अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) ने एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सार्वजनिक की है। खुफिया फाइलों के जरिए ओसामा बिन लादेन और उसके आतंकी संगठन अल-कायदा की वैश्विक आतंकी योजनाओं को लेकर कई अहम खुलासे किए गए हैं। इन दस्तावेजों के मुताबिक, 11 सितंबर 2001 के अमेरिका पर हुए आतंकी हमलों से करीब तीन साल पहले ही भारत उन देशों में शामिल था, जिन्हें बिन लादेन संभावित हमले के लिए निशाना बनाना चाहता था।
28 अगस्त 1998 की खुफिया रिपोर्ट में भारत का जिक्र
रिपोर्ट के मुताबिक, सीआईए की 28 अगस्त 1998 की एक प्रेसिडेंशियल इंटेलिजेंस ब्रीफ में बिन लादेन की उन योजनाओं का जिक्र था, जिनमें भारत समेत कई देशों को संभावित आतंकी हमलों के निशाने के तौर पर देखा गया था। इस सूची में भारत के अलावा पाकिस्तान, मिस्र, कुवैत, सऊदी अरब, यमन, युगांडा और संभावित रूप से नाइजीरिया का भी उल्लेख था।
हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि उपलब्ध दस्तावेजों में भारत के किसी खास शहर, इमारत या दूसरे विशिष्ट लक्ष्य का उल्लेख नहीं किया गया है। यानी फाइल से यह पता चलता है कि भारत को संभावित हमले के देश के तौर पर देखा जा रहा था, लेकिन किसी विशेष भारतीय टारगेट पर हमले की विस्तृत योजना सामने नहीं आती।
अमेरिका ही नहीं, कई देशों को निशाना बनाना चाहता था अल-कायदा
इन दस्तावेजों से यह भी पता चलता है कि उस दौर में बिन लादेन की आतंकी महत्वाकांक्षाएं केवल अमेरिका तक सीमित नहीं थीं। सीआईए के आकलन में अल-कायदा का नेटवर्क कई देशों में फैला हुआ था और संगठन अलग-अलग देशों में अमेरिकी हितों तथा अन्य संभावित लक्ष्यों पर हमले की क्षमता और योजनाओं पर विचार कर रहा था। सीआईए की ओर से जारी दस्तावेजों का एक बड़ा हिस्सा बिन लादेन की गतिविधियों, उसके नेटवर्क और अमेरिका के खिलाफ संभावित हमलों को लेकर तत्कालीन अमेरिकी प्रशासन को दी गई चेतावनियों से संबंधित है। एजेंसी ने बिल क्लिंटन और बाद में जॉर्ज डब्ल्यू. बुश प्रशासन को अल-कायदा से जुड़े खतरे को लेकर लगातार जानकारी दी थी।
9/11 से पहले अमेरिका को भी लगातार मिल रही थीं चेतावनियां
डिक्लासिफाइड दस्तावेजों का सबसे अहम पहलू यह है कि 9/11 हमलों से पहले अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के पास बिन लादेन और अल-कायदा की गतिविधियों को लेकर कई चेतावनियां मौजूद थीं। सीआईए की फाइलों में 1998 से 2001 के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति को दी गई कई इंटेलिजेंस ब्रीफिंग शामिल हैं। इनमें बिन लादेन की गतिविधियों, उसके नेटवर्क और अमेरिका पर संभावित हमले की आशंका को लेकर जानकारी दी गई थी।
खास तौर पर 6 अगस्त 2001 की राष्ट्रपति की डेली ब्रीफ का जिक्र लंबे समय से होता रहा है, जिसका शीर्षक था “Bin Ladin Determined to Strike in US”। इस ब्रीफ में अमेरिका में आतंकी हमले की आशंका और अल-कायदा की गतिविधियों को लेकर चेतावनी दी गई थी।
70 से ज्यादा खुफिया दस्तावेज किए गए सार्वजनिक
सीआईए ने 9/11 हमलों की 25वीं बरसी के मौके पर बिन लादेन और अल-कायदा से जुड़े 71 डिक्लासिफाइड इंटेलिजेंस दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं। इन फाइलों में 100 से ज्यादा पन्नों की सामग्री शामिल है और इनमें तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपतियों को दी गई खुफिया जानकारियों की झलक मिलती है।
इन दस्तावेजों से यह समझने में मदद मिलती है कि 9/11 से पहले अमेरिकी खुफिया समुदाय को बिन लादेन के नेटवर्क और उसकी आतंकी महत्वाकांक्षाओं के बारे में किस स्तर तक जानकारी थी। साथ ही, ये फाइलें यह सवाल भी उठाती हैं कि उपलब्ध चेतावनियों के बावजूद 11 सितंबर 2001 के हमले को रोकने के लिए पर्याप्त कदम क्यों नहीं उठाए जा सके।
