आज के समय में घर, कार, पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड (Credit Card) की आसान उपलब्धता के कारण अधिकतर लोग किसी न किसी तरह की EMI (Equated Monthly Instalment) चुका रहे हैं। वहीं, बहुत से लोगों की सैलरी (Salary) का बड़ा हिस्सा EMI चुकाने में ही खर्च हो जाता है। ऐसे में EMI का आकलन करना बेहद जरूरी हो जाता है, ताकि भविष्य में कर्ज का बोझ न बढ़े।
कितना EMI बोझ माना जाता है सही?
आमतौर पर फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि किसी व्यक्ति की कुल मासिक EMI उसकी नेट (इन-हैंड) सैलरी के 35% से 40% के भीतर रहनी चाहिए। अगर यह अनुपात 50% या उससे अधिक पहुंच जाता है, तो हर महीने नकदी की कमी महसूस होने लगती है। ऐसे में किसी मेडिकल इमरजेंसी, नौकरी जाने या अचानक आने वाले बड़े खर्च को संभालना मुश्किल हो सकता है।
ज्यादा EMI होने के नुकसान
जब आय का बड़ा हिस्सा EMI में चला जाता है, तो सबसे पहले बचत प्रभावित होती है। कई लोग हर महीने निवेश बंद कर देते हैं या इमरजेंसी फंड नहीं बना पाते। इसके अलावा, क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल बढ़ने लगता है, जिससे कर्ज का बोझ और बढ़ सकता है।
लगातार अधिक EMI का दबाव मानसिक तनाव भी बढ़ा सकता है। कई बार लोग एक लोन चुकाने के लिए दूसरा लोन ले लेते हैं, जिससे डेट ट्रैप (Debt Trap) का खतरा पैदा हो जाता है।
इन संकेतों को नजरअंदाज न करें
अगर हर महीने EMI भरने के बाद आपके पास घरेलू खर्च, निवेश या बचत के लिए बहुत कम पैसा बचता है, तो यह चेतावनी का संकेत हो सकता है। इसके अलावा अगर आप बार-बार क्रेडिट कार्ड का बकाया अगले महीने तक ले जा रहे हैं, न्यूनतम भुगतान (Minimum Due) कर रहे हैं या छोटी जरूरतों के लिए भी उधार लेना पड़ रहा है, तो आपको अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग पर दोबारा विचार करना चाहिए।
EMI का बोझ कैसे कम करें?
अगर आपकी आय का बड़ा हिस्सा EMI में जा रहा है, तो सबसे पहले सभी लोन की समीक्षा करें। जिन लोन पर ब्याज दर सबसे ज्यादा है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर चुकाने की कोशिश करें। अगर संभव हो तो अतिरिक्त आय या बोनस का इस्तेमाल लोन का कुछ हिस्सा प्रीपेमेंट करने में करें।
अगर आपकी क्रेडिट प्रोफाइल अच्छी है तो कम ब्याज दर पर लोन बैलेंस ट्रांसफर या रीफाइनेंसिंग का विकल्प भी देखा जा सकता है। इससे मासिक EMI का बोझ कम हो सकता है। हालांकि, ऐसा करने से पहले प्रोसेसिंग फीस और दूसरे शुल्क जरूर जांच लें।
इमरजेंसी फंड भी है जरूरी
अगर आपकी आय का बड़ा हिस्सा EMI में जा रहा है तो भी कम से कम 6 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड बनाने की कोशिश करें। इससे अचानक नौकरी छूटने या किसी आपात स्थिति में आपको नया कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
