रिपोर्ट कहती है कि लगातार तेज बढ़त के बाद अब राष्ट्रीय किरायेदारी बाजार धीरे-धीरे स्थिर हो रहा है। (फोटो क्रेडिट-iStock)
मैजिकब्रिक्स ने जुलाई–सितंबर 2025 (JAS ’25) तिमाही का रेंटल इंडेक्स जारी किया है, जो बताता है कि लगातार तीन तिमाहियों की तेज बढ़त के बाद अब किराये का बाजार थोड़ा स्थिर हो रहा है। इसके बावजूद औसत किराया बढ़ता रहा है। अगर तिमाही दर तिमाही नजर डालें तो रेंटल में 4.4 पर्सेंट और सालाना 18 पर्सेंट की बढ़त दर्ज की गई है। जुलाई–अगस्त 2025 के दौरान बाजार में हल्का ठहराव आया, जिसमें मांग और आपूर्ति दोनों में कमी दर्ज की गई। इससे बाजार एक स्थिर रफ्तार की तरफ बढ़ा। राष्ट्रीय स्तर पर किरायेदारी की मांग तिमाही-दर-तिमाही 0.2% और साल-दर-साल 0.4% बढ़ी। वहीं, आपूर्ति तिमाही-दर-तिमाही 0.6% और साल-दर-साल 5.9% बढ़ी, जो बताती है कि किरायेदारों की जरूरत और उपलब्ध प्रॉपर्टी लिस्टिंग में बेहतर संतुलन बन रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस तिमाही में दिल्ली–एनसीआर ने सबसे ज्यादा असर दिखाया। ग्रेटर नोएडा में मांग 29.5% बढ़ी, दिल्ली में 17.8% और नोएडा में 10.8% की बढ़त दर्ज की गई। कोलकाता ने भी 5.4% की तिमाही बढ़त दिखाते हुए स्थिर रफ्तार बनाए रखी। वहीं, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और मुंबई जैसे बड़े शहरों में मांग थोड़ी घटी, जो -1.2% से -7.2% के बीच रही। सप्लाई की बात करें तो दिल्ली सबसे आगे रही, जहाँ 17.6% की तिमाही बढ़त हुई। इसके बाद अहमदाबाद में 6.5% की वृद्धि दर्ज की गई। यह सब दिखाता है कि बाजार धीरे-धीरे संतुलन की तरफ बढ़ रहा है।
अधिकतर शहरों में औसत किराया बढ़ता रहा। ठाणे में किराए में सबसे तेज़ बढ़त दिखी, जो तिमाही-दर-तिमाही 12.5% रही। इसके बाद चेन्नई में 6.7%, मुंबई में 4.9% और दिल्ली में 4.5% की बढ़त दर्ज हुई, जो बाजार में स्थिर मांग को दिखाता है। रिपोर्ट कहती है कि लगातार तेज़ बढ़त के बाद अब राष्ट्रीय किरायेदारी बाजार धीरे-धीरे स्थिर हो रहा है। हालांकि, NCR में बनी हुई मजबूत मांग बताती है कि बुनियादी ढांचे में सुधार, बेहतर कनेक्टिविटी और मध्यम आकार के घरों की अच्छी उपलब्धता किरायेदारों को लगातार आकर्षित कर रही है।
श्री प्रसून कुमार, सीएमओ, मैजिकब्रिक्स के मुताबिक, कुछ शहरों में किराए में हल्की गिरावट दिखना इस बात का संकेत है कि बाजार एक स्वस्थ संतुलन की ओर बढ़ रहा है, जहाँ मांग और आपूर्ति एक-दूसरे से मेल खाने लगी हैं। यह दौर किरायेदारों के लिए घर किराए पर लेना थोड़ा आसान बना सकता है और घर मालिकों व निवेशकों के लिए एक ज्यादा स्थिर और अनुमानित माहौल तैयार करेगा।
राष्ट्रीय स्तर पर, किरायेदारों के विकल्प लगातार बने रहे। दो-बेडरूम घरों ने 44% मांग का प्रतिनिधित्व किया, इसके बाद एक-बेडरूम इकाइयों का स्थान 32% था। सेमी-फर्निश्ड घरों ने 51% मांग और 54% आपूर्ति के साथ प्रमुखता प्राप्त की, जबकि 500 से 1,500 वर्ग फुट के बीच के मध्य-आकार के घरों ने किरायेदारी गतिविधि का अधिकांश हिस्सा आकार दिया, जो 77% किरायेदारों की प्राथमिकता को कैप्चर करते हैं।
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