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मई में रत्न एवं आभूषण निर्यात घटा, ये है वजह

Gem and jewellery exports: मई में भारत का रत्न-आभूषण निर्यात 2.49% घटा, मुख्य कारण सोने की ऊंची कीमतें रहीं। जबकि हीरे, लैब-डायमंड और चांदी के निर्यात में बढ़ोतरी दर्ज हुई।

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मई में भारत का रत्न-आभूषण निर्यात 2.49% घटा

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Gem And Jewellery Exports : रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (GJEPC) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, मई महीने में भारत के रत्न और आभूषण निर्यात में सालाना आधार पर 2.49 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इस गिरावट की मुख्य वजह सोने की ऊंची कीमतें और आपूर्ति में आई दिक्कतें बताई गई हैं। मई में कुल निर्यात घटकर 204.79 करोड़ डॉलर (करीब 19,573.96 करोड़ रुपये) रह गया। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा करीब 210 करोड़ डॉलर था।

कुल निर्यात में हल्की गिरावट

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक GJEPC की रिपोर्ट बताती है कि भले ही कुछ क्षेत्रों में सुधार देखने को मिला हो, लेकिन कुल मिलाकर निर्यात में गिरावट दर्ज की गई। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार रत्न एवं आभूषण उद्योग को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा, खासकर सोने की कीमतों में तेजी और कच्चे माल की उपलब्धता को लेकर।

सोने के आभूषणों के निर्यात में बड़ी कमी

मई महीने में सोने के आभूषणों का निर्यात सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। यह 14.75 प्रतिशत घटकर 75 करोड़ 84.4 लाख डॉलर (करीब 7,247.76 करोड़ रुपये) रह गया। पिछले साल इसी महीने में यह आंकड़ा 88 करोड़ 96.3 लाख डॉलर (करीब 7,582.07 करोड़ रुपये) था। GJEPC के अनुसार, इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण सादे (plain) सोने के आभूषणों की मांग में कमी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंची कीमतें हैं। महंगे सोने के कारण खरीदारों की खरीद क्षमता पर असर पड़ा, जिससे ऑर्डर कम हो गए।

हीरे के निर्यात में सुधार

इसके विपरीत, तराशे और पॉलिश किए गए हीरों के निर्यात में इस बार वृद्धि देखने को मिली है। मई में यह 3.31 प्रतिशत बढ़कर 98 करोड़ 7.3 लाख डॉलर (करीब 9,378.53 करोड़ रुपये) तक पहुंच गया। पिछले साल इसी अवधि में यह 94 करोड़ 93 लाख डॉलर था। एक्सपर्ट्स का मानना है कि वैश्विक मांग में सुधार और कुछ बड़े बाजारों में स्थिरता के कारण हीरे के निर्यात में यह बढ़ोतरी हुई है।

लैब में बने हीरों की मांग तेजी से बढ़ी

पॉलिश किए गए प्रयोगशाला में विकसित हीरों के निर्यात में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मई में यह 25.99 प्रतिशत बढ़कर 10 करोड़ 15 लाख डॉलर (970.27 करोड़ रुपये) हो गया। पिछले साल इसी महीने यह 8 करोड़ 5.6 लाख डॉलर था। यह संकेत देता है कि वैश्विक बाजार में सस्ते और टिकाऊ विकल्प के रूप में लैब-ग्रोउन हीरों की मांग लगातार बढ़ रही है।

चांदी के आभूषणों में भी वृद्धि

चांदी के गहनों का निर्यात भी इस महीने सकारात्मक रहा। मई में यह 14.73 प्रतिशत बढ़कर 9 करोड़ 73.9 लाख डॉलर (928.02 करोड़ रुपये) तक पहुंच गया। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 8 करोड़ 48.8 लाख डॉलर था। चांदी की बढ़ती मांग और अपेक्षाकृत कम कीमतों ने इस सेगमेंट को फायदा पहुंचाया है।

कुल मिलाकर, मई महीने में भारत के रत्न एवं आभूषण निर्यात में हल्की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन यह तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। जहां सोने के आभूषणों ने निर्यात को नीचे खींचा, वहीं हीरे, लैब-ग्रोउन डायमंड और चांदी के आभूषणों ने उद्योग को कुछ राहत दी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले महीनों में वैश्विक कीमतों और मांग की स्थिति ही इस क्षेत्र की दिशा तय करेगी।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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