Foreign Institutional investors: विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) मई 2025 में अब तक भारतीय शेयर बाजार में 13,835 करोड़ रुपये की खरीदारी कर चुके हैं, जिससे वे इस महीने नेट बायर्स बने हुए हैं। हालांकि, बीते सप्ताह में उन्होंने भारी बिकवाली की, जिसमें 11,591 करोड़ रुपये के शेयर बेचे गए। सप्ताह की शुरुआत में अमेरिका की मूडीज द्वारा बढ़ते कर्ज के कारण क्रेडिट रेटिंग डाउनग्रेड के असर से बाजार में उतार-चढ़ाव देखा गया। शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ऐप्पल पर 25% टैरिफ की धमकी दी (ऐप्पल फोन अमेरिका के बाहर बनने पर), जिससे अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में कमी आई। इसका असर सोमवार को भारतीय बाजारों पर दिखने की उम्मीद है। मई में अब पांच ट्रेडिंग सत्र बाकी हैं, जो यह तय करेंगे कि एफआईआई लगातार दूसरे महीने नेट बायर्स रहेंगे या नहीं।
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कब-कब कितने शेयरों की हुई बिकवाली
साल 2025 में अब तक एफआईआई ने 98,516 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। जनवरी में 78,027 करोड़, फरवरी में 34,574 करोड़ और मार्च में 3,973 करोड़ रुपये की बिकवाली हुई, जबकि अप्रैल में वे 4,223 करोड़ रुपये की खरीदारी के साथ नेट बायर्स रहे।
बीते वित्तीय वर्ष (मार्च 2025 तक) में एफआईआई ने सात महीनों में बिकवाली की, जिसमें अक्टूबर (94,017 करोड़ रुपये) और जनवरी (78,027 करोड़ रुपये) में सबसे ज्यादा निकासी हुई।
DII रहे नेट बायर्स
शुक्रवार को एफआईआई ने 1,794.59 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) 299.78 करोड़ रुपये की खरीदारी के साथ नेट बायर्स रहे। बाजार अब एफआईआई के अगले कदमों पर नजर रखेगा।
'बीती कुछ तिमाहियों में काफी पैसा निकाला'
जानकारों का मानना है कि भारत में एफपीआई ने बीती कुछ तिमाहियों में काफी पैसा निकाला है। इसके कारणों में कमजोर कॉरपोरेट इनकम, चुनाव संबंधी अनिश्चितताएं और शहरी खपत में मंदी शामिल हैं। ट्रम्प प्रशासन के टैरिफ, प्रभावित वैश्विक मुद्राएं, बॉन्ड बाजार और बड़ी वैश्विक कंपनियों के अहम फैसलों में देरी भी इसका कारण हैं।
