India-US ट्रेड डील के बाद भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों का भरोसा तेजी से लौटा है। बेहतर ट्रेड शर्तों, प्रतिस्पर्धी टैरिफ और रुपये की कमजोरी से एक्सपोर्ट सेक्टर को मिलने वाले फायदों ने बाजार की दिशा बदल दी है। इसी बदलते माहौल में JP Morgan ने साल के अंत तक निफ्टी का लक्ष्य 30,000 कर दिया है। दूसरी ओर दिग्गज निवेशक जिम रोजर्स ने भी भारत को लेकर अब तक का सबसे सकारात्मक रुख दिखाया है, लेकिन निवेशकों को ऊंचे स्तर पर जल्दबाजी से बचने की सलाह दी है। दोनों विशेषज्ञों ने ET Now से बातचीत में निवेशकों के लिए अहम निवेश संकेत दिए।
ट्रेड डील के बाद लौटा बाजार का भरोसा
हाल के महीनों में अमेरिकी टैरिफ और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बाजार पर दबाव बना हुआ था। रुपये की कमजोरी और विदेशी पूंजी के आउटफ्लो ने भी सेंटीमेंट बिगाड़ा था। लेकिन नई ट्रेड डील के बाद स्थिति तेजी से बदली है। JP Morgan के इंडिया इक्विटी रिसर्च हेड संजय मूकीम के मुताबिक अब भारत एशिया के मुकाबले बेहतर टैरिफ स्थिति में खड़ा है, जिससे मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट सेक्टर को मध्यम अवधि में बड़ा फायदा मिल सकता है।
एक्सपोर्ट सेक्टर के लिए बड़ा अवसर
मूकीम का मानना है कि अभी रुपया प्रतिस्पर्धी स्तर पर है और अमेरिका के साथ 18 फीसदी टैरिफ व्यवस्था भारतीय कंपनियों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। इससे टेक्सटाइल, लेदर और अन्य एक्सपोर्ट आधारित कंपनियों की ग्रोथ तेज हो सकती है। आने वाले पांच सालों में इसका असर कॉर्पोरेट अर्निंग्स और निवेश चक्र पर दिख सकता है।
निफ्टी को सपोर्ट देंगे बैंक और कंज्यूमर स्टॉक्स
JP Morgan का मानना है कि बाजार की अगली तेजी में बड़े बैंक और मजबूत बैलेंस शीट वाली कंपनियां अहम भूमिका निभाएंगी। बड़े बैंकों की वैल्यूएशन अभी भी आकर्षक है और अगले तीन साल में डबल डिजिट अर्निंग ग्रोथ की उम्मीद बनी हुई है। इसके साथ ही टैक्स राहत और खपत में सुधार से ऑटो और कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी कंपनियां भी निफ्टी को सपोर्ट दे सकती हैं। हालांकि IT सेक्टर को लेकर सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है क्योंकि AI और अमेरिकी आर्थिक सुस्ती से मांग पर असर पड़ सकता है।
जिम रोजर्स की सलाह, गिरावट में करें खरीद
दिग्गज निवेशक जिम रोजर्स ने ET Now से बातचीत में कहा कि भारत की नीति दिशा अब पहले से कहीं बेहतर नजर आ रही है और लंबी अवधि में देश की संभावनाएं मजबूत हैं। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि वे रिकॉर्ड ऊंचाई पर बाजार में प्रवेश नहीं करते। उनका मानना है कि समझदार निवेशक वही है जो गिरावट के समय खरीदारी करता है और वैल्यूएशन को नजरअंदाज नहीं करता।
सोना-चांदी पर भी भरोसा कायम
रोजर्स ने यह भी कहा कि दुनिया भर में बढ़ते कर्ज और लगातार छपते पैसे के कारण लंबी अवधि में सोना और चांदी मजबूत निवेश बने रहेंगे। उन्होंने सलाह दी कि निवेशकों के पोर्टफोलियो में कुछ हिस्सा हमेशा प्रेशियस मेटल्स का होना चाहिए और कीमतों में गिरावट आने पर इसमें और जोड़ना समझदारी होगी।
डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या कमोडिटी में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।
