आर्थिक बदहाली और भारी कर्ज के बोझ तले दबे पाकिस्तान (Pakistan) की हालत अब बद से बदतर होती जा रही है। हाल ही में पाकिस्तान के एक वरिष्ठ मंत्री ने देश की तेल भंडार को लेकर जो खुलासा किया है, उसने न केवल पाकिस्तान की जनता बल्कि पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। मंत्री ने स्वीकार किया है कि पाकिस्तान के पास अब एक दिन का भी पेट्रोल रिजर्व (Oil Reserve) नहीं बचा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पड़ोसी देश अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए भी अंतरराष्ट्रीय संगठनों के सामने हाथ फैला रहा है। मंत्री ने भारत की वैश्विक साख और तेल कूटनीति की तुलना करते हुए अपनी ही सरकार को आईना दिखाया है।
पाकिस्तान की लाचारी
पाकिस्तानी मंत्री ने अपने बयान में भारत की आर्थिक शक्ति का लोहा माना है। उन्होंने कहा कि भारत की साख दुनिया में इतनी मजबूत है कि उन्हें सिर्फ एक हस्ताक्षर (One Sign) पर कच्चा तेल मिल जाता है। वैश्विक बाजार में भारत का नाम ही गारंटी के तौर पर काम करता है, जिसके कारण उसे भुगतान में देरी या अन्य संकटों के बावजूद तेल की आपूर्ति नहीं रुकती। इसके विपरीत, पाकिस्तान की हालत यह है कि कोई भी देश या कंपनी उसे उधार पर तेल देने को तैयार नहीं है। पाकिस्तान को हर बार तेल खरीदने के लिए नकद भुगतान करना पड़ता है या फिर आईएमएफ (IMF) जैसी संस्थाओं से मिलने वाली किस्तों का इंतजार करना पड़ता है।
एक दिन का भी स्टॉक नहीं!
सबसे चौंकाने वाला खुलासा देश के पेट्रोल रिजर्व को लेकर रहा। आमतौर पर किसी भी देश के पास कम से कम 20 से 30 दिनों का 'इमरजेंसी ऑयल रिजर्व' होना अनिवार्य माना जाता है ताकि युद्ध या किसी वैश्विक संकट की स्थिति में देश की रफ्तार न थमे। लेकिन मंत्री के अनुसार, पाकिस्तान के पास एक दिन का भी बैकअप नहीं है। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर किसी वजह से तेल का कोई जहाज बंदरगाह पर पहुंचने में देरी करता है, तो पूरा पाकिस्तान एक ही झटके में थम सकता है। बिजली उत्पादन से लेकर परिवहन तक सब कुछ ठप होने की कगार पर है।
क्यों आई ऐसी नौबत?
पाकिस्तान की इस बदहाली के पीछे कई बड़े कारण हैं। विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserve) का लगातार गिरना सबसे बड़ी वजह है। जब देश के पास डॉलर ही नहीं होंगे, तो वह अंतरराष्ट्रीय बाजार से तेल कैसे खरीदेगा? इसके अलावा, देश की राजनीतिक अस्थिरता और भ्रष्टाचार ने निवेशकों का भरोसा पूरी तरह तोड़ दिया है। सऊदी अरब और यूएई जैसे दोस्त देशों ने भी अब पाकिस्तान को मुफ्त या आसान शर्तों पर तेल देना बंद कर दिया है। वे अब निवेश के बदले आर्थिक सुधारों की शर्त रख रहे हैं, जिसे पूरा कर पाना पाकिस्तान के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
जनता पर क्या होगा असर?
मंत्री के इस बयान ने पाकिस्तान की जनता में खलबली मचा दी है। पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें और कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी अब वहां आम बात हो गई है। पेट्रोल रिजर्व न होने का मतलब है कि आने वाले दिनों में महंगाई और भी आसमान छुएगी। बिजली की कटौती (Load Shedding) पहले से ही पाकिस्तान के लिए एक बड़ी समस्या है, और अब तेल संकट के कारण औद्योगिक उत्पादन भी बुरी तरह प्रभावित होगा। आम आदमी के लिए घर का बजट संभालना नामुमकिन होता जा रहा है।
