किराए के मकान में रहते समय अक्सर मकान मालिक और किरायेदार के बीच घर खाली करते वक्त 'सिक्योरिटी डिपॉजिट' (Security Deposit) की वापसी को लेकर विवाद खड़ा हो जाता है। मकान मालिक अक्सर दीवारों का पेंट उखड़ जाने, नल की हल्की लीकेज या दरवाजे का हैंडल ढीला होने जैसे बहानों पर जमा राशि से बड़ा कट लगा देते हैं। लेकिन किराएदारी कानून और 'मॉडल टेनेंसी एक्ट' (Model Tenancy Act) के तहत मकान मालिकों की इस मनमानी पर रोक लगाई गई है। नियम स्पष्ट करते हैं कि सामान्य उपयोग से होने वाली टूट-फूट के लिए किरायेदार की डिपॉजिट राशि नहीं काटी जा सकती।
क्या है नॉर्मल वियर एंड टियर?
कानून की भाषा में इसे 'नॉर्मल वियर एंड टियर' (Normal Wear and Tear) कहा जाता है। इसका सीधा मतलब है कि जब कोई व्यक्ति किसी घर में लंबे समय तक रहता है, तो समय बीतने के साथ प्राकृतिक रूप से होने वाले मामूली बदलाव या घिसावट स्वाभाविक है। उदाहरण के लिए धूप और बारिश से दीवारों का पेंट फीका पड़ना, दरवाजे के हैंडल का ढीला होना, नल की वाशर घिसना या चाबी के ताले का पुराना पड़ना 'नॉर्मल वियर एंड टियर' की श्रेणी में आता है। इसके लिए मकान मालिक किरायेदार को जिम्मेदार ठहराकर सिक्योरिटी डिपॉजिट से पैसे नहीं काट सकता।
कब काट सकता है मकान मालिक पैसा?
इसके अलावा अगर किरायेदार की लापरवाही, लापरवाही से इस्तेमाल या जानबूझकर किए गए नुकसान (Damage) के कारण कोई बड़ी क्षति होती है, तो मकान मालिक मरम्मत का खर्च काटने का हकदार होता है। जैसे दीवारों पर बच्चों द्वारा गहरे स्क्रैच या पेंटिंग बना देना, टाइल्स तोड़ देना, सैनिटरी फिटिंग्स या कांच की खिड़कियां फोड़ देना, या घर के ढांचे में बिना इजाजत बदलाव कर देना 'डैमेज' माना जाता है। ऐसे नुकसान की भरपाई किरायेदार के सिक्योरिटी डिपॉजिट से की जा सकती है।
विवादों से बचने के लिए सबसे बेहतर तरीका यह है कि नया घर किराए पर लेते समय मकान मालिक के साथ एक पारदर्शी 'रेंटल एग्रीमेंट' (Rent Agreement) बनाएं, जिसमें वियर एंड टियर के नियमों का साफ जिक्र हो। इसके अलावा, शिफ्टिंग के समय घर की दीवारों, फिटिंग्स और मौजूदा स्थिति के फोटो या वीडियो बनाकर रख लें। घर खाली करते वक्त यदि मकान मालिक अवैध रूप से पैसा काटता है, तो आप रेंटल एग्रीमेंट के आधार पर रेंट ट्रिब्यूनल या कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
