NSE IPO : देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुप्रतीक्षित IPO का रास्ता अब लगभग साफ हो गया है। करीब एक दशक से लटके को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामलों में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने NSE के साथ समझौते पर सैद्धांतिक सहमति दे दी है। इसके लिए एक्सचेंज 1,491.21 करोड़ रुपये का भुगतान करेगा। इसी के साथ जून 2026 तिमाही में NSE ने मजबूत वित्तीय नतीजे भी पेश किए हैं, जिससे उसके IPO को लेकर निवेशकों का भरोसा और मजबूत होने की उम्मीद है।
SEBI से 1,491 करोड़ रुपये में समझौता
NSE ने अपने तिमाही नतीजों के साथ बताया कि SEBI ने को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामलों के निपटारे के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। समझौते के तहत एक्सचेंज कुल 1,491.21 करोड़ रुपये का भुगतान करेगा। इसमें 1,223.56 करोड़ रुपये को-लोकेशन मामले और 267.65 करोड़ रुपये डार्क फाइबर मामले के लिए हैं। NSE पहले ही 776.47 करोड़ रुपये SEBI के पास जमा करा चुका है। अब उसे 714.74 करोड़ रुपये अतिरिक्त जमा करने होंगे। NSE ने साफ किया है कि यह समझौता आरोप स्वीकार करने या उन्हें खारिज करने के बिना किया जा रहा है।
क्या था को-लोकेशन विवाद?
को-लोकेशन मामला भारतीय पूंजी बाजार के सबसे चर्चित विवादों में से एक रहा है। आरोप था कि कुछ चुनिंदा ब्रोकर्स को NSE के ट्रेडिंग सर्वर तक दूसरों की तुलना में पहले और तेज पहुंच मिली, जिससे उन्हें बाजार में अनुचित बढ़त हासिल हुई। वहीं, डार्क फाइबर मामला एक्सचेंज के नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए कुछ प्रतिभागियों को कथित रूप से प्राथमिकता वाली कनेक्टिविटी देने से जुड़ा था। इन दोनों मामलों के चलते वर्षों से कानूनी और नियामकीय कार्रवाई चल रही थी।
सुप्रीम कोर्ट में भी खत्म होगा विवाद
समझौते के बाद SEBI और NSE सुप्रीम कोर्ट में लंबित अपीलों को वापस लेने की अनुमति मांगेंगे। अदालत की मंजूरी मिलने के बाद यह लंबा विवाद पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
IPO की राह लगभग साफ
यह समझौता NSE के IPO के लिए सबसे बड़ी राहत माना जा रहा है। लंबे समय से नियामकीय विवाद ही IPO के सामने सबसे बड़ा अवरोध थे। अब इनके सुलझने के बाद बाजार को उम्मीद है कि IPO प्रक्रिया तेज होगी। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक मर्चेंट बैंकर अगले महीने IPO को मंजूरी मिलने की उम्मीद कर रहे हैं। NSE ने संभावित निवेशकों के साथ रोड शो भी शुरू कर दिए हैं। हालांकि, एक्सचेंज के खिलाफ कुछ अन्य कानूनी मामले अभी भी लंबित हैं, जिनमें मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज का मुआवजा दावा भी शामिल है।
जून तिमाही में मुनाफा 6.7% बढ़ा
NSE के लिए अच्छी खबर सिर्फ नियामकीय मोर्चे पर ही नहीं रही। जून 2026 तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ 6.7% बढ़कर 3,120 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो एक साल पहले समान तिमाही में 2,920 करोड़ रुपये था। कंपनी की कुल आय में 13% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि ट्रेडिंग ऑपरेशन से आय 12.8% बढ़कर 4,100 करोड़ रुपये रही।
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