Medicines & Medical Equipment: केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री मनसुख मंडाविया ने शनिवार को उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (PLI Scheme) के तहत 40 परियोजनाओं का उद्घाटन किया, जिनका मकसद थोक दवाओं और मेडिकल इक्विपमेंट के आयात पर भारत की निर्भरता को कम करना है। इन ग्रीनफील्ड फैसिलिटीज में से 27 थोक दवाओं के लिए हैं और 13 मेडिकल इक्विपमेंट की मैन्युफैक्चरिंग के लिए हैं। इन सुविधाओं में जिन थोक दवाओं की मैन्युफैक्चरिंग की जाएगी, उनमें लेवोफ्लॉक्सासिन, ओफ्लॉक्सासिन, टेल्मिसर्टन, विटामिन बी6 और डाइक्लोफेनाक सोडियम शामिल हैं। मेडिकल इक्विपमेंट के नए प्लांट सीटी स्कैन और एमआरआई, कैथ लैब और अल्ट्रासोनोग्राफी के साथ-साथ ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, वेंटिलेटर, डायलिसिस मशीन और स्टेंट आदि मशीनों की मैन्युफैक्चरिंग करेंगे।
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पेनिसिलिन जी भी भारत में बनेगी
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जल्द ही पेनिसिलिन जी भारत में बनाई जाएगी। पिछले 30 वर्षों से इसका उत्पादन भारत में नहीं हुआ है। अब, आत्मनिर्भर भारत के तहत, हम इसे देश में ही तैयार करेंगे। मंडाविया ने कहा कि 6,940 करोड़ रुपये के कुल निवेश वाली पीएलआई योजना में वित्त वर्ष 2020-21 से वित्त वर्ष 2029-30 तक योजना की अविध के दौरान 41 थोक दवाओं की मैन्युफैक्चरिंग की उम्मीद है।
क्या है पीएलआई योजना का मकसद
विभिन्न कंपनियों की ओनरशिप वाले इन प्लांट्स को पीएलआई (उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन) योजना के तहत तैयार किया गया है। मंडाविया ने कहा कि महत्वपूर्ण एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) की सप्लाई में किसी भी अड़चन से देश में 1,000 फॉर्मूलेशन के उत्पादन पर असर पड़ सकता है। इस बात को ध्यान में रखकर पीएलआई योजना शुरू की गई।
