दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में रहने वाले लोगों और रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। नेशनल कैपिटल रीजन प्लानिंग बोर्ड (NCRPB) की अहम बैठक में यह फैसला लिया गया है कि अगले 5 वर्षों के भीतर एनसीआर के दायरे में 4 नए अत्याधुनिक 'ग्रीनफील्ड' शहर बसाए जाएंगे, जिन्हें 'नमो सिटीज' (Namo Cities) या 'नमो नोड्स' कहा जाएगा। केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इस मेगा प्रोजेक्ट का औपचारिक ऐलान करते हुए बताया कि केंद्र सरकार इस योजना के लिए अगले पांच सालों में ₹5,000 करोड़ रुपये की बड़ी वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। यह कदम एनसीआर में लगातार बढ़ती आबादी के दबाव को कम करने और भविष्य की जरूरतों के मुताबिक विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा (World-class Infrastructure) तैयार करने के लिए उठाया जा रहा है।
कहां बनेगी नमो सिटीज
ये चारों नए 'नमो' शहर एनसीआर में शामिल चारों राज्यों दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में एक-एक की संख्या में विकसित किए जाएंगे। इस बड़े बदलाव के बावजूद केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया है कि एनसीआर का मौजूदा कुल क्षेत्रफल (55,083 वर्ग किलोमीटर) पूरी तरह से अपरिवर्तित रहेगा। किसी भी मौजूदा जिले या क्षेत्र को एनसीआर के नक्शे से बाहर नहीं किया जा रहा है। सरकार का मुख्य ध्यान नए सिरे से जमीन का अधिग्रहण कर पूरी तरह से व्यवस्थित और योजनाबद्ध (Planned) तरीके से नए उप-शहरों (Sub-cities) को बसाने पर है, जहां बेहतरीन आवासीय सुविधाएं, रोजगार के अवसर, स्कूल और अस्पताल मौजूद होंगे।
इस मास्टर प्लान को जमीन पर उतारने के लिए एनसीआर को चार प्रमुख पॉलिसी जोन्स (Four Policy Zones) में बांटा गया है। पहला जोन नेशनल कैपिटल टेरिटरी (NCT) दिल्ली है। दूसरा सेंट्रल एनसीआर है, जो दिल्ली की सीमाओं से शुरू होकर ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे के बाहरी किनारों से 5 किलोमीटर आगे तक फैला है; अधिकारियों ने इसे शहरी विकास के लिए 'गोल्डन रिंग ऑफ अपॉर्चुनिटी' कहा है। तीसरा सबसे महत्वपूर्ण जोन 'हाईवे कॉरिडोर जोन और ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट' (Highway Corridor Zone & TOD) है। इसके तहत सभी नए नमो शहरों को प्रमुख एक्सप्रेसवे, नेशनल हाईवे और रैपिड रेल (RRTS) कॉरिडोर के आसपास विकसित किया जाएगा ताकि लोगों को हाई-स्पीड रोड और बेहतरीन रेल कनेक्टिविटी मिल सके। चौथा जोन बाकी बचा हुआ एनसीआर का हिस्सा है।
कैसे तैयार होगा प्लान?
नमो सिटीज के चयन और विकास के लिए एक बहुत ही दिलचस्प 'चैलेंज' प्रक्रिया अपनाई जा रही है। नियम के मुताबिक, प्रोजेक्ट में शामिल प्रत्येक राज्य सरकार (यूपी, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली) को अपने-अपने यहां से तीन संभावित लोकेशंस के प्रस्ताव केंद्र को भेजने होंगे। इन तीन प्रस्तावों में से एक सबसे बेहतरीन लोकेशन को प्रतियोगिता (Challenge) के आधार पर फाइनल किया जाएगा। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश सरकार ने इस नई ग्रीनफील्ड सिटी के लिए नोएडा (Noida), दादरी (Dadri), जेवर (Jewar) और बुलंदशहर (Bulandshahr) के क्षेत्रों को संभावित उम्मीदवारों के रूप में प्रस्तावित किया है, जिनमें से किसी एक को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसी तरह राजस्थान और हरियाणा सरकारें भी जल्द ही अपने अंतिम प्रस्ताव बोर्ड के सामने रखेंगी।
इस मेगा प्रोजेक्ट को लाने की असली वजह भविष्य का एक बड़ा अनुमान है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगले 15 वर्षों में एनसीआर की कुल आबादी दोगुनी होकर करीब 15 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है, जिसमें से लगभग 67% आबादी शहरी क्षेत्रों में निवास करेगी। इस भारी आबादी को बेहतर जीवन स्तर, प्रदूषण मुक्त वातावरण और ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाने के लिए इन 4 ग्रीनफील्ड शहरों का निर्माण बेहद जरूरी हो गया है। ₹5,000 करोड़ के इस शुरुआती बजट से कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे को रफ्तार दी जाएगी, जिससे आने वाले समय में इन क्षेत्रों में जमीनों के दाम और निवेश के नए रास्ते खुलेंगे। यह प्रोजेक्ट न केवल दिल्ली के भीड़भाड़ वाले इलाकों को राहत देगा, बल्कि एनसीआर के चारों राज्यों के संतुलित और आधुनिक विकास को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा।
