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इस साल ITR फाइलिंग में ये गलतियां पड़ीं भारी, कहीं अटका रिफंड तो कहीं मिला नोटिस

इस साल इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते समय की गई छोटी-छोटी गलतियां लाखों टैक्सपेयर्स पर भारी पड़ गईं। कहीं रिफंड महीनों तक अटक गया तो कहीं इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से नोटिस आ गया, जिससे लोगों को रिवाइज्ड रिटर्न और अतिरिक्त टैक्स की झंझट झेलनी पड़ी। ऐसे में आइए आपको बताते हैं इस साल कौन कौन सी गलतियां टैक्सपेयर्स पर भारी पड़ी।

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ITR Filing 2025

इस साल देशभर में लाखों लोगों ने अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल किया, लेकिन एक्सपर्ट्स की समीक्षा में सामने आया कि बड़ी संख्या में रिटर्न में छोटी-बड़ी गलतियां रह गईं। कहीं आय के आंकड़े छूट गए, कहीं जानकारी आपस में मैच नहीं हुई और कहीं गलत अनुमान के आधार पर रिटर्न भर दिया गया। इन गलतियों का नतीजा यह हुआ कि कई रिटर्न खारिज हो गए, बहुत से लोगों का रिफंड अटक गया और कुछ मामलों में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने अतिरिक्त टैक्स की मांग भी भेज दी।

सबसे आम गलती

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सबसे आम समस्या टैक्सपेयर्स की खुद की गणना और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) में दिख रहे आंकड़ों के बीच अंतर रही। कई लोगों ने कैपिटल गेन की गलत रिपोर्टिंग की, गलत छूट (डिडक्शन) का दावा किया या जरूरी फॉर्म भरना ही भूल गए। इनमें फॉर्म 10B/10BB, विदेशी टैक्स क्रेडिट के लिए फॉर्म 67 और टैक्स रिजीम बदलने से जुड़े फॉर्म शामिल हैं। एक बड़ी चूक यह भी रही कि कई टैक्सपेयर्स ने रिटर्न फाइल करने के बाद समय पर ई-वेरिफिकेशन नहीं किया, जिससे पूरा रिटर्न ही अमान्य हो गया।

इसके अलावा एक बड़े कॉर्पोरेट एग्जीक्यूटिव ने शेयरों से हुए मुनाफे का आंकड़ा खुद से भर दिया, जबकि AIS में ब्रोकर के हिसाब से अलग डेटा था। यह अंतर सिस्टम ने तुरंत पकड़ लिया और ऑटोमेटिक नोटिस जारी हो गया। आखिरकार उस व्यक्ति को रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करना पड़ा, जिससे रिफंड भी लेट हुआ।

ये भी है बड़ी गलती

इसके अलावा ब्याज की आय न दिखाना, टैक्स-फ्री या छूट वाली आय को रिपोर्ट न करना और पुराने एम्प्लॉयर से मिली सैलरी को भूल जाना भी आम गलतियों में शामिल रहा। कई टैक्सपेयर्स ने विदेशी संपत्ति, विदेशी बैंक अकाउंट या कैपिटल गेन की जानकारी नहीं दी। कुछ लोगों ने ऐसे पुराने बैंक अकाउंट भी नहीं बताए, जो अब इस्तेमाल में नहीं थे, जबकि उन्हें भी रिपोर्ट करना जरूरी होता है।

इन गलतियों की वजह से कई टैक्सपेयर्स को भारी नुकसान उठाना पड़ा। कैपिटल गेन की गलत रिपोर्टिंग, TDS क्रेडिट में गड़बड़ी और ब्याज की आय न बताने से सबसे ज्यादा रिफंड अटके और डिमांड नोटिस आए। एक फ्रीलांसर ने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) के नुकसान को गलत तरीके से दिखाया और जरूरी ऑडिट रिपोर्ट नहीं लगाई। नतीजतन उसका रिटर्न डिफेक्टिव माना गया, रिफंड चार महीने देरी से मिला और ब्याज की देनदारी भी बढ़ गई।

HRA में की ये गलती पड़ी भारी

HRA का गलत दावा, जरूरत से ज्यादा छूट लेना और प्रॉपर्टी या शेयर से हुए मुनाफे की गलत रिपोर्टिंग पर कई मामलों में 50% से 200% तक पेनल्टी लगी। विदेशी संपत्ति की जानकारी न देने पर जांच और भी सख्त हो जाती है। वहीं कई लोगों ने एडवांस टैक्स तो भरा, लेकिन ITR में उसे रिपोर्ट करना भूल गए। इससे रिफंड कम आया और बाद में रिवाइज्ड रिटर्न भरने की नौबत आई, जिससे प्रोसेसिंग और ज्यादा लेट हो गई।

एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इस साल सिर्फ आंकड़ों की गलती ही नहीं, बल्कि गलत धारणाओं ने भी लोगों को परेशान किया। कई लोगों ने मान लिया कि AIS या TIS हमेशा पूरी तरह सही होता है या पूरी तरह गलत, जबकि सच्चाई यह है कि उसे क्रॉस-चेक करना जरूरी है। इसी तरह कुछ टैक्सपेयर्स को लगा कि न्यू टैक्स रिजीम हमेशा फायदेमंद होती है, जबकि कई सैलरीड लोगों के लिए ओल्ड रिजीम ज्यादा लाभकारी साबित हो सकती थी।

एक्सपर्ट्स की सलाह है कि अगले साल इन गलतियों से बचने के लिए पहले AIS, TIS और फॉर्म 26AS का मिलान करें, कैपिटल गेन को ब्रोकर स्टेटमेंट से चेक करें, सही टैक्स रिजीम चुनें और रिटर्न फाइल करने के तुरंत बाद ई-वेरिफिकेशन जरूर करें। इस साल का सबसे बड़ा सबक यही है कि थोड़ी सी तैयारी और हर आंकड़े की सही जांच आपको नोटिस, पेनल्टी और रिफंड की देरी से आसानी से बचा सकती है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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