भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) का स्टॉक आज बाजार खुलते ही 8% टूट गया। यह गिरावट सरकार के 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) के तहत नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए सब्सक्रिप्शन खुलने के बाद देखी गई। सोमवार को LIC के शेयर ₹428.50 पर बंद हुए थे, वहीं, मंबलवार को शेयर ₹392 प्रति शेयर के भाव पर खुला। शुरुआती ट्रेडिंग के दौरान स्टॉक ने ₹390.50 का निचला स्तर (इंट्राडे लो) छुआ। एलआईसी के स्टॉक में यह गिरावट सरकार के ऑफर-फॉर-सेल' (OFS) लाने के फैसले से हुआ। ओएफस का भाव मौजूदा शेयर से कम होने से शेयर में गिरावट आई। मौजूदा कीमत पर, LIC का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 5.05 लाख करोड़ रुपये है।
LIC OFS की जानकारी
सरकार ने 4 अगस्त को LIC में 2.5% हिस्सेदारी के लिए 'ऑफर-फॉर-सेल' (OFS) की घोषणा की, जिसमें 'ग्रीन शू ऑप्शन' के जरिए अतिरिक्त 4% हिस्सेदारी बेचने का विकल्प भी शामिल है। OFS नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए मंगलवार को खुलेगा, जबकि रिटेल निवेशक बुधवार को अपनी बोली लगा सकेंगे। डिपार्टमेंट ऑफ़ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) के अनुसार, OFS के लिए फ्लोर प्राइस (न्यूनतम कीमत) ₹382 प्रति शेयर तय की गई है।
डिपार्टमेंट ऑफ़ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) के सेक्रेटरी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा, "LIC में 'ऑफर-फॉर-सेल' कल नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए खुलेगा। रिटेल निवेशक बुधवार को बोली लगा सकते हैं। सरकार 2.5% इक्विटी बेचने की पेशकश कर रही है, साथ ही 'ग्रीन शू ऑप्शन' के तहत अतिरिक्त 4% बेचने का विकल्प भी है। फ्लोर प्राइस ₹382 प्रति शेयर तय किया गया है। इससे तय समय से पहले MPS (न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग) के लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी।"
अगर 'ग्रीन शू ऑप्शन' पूरी तरह से सब्सक्राइब हो जाता है, तो सरकार की कुल हिस्सेदारी बिक्री LIC की इक्विटी के 6.5% तक बढ़ सकती है। सरकार द्वारा 82.22 करोड़ से ज्यादा शेयरों (जो 6.5% हिस्सेदारी के बराबर है) की बिक्री से अपने विनिवेश कार्यक्रम के ज़रिए लगभग ₹31,000 करोड़ जुटाने की उम्मीद है।
सरकार की अभी 96.5% हिस्सेदारी
अभी केंद्र सरकार के पास LIC की लगभग 96.5% हिस्सेदारी है। सरकारी बीमा कंपनी ने मई 2022 में भारत के अब तक के सबसे बड़े 'इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग' (IPO) के ज़रिए शेयर बाजार में एंट्री की थी। यह हिस्सेदारी बिक्री LIC में सार्वजनिक शेयरधारिता बढ़ाने और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा निर्धारित न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (Minimum Public Shareholding) नियमों को पूरा करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
आमतौर पर लिस्टेड कंपनियों को कम से कम 25 प्रतिशत सार्वजनिक शेयरधारिता बनाए रखनी होती है। इसलिए, यह नया OFS LIC को उसकी नियामक शेयरधारिता आवश्यकताओं को पूरा करने के करीब ले जाएगा, हालांकि ग्रीनशू विकल्प के पूर्ण उपयोग के बाद भी सरकार का स्वामित्व काफी बड़ा बना रहेगा।
