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जिंदल स्टील ने बनाया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड : 'स्टील स्लैग' से तैयार की दुनिया की सबसे लंबी सड़क

Jindal Steel Longest Slag Road: जिंदल स्टील ने रायगढ़ में CSIR-CRRI के सहयोग से 1.85 किमी लंबी 'स्टील स्लैग' सड़क बनाकर गिनीज रिकॉर्ड हासिल किया। यह पर्यावरण-अनुकूल तकनीक निर्माण लागत घटाने और सड़क की उम्र बढ़ाने में बेहद मददगार है।

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जिंदल स्टील की ‘स्टील स्लैग' से बनी दुनिया की सबसे लंबी सड़क को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड से मान्यता (तस्वीर-X)

Jindal Steel Longest Slag Road : छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में जिंदल स्टील लिमिटेड ने एक नया इतिहास रचा है। कंपनी ने कारखाने के कचरे यानी 'स्टील स्लैग' का इस्तेमाल करके दुनिया की सबसे लंबी सड़क बनाई है। इस उपलब्धि के लिए जिंदल स्टील का नाम 'गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में दर्ज किया गया है। इस खास और पर्यावरण-अनुकूल सड़क का निर्माण 'सीएसआईआर-केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान' (CSIR-CRRI) की मदद और मार्गदर्शन से किया गया है।

कैसी है यह नई सड़क?

रायगढ़ में बनी यह सड़क 1.85 किलोमीटर लंबी और चार लेन (4-Lane) वाली है। इसके निर्माण में पारंपरिक पत्थरों और गिट्टी की जगह लगभग दो लाख टन प्रोसेस्ड (प्रसंस्कृत) स्टील स्लैग का उपयोग किया गया है। यह सड़क इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे औद्योगिक कचरे को टिकाऊ बुनियादी ढांचे में बदला जा सकता है।

क्या होता है स्टील स्लैग?

जब कारखानों में स्टील या इस्पात बनाया जाता है, तो उस प्रक्रिया के दौरान एक ठोस कचरा (बाय-प्रोडक्ट) बाहर निकलता है। इसी को 'स्टील स्लैग' कहते हैं। पहले इसे सिर्फ एक अनुपयोगी कचरा माना जाता था। लेकिन अब वैज्ञानिक और तकनीकी तरीकों से इसे साफ और मजबूत बनाकर सड़क बनाने लायक तैयार किया जाता है।

लागत में बचत और 3 गुना ज्यादा मजबूती

जिंदल स्टील के मुताबिक, वैज्ञानिक तरीके से तैयार स्लैग से बनी सड़कें कई मायनों में पारंपरिक सड़कों से बेहतर हैं:-

  • कम लागत: पारंपरिक निर्माण सामग्री के मुकाबले यह सड़क 30 से 40 प्रतिशत तक सस्ती पड़ती है।
  • लंबी उम्र: सामान्य डामर (बिटुमिनस) की सड़कों की तुलना में इसकी उम्र तीन गुना तक अधिक होती है।
  • कम रखरखाव: अधिक मजबूत होने के कारण इन सड़कों की मरम्मत और रखरखाव की जरूरत बहुत कम पड़ती है।

उद्योग और पर्यावरण के लिए बड़ा कदम

जिंदल स्टील के चेयरमैन नवीन जिंदल ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि जब विज्ञान, तकनीक और उद्योग एक साथ आते हैं, तो औद्योगिक कचरा भी देश के विकास में काम आ सकता है। उन्होंने कहा कि भारत की तरक्की ऐसी तकनीकों पर आधारित होनी चाहिए जो अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ पर्यावरण की रक्षा भी करें। वहीं, केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस प्रोजेक्ट की तारीफ करते हुए इसे भारतीय वैज्ञानिकों और तकनीक का एक बड़ा उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि कचरे को सड़क बनाने के संसाधन में बदलना दिखाता है कि भारत अपनी स्वदेशी तकनीक में कितना सक्षम है।

भविष्य में मिलेंगे बड़े फायदे

भारत में जैसे-जैसे स्टील का उत्पादन बढ़ रहा है, वैसे-वैसे इससे निकलने वाले स्लैग की मात्रा भी बढ़ रही है। आने वाले सालों में देश में हर साल करीब 6 करोड़ टन स्टील स्लैग निकलने का अनुमान है। ऐसे में अगर सड़क निर्माण में स्टील स्लैग का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है, तो इससे दो बड़े फायदे होंगे। औद्योगिक कचरे के निपटारे और प्रबंधन की समस्या हल होगी। प्राकृतिक पत्थरों के खनन पर रोक लगेगी, जिससे पर्यावरण का बचाव होगा और देश में संसाधनों का सही इस्तेमाल हो सकेगा।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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