India Defence Exports : कुछ साल पहले तक भारत दुनिया के सबसे बड़े हथियार आयातकों में गिना जाता था। लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है। भारत की Akash, Pinaka, BrahMos, Nag और Swathi Radar जैसी स्वदेशी रक्षा प्रणालियां दुनिया के कई देशों की पसंद बन रही हैं। इसका असर आंकड़ों में भी साफ दिख रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
सरकार का लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में इसे 50,000 करोड़ रुपये तक ले जाने का है। सवाल यह है कि आखिर दुनिया के हथियार बाजार में भारत का दबदबा इतनी तेजी से क्यों बढ़ रहा है? इसकी सबसे बड़ी वजह है कम कीमत, भरोसेमंद तकनीक और लगातार बेहतर होती युद्ध क्षमता।
पश्चिमी देशों से 20-50% तक सस्ते हथियार
भारतीय हथियरों की सबसे बड़ी ताकत इनकी लागत है। कई भारतीय मिसाइल और रॉकेट सिस्टम पश्चिमी देशों के समान हथियारों की तुलना में 20% से 50% तक सस्ते हैं। ब्रोकरेज फर्म Kotak Institutional Equities की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत की कम मैन्युफैक्चरिंग लागत, अधिक स्वदेशीकरण और सरकारी समर्थन ने भारतीय रक्षा उत्पादों को वैश्विक बाजार में बेहद प्रतिस्पर्धी बना दिया है। एशिया, अफ्रीका और मध्य-पूर्व के कई देशों के लिए यह सबसे बड़ा आकर्षण है।
Akash ने बढ़ाई भारत की साख
भारत का Akash Air Defence System तेजी से वैश्विक पहचान बना रहा है। इसकी एक मिसाइल की अनुमानित कीमत करीब 5 लाख डॉलर है, जबकि अमेरिकी NASAMS सिस्टम की कीमत 8 से 10 लाख डॉलर प्रति मिसाइल तक पहुंचती है। यानी कम कीमत में आधुनिक एयर डिफेंस मिलने से कई देशों की दिलचस्पी बढ़ी है। आर्मेनिया पहले ही Akash खरीद चुका है, जबकि मिस्र, यूएई, वियतनाम, फिलीपींस, ब्राजील, बेलारूस, मलेशिया और थाईलैंड जैसे देशों ने भी रुचि दिखाई है।
BrahMos ने बनाई अलग पहचान
कीमत के मामले में BrahMos सबसे सस्ती मिसाइल नहीं है, लेकिन इसकी सुपरसोनिक गति, सटीक निशाना और भारी मारक क्षमता इसे दुनिया की सबसे भरोसेमंद क्रूज मिसाइलों में शामिल करती है। फिलीपींस लगभग 375 मिलियन डॉलर का सौदा कर चुका है। वियतनाम ने भी अनुबंध किया है, जबकि इंडोनेशिया खरीद की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके अलावा यूएई, मिस्र, ब्राजील, मलेशिया और थाईलैंड समेत कई देशों ने इसमें दिलचस्पी दिखाई है।
Pinaka और Nag भी बन रहे गेमचेंजर
भारत का Pinaka Multi Barrel Rocket System भी वैश्विक बाजार में अपनी जगह बना रहा है। इसकी अनुमानित कीमत अमेरिकी HIMARS से कम है, जिससे यह लागत के प्रति संवेदनशील देशों के लिए आकर्षक विकल्प बन गया है। वहीं Nag और Helina जैसी एंटी-टैंक मिसाइलें भी अमेरिकी Hellfire की तुलना में लगभग आधी कीमत पर उपलब्ध हैं। इससे भारत का रक्षा उत्पाद पोर्टफोलियो और मजबूत हुआ है।
ड्रोन और रडार भी बन रहे ताकत
भारत अब सिर्फ मिसाइल निर्यात तक सीमित नहीं है। Archer SRUAV, Nagastra-1 जैसे ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन भी वैश्विक बाजार में जगह बना रहे हैं। इसी तरह BEL का Swathi Weapon Locating Radar अमेरिकी Firefinder रडार की तुलना में 40% से 60% तक सस्ता माना जाता है। आर्मेनिया इसके चार रडार खरीद चुका है और आगे भी खरीद की संभावना जताई जा रही है।
ऑपरेशन सिंदूर ने बढ़ाया भरोसा
भारतीय रक्षा उत्पादों की सबसे बड़ी ताकत अब सिर्फ उनकी कीमत नहीं रही। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कई स्वदेशी प्रणालियों के प्रदर्शन ने दुनिया का ध्यान खींचा। इससे विदेशी खरीदारों का भरोसा बढ़ा कि भारतीय हथियार सिर्फ सस्ते ही नहीं, बल्कि वास्तविक परिस्थितियों में प्रभावी भी हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी हथियार के निर्यात में युद्ध में साबित प्रदर्शन सबसे बड़ा विज्ञापन होता है और भारत को इसका फायदा मिल रहा है।
भारत अब सप्लाई चेन का अहम हिस्सा
भारत सिर्फ तैयार हथियार ही नहीं बेच रहा, बल्कि दुनिया की बड़ी रक्षा कंपनियों की सप्लाई चेन का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। वित्त वर्ष 2019-24 के दौरान अमेरिका को भारत से करीब 2.8 अरब डॉलर के रक्षा उत्पाद और हाई-टेक पार्ट्स निर्यात किए गए। इनमें बड़ी हिस्सेदारी Boeing और Lockheed Martin जैसी कंपनियों की सप्लाई चेन के लिए बनी।
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