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भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 696.98 अरब डॉलर! एक हफ्ते में करीब 6.3 अरब डॉलर का उछाल

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में लगभग 6.3 बिलियन डॉलर की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे यह अब लगभग 697 बिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है।

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Forex Reserves (Photo: iStock)

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) में एक बार फिर मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई है। केंद्रीय बैंक आरबीआई (Reserve Bank of India) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 8 मई 2026 को समाप्त सप्ताह में देश का फॉरेक्स रिजर्व 6.295 अरब डॉलर बढ़कर 696.988 अरब डॉलर तक पहुंच गया। जबकि इससे पहले यानी 1 मई को समाप्त सप्ताह में इसमें 7.794 अरब डॉलर की गिरावट आई थी और कुल भंडार 690.693 अरब डॉलर रह गया था।

फॉरेन करेंसी एसेट्स 562 मिलियन डॉलर बढ़ा

Forex Reserves

Forex Reserves (Photo: iStock)

RBI के आंकड़ों के अनुसार, फॉरेक्स रिजर्व का सबसे बड़ा हिस्सा Foreign Currency Assets (FCA) होता है। फॉरेन करेंसी एसेट्स 562 मिलियन डॉलर बढ़कर 552.387 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसमें डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और येन जैसी विदेशी मुद्राओं में रखी गई संपत्तियां शामिल होती हैं।

गोल्ड रिजर्व में भी तेजी

इसके अलावा, भारत के गोल्ड रिजर्व में भी तेजी दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक, सोने का भंडार 5.637 अरब डॉलर बढ़कर 120.853 अरब डॉलर तक पहुंच गया। बता दें, लगातार बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच कई देश अपने गोल्ड रिजर्व को मजबूत करने पर ध्यान दे रहे हैं और भारत भी इसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

Special Drawing Rights (SDRs) में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह 84 मिलियन डॉलर बढ़कर 18.873 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वहीं IMF में भारत की रिजर्व पोजिशन भी 12 मिलियन डॉलर बढ़कर 4.875 अरब डॉलर हो गई।

फरवरी के अंत में बना था रिकॉर्ड स्तर

फरवरी 2026 के अंत में भारत का फॉरेक्स रिजर्व रिकॉर्ड 728.494 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच गया था। हालांकि इसके बाद पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता के कारण रिजर्व में गिरावट देखने को मिली। उस दौरान रुपये पर दबाव बढ़ने के चलते RBI को डॉलर बेचकर बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा था।

विदेशी मुद्रा भंडार देश की आर्थिक ताकत

विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक ताकत का अहम संकेत माना जाता है। इसका इस्तेमाल आयात भुगतान, विदेशी कर्ज चुकाने और रुपये की स्थिरता बनाए रखने में किया जाता है। जब देश के पास बड़ा फॉरेक्स रिजर्व होता है, तो आर्थिक संकट या वैश्विक अस्थिरता के समय सरकार और केंद्रीय बैंक के पास ज्यादा सुरक्षा कवच मौजूद रहता है।

विदेशी मुद्रा भंडार काफी मजबूत स्थिति में

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मौजूदा स्तर पर भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अभी भी काफी मजबूत स्थिति में है। यह रिजर्व रुपये को अत्यधिक कमजोरी से बचाने और विदेशी निवेशकों के भरोसे को बनाए रखने में मदद करता है। हाल ही में पश्चिम एशिया संकट और विदेशी पूंजी निकासी के बावजूद भारत का फॉरेक्स कवर मजबूत माना जा रहा है।

देश की अंतरराष्ट्रीय साख बेहतर बनी हुई

फॉरेक्स रिजर्व बढ़ने का एक फायदा यह भी होता है कि इससे देश की अंतरराष्ट्रीय साख बेहतर होती है। विदेशी निवेशक ऐसे देशों में निवेश करना ज्यादा सुरक्षित मानते हैं, जिनके पास मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार होता है। इससे आयात-निर्यात गतिविधियों को भी स्थिरता मिलती है।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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