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LPG सिलेंडर से लेकर PNG पर कितना लगता है टैक्स?

क्या आप जानते हैं आपके घर में जो LPG सिलेंडर या PNG पाइपलाइन है उसपर कितना टैक्स लगता है? अगर नहीं तो आइए बताते हैं दोनों पर टैक्स के क्या नियम हैं?

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एलपीजी से PNG पर कितना लगता है टैक्स

अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते एलपीजी (LPG) की सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है, जिसके कारण सरकार ने हाल ही में घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडरों के दाम बढ़ा दिए हैं। इस बीच, चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर एलपीजी और पीएनजी को पूरी तरह टैक्स-फ्री करने की मांग उठाई थी। सीटीआई का तर्क है कि टैक्स हटने से गैस की कीमतें घटेंगी और आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी। ऐसे में यह बड़ा सवाल सामने आता है कि फिलहाल एलपीजी और पीएनजी (PNG) पर कितना टैक्स वसूला जाता है?

LPG PNG पर कितना लगता है टैक्स?

सबसे पहले बात करते हैं उस लाल एलपीजी (LPG) सिलेंडर की, जो देश के करोड़ों घरों में इस्तेमाल होता है। मौजूदा टैक्स व्यवस्था के अनुसार, घरेलू एलपीजी सिलेंडर को माल एवं सेवा कर यानी जीएसटी (GST) के दायरे में रखा गया है। घरेलू इस्तेमाल वाले एलपीजी सिलेंडर पर सबसे निचला जीएसटी स्लैब, यानी 5% टैक्स लगाया जाता है। यह 5% जीएसटी दो हिस्सों में बंटता है ढाई फीसदी (2.5%) केंद्रीय जीएसटी (CGST) और ढाई फीसदी (2.5%) राज्य जीएसटी (SGST) के रूप में वसूला जाता है। वहीं दूसरी ओर, अगर हम कमर्शियल (व्यावसायिक) एलपीजी सिलेंडर की बात करें, जिसका इस्तेमाल होटलों, रेस्टोरेंटों या दुकानों में होता है, तो उस पर सरकार भारी-भरकम 18% जीएसटी वसूलती है।

LPG पर कौन कौन से टैक्स लगते हैं?

जब सिलेंडर गैस एजेंसी से आपके घर तक पहुंचता है, तो उसकी कीमत में जीएसटी के अलावा डिस्ट्रीब्यूटर का कमीशन (Distributor Commission) और लोकल ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट (माल ढुलाई का खर्च) भी शामिल होता है। अगर सरकार इस 5% जीएसटी को पूरी तरह से हटा दे, तो प्रति सिलेंडर उपभोक्ताओं को करीब 40 से 50 रुपये तक की सीधी राहत मिल सकती है। हालांकि, अन्य लग्जरी चीजों के मुकाबले घरेलू गैस पर 5% का टैक्स काफी कम माना जाता है।

PNG पर कैसे लगता है टैक्स?

अब बात करते हैं शहरों में तेजी से लोकप्रिय हो रही पाइप नेचुरल गैस यानी पीएनजी (PNG) की। पीएनजी का टैक्स ढांचा एलपीजी सिलेंडर से बिल्कुल अलग और थोड़ा पेचीदा है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि प्राकृतिक गैस (Natural Gas) को अभी तक जीएसटी (GST) के दायरे से बाहर रखा गया है। चूंकि यह जीएसटी के तहत नहीं आती, इसलिए इस पर टैक्स लगाने का अधिकार राज्य सरकारों के पास होता है। राज्य सरकारें पीएनजी पर वैल्यू ऐडेड टैक्स यानी वैट (VAT) वसूलती हैं।

वैट (VAT) की दरें हर राज्य में अलग-अलग होती हैं। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र या गुजरात जैसे अलग-अलग राज्यों में वहाँ की सरकारों के नियमों के मुताबिक पीएनजी पर 5% से लेकर 15% या उससे भी अधिक तक वैट लगाया जाता है। यही वजह है कि अलग-अलग राज्यों या शहरों में पीएनजी के दामों में काफी अंतर देखने को मिलता है। यदि केंद्र सरकार भविष्य में नेचुरल गैस को जीएसटी के दायरे में लाने का फैसला करती है, तो पूरे देश में पीएनजी की कीमतें एक समान हो सकती हैं और उपभोक्ताओं को टैक्स के भारी बोझ से राहत मिल सकती है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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