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देश के इन पेट्रोल पंपों पर अब सिर्फ ₹1000 का मिलेगा तेल, आखिर क्या है वजह?

देश की सबसे बड़ी प्राइवेट रिफाइनर रिलायंस ने अपने पेट्रोल पंपों पर ईंधन की बिक्री सीमित कर दी है। अब ग्राहक एक बार में केवल ₹1000 का तेल खरीद सकेंगे। आखिर रिलायंस ने ऐसा क्यों किया आइए जानते हैं?

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Reliance Petrol Pump

पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते तनाव और सप्लाई चेन में आई भारी रुकावटों का सीधा असर अब भारतीय आम आदमी की जेब और गाड़ियों पर दिखने लगा है। देश की सबसे बड़ी प्राइवेट रिफाइनर, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने एक चौंकाने वाला कदम उठाते हुए अपने पेट्रोल पंपों पर ईंधन की बिक्री को सीमित कर दिया है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिलायंस और बीपी (Jio-BP) के पेट्रोल पंपों पर अब ग्राहक एक बार में केवल 1000 रुपये तक का ही पेट्रोल या डीजल खरीद पा रहे हैं। यह स्थिति तब पैदा हुई है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास जारी संकट ने कच्चे तेल की वैश्विक सप्लाई को बुरी तरह प्रभावित किया है। हालांकि कंपनी ने इसे एक 'लोकलाइज्ड' यानी स्थानीय समस्या बताया है, लेकिन देश भर के 2,000 से ज्यादा फ्यूल स्टेशनों पर इस तरह की पाबंदी ने वाहन चालकों की चिंता बढ़ा दी है।

क्यों लिया गया ये फैसला?

इस पाबंदी के पीछे कई गंभीर कारण बताए जा रहे हैं। सबसे प्रमुख कारण युद्ध के चलते टैंकरों की आवाजाही में आ रही बाधा है, जिससे पंपों तक पहुंचने वाला स्टॉक कम हो गया है। जब लोगों को तेल की कमी की भनक लगी, तो 'पैनिक बाइंग' शुरू हो गई, यानी लोग डर के मारे जरूरत से ज्यादा तेल भरवाने लगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसी भीड़ और स्टॉक को मैनेज करने के लिए कंपनी को 1000 रुपये की सीमा तय करनी पड़ी। इसके अलावा, एक बड़ा कारण आर्थिक घाटा भी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, लेकिन भारत में रिटेल पंपों पर कीमतें उस अनुपात में नहीं बढ़ाई गई हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, निजी रिटेलर्स को इस समय पेट्रोल और डीजल बेचने पर भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिसकी भरपाई के लिए वे बिक्री को सीमित कर रहे हैं।

क्या है अन्य कंपनियों का हाल

सिर्फ रिलायंस ही नहीं, बल्कि अन्य निजी कंपनियों जैसे नायरा एनर्जी (Nayara Energy) ने भी घाटे से बचने के लिए पिछले महीने ही तेल की कीमतों में इजाफा कर दिया था। सरकारी कंपनियों (IOC, BPCL, HPCL) ने हालांकि आधिकारिक तौर पर कोई लिमिट नहीं लगाई है, लेकिन कई शहरों से ऐसी खबरें आ रही हैं कि वहां भी 1000 रुपये से ज्यादा का तेल देने में आनाकानी की जा रही है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% तेल आयात करता है, ऐसे में फारस की खाड़ी में होने वाली कोई भी हलचल भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है। भले ही अमेरिका और ईरान के बीच फिलहाल युद्धविराम है, लेकिन बीमा कंपनियों ने इस समुद्री रास्ते को अभी भी 'हाई-रिस्क' जोन में रखा है, जिससे जहाजों का आना-जाना सामान्य नहीं हो पा रहा है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो आने वाले दिनों में आम जनता को तेल की और अधिक किल्लत और बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ सकता है।

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Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठी author

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिच... और देखें

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