक फायदा मिल सकता था। इसलिए उसने कोशिश बनाए रखी। कई मुश्किलों के बाद उसे व्यापार की अनुमति मिली। इसके बाद धीरे धीरे कंपनी ने व्यापार शुरू किया, उसे बढ़ाया। एक समय के बाद या यूं कहें कि कई वर्षां के बाद कंपनी ने अपने व्यापारिक हितों की सुरक्षा के लिए सैनिक ताकत बढ़ाई। जब सैनिक बढ़े तो हथियार भी बढ़े, और जिसके पास ज्यादा हथियार, यानी उसकी ताकत भी ज्यादा।
कंपनी ने भारत के अलग-अलग हिस्सों में अपने व्यापारिक केंद्र बनाए। आगे चलकर मद्रास, बंबई और कलकत्ता जैसे शहर उसके प्रमुख केंद्र बने।
18वीं सदी में कंपनी का राजनीतिक प्रभाव तेजी से बढ़ने लगा। अंग्रेजों और भारतीयों के बीच संबंध बिगड़ चुके थे, लेकिन काफी देर हो चुकी थी। अब अंग्रेज इतनी मतबूज स्थिति में थे, कि वे युद्ध के लिए भी तैयार थे। अब वक्त आ गया था 1757 का, जब ईस्ट इंडिया कंपनी और बंगाल के नवाब में पहली लड़ाई हुई, जिसे आप 'प्लासी की लड़ाई' के नाम से जानते हैं। इस लड़ाई के दो मुख्य कारण थे:
- बंगाल के नवाब द्वारा अंग्रेजों को दिए गए व्यापारिक विशेषाधिकारों का दुरुपयोग।
- ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के कर्मचारियों द्वारा कर और शुल्क का भुगतान न करना।
प्लासी का यह युद्ध 23 जून 1757 को हुआ था। कंपनी की सेना ने रॉबर्ट क्लाइव के नेतृत्व में नबाव सिराजुद्दौला को हरा दिया था, और इसी क्षण से अंग्रेजों ने देश के दूसरे हिस्सों पर भी अपनी ताकत से कब्जा करना शुरू कर दिया था।
कंपनी ने अलग-अलग भारतीय शासकों के बीच राजनीतिक संघर्षों में हस्तक्षेप किया, फूट डाला, लालच दिया, भरोसा तोड़ा, भारत के निर्दोष लोग और कमजोरियों का फायदा उठाया....हथियार और चालाकी के दम पर जमीनें कब्जाईं, और ऐसे करते करते एक समय के बाद वो व्यापार करने वाली कंपनी से आगे बढ़ गई।
