किसी भी व्यक्ति के जीवन में कब कौन-सी परिस्थिति आ जाए इसका पहले से अनुमान नहीं लगाया जा सकता है। खासकर स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं अक्सर बिना किसी चेतावनी के सामने आ जाती हैं। किसी परिवार के सदस्य की अचानक तबीयत बिगड़ जाए, दुर्घटना हो जाए या किसी गंभीर बीमारी का इलाज करवाना पड़ जाए, तो एक झटके में लाखों रुपये की जरूरत पड़ सकती है। ऐसी स्थिति में आर्थिक तनाव से बचने के लिए हर व्यक्ति के पास एक मजबूत मेडिकल इमरजेंसी फंड (Medical Emergency Fund) होना बेहद जरूरी है।
क्या होता है मेडिकल इमरजेंसी फंड?
मेडिकल इमरजेंसी फंड वह राशि होती है, जिसे केवल स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों के लिए अलग रखा जाता है। यह पैसा अस्पताल में भर्ती होने, ऑपरेशन, दवाइयों, जांचों या अन्य चिकित्सा खर्चों को पूरा करने में मदद करता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि अचानक खर्च आने पर आपको कर्ज लेने, एफडी तोड़ने या निवेश बेचने की जरूरत नहीं पड़ती।
कितना होना चाहिए इमरजेंसी फंड?
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स आमतौर पर सलाह देते हैं कि किसी व्यक्ति के पास कम से कम 6 से 12 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड (Emergency Fund) होना चाहिए। अगर परिवार में बुजुर्ग सदस्य हैं, छोटे बच्चे हैं या किसी सदस्य को पहले से कोई बीमारी है, तो यह फंड और बड़ा होना चाहिए।
उदाहरण के लिए अगर किसी परिवार का मासिक खर्च 50,000 रुपये है तो उसके पास कम से कम 3 लाख से 6 लाख रुपये का इमरजेंसी फंड होना चाहिए। वहीं यदि परिवार का खर्च 80,000 रुपये प्रतिमाह है तो 5 लाख से 10 लाख रुपये तक का इमरजेंसी फंड रखना अधिक सुरक्षित माना जा सकता है।
कैसे काम आता है इमरजेंसी फंड
मान लीजिए एक परिवार में चार सदस्य हैं और परिवार का मासिक खर्च 60,000 रुपये है। अचानक परिवार के मुखिया को दिल से जुड़ी समस्या हो जाती है और अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ता है। इलाज और अस्पताल का कुल खर्च 4 लाख रुपये आता है। अगर परिवार के पास पहले से 5 लाख रुपये का इमरजेंसी फंड मौजूद है, तो वह बिना किसी वित्तीय दबाव के इलाज करवा सकता है। लेकिन अगर ऐसी बचत नहीं है, तो उन्हें कर्ज लेना पड़ सकता है या अपने लंबे समय के निवेश को समय से पहले निकालना पड़ सकता है।
