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अपने डीमैट अकाउंट से किसी को शेयर कैसे ट्रांसफर करें?

क्या आप स्टॉक ब्रोकर के भारी ब्रोकरेज से परेशान हैं या परिवार को शेयर्स गिफ्ट करना चाहते हैं? अब बिना किसी कागजी कार्रवाई के, डिजिटल माध्यम से कुछ ही मिनटों में अपने शेयर्स को एक डीमैट से दूसरे अकाउंट में सुरक्षित ट्रांसफर कर सकते हैं आइए बताते हैं कैसे?

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Shares Transfer

क्या आपका स्टॉक ब्रोकर भी हर ट्रेड पर मोटी ब्रोकरेज वसूल कर आपकी जेब काट रहा है? या फिर आप अपने भारी-भरकम शेयर्स का पोर्टफोलियो अपनी पत्नी या बच्चों को गिफ्ट कर उनके चेहरे पर मुस्कान लाना चाहते हैं? वजह चाहे जो भी हो, अक्सर लोग भारी-भरकम कागजी कार्रवाई और दफ्तरों के चक्कर काटने के डर से अपने शेयर्स को दूसरे डीमैट अकाउंट में ट्रांसफर करने से कतराते हैं। लेकिन अगर आप भी इसी डर से रुके हुए हैं, तो अब टेंशन छोड़ दीजिए। डिजिटल इंडिया के इस दौर में शेयर्स को एक डीमैट से दूसरे डीमैट अकाउंट में शिफ्ट करना अब उतना ही आसान हो गया है, जितना मोबाइल बैंकिंग ऐप से किसी को पैसे भेजना। बस कुछ ही मिनटों में और बिना किसी झंझट के आपके शेयर्स एक अकाउंट से दूसरे अकाउंट में पूरी तरह सुरक्षित पहुंच जाते हैं।

कैसे ट्रांसफर करें शेयर?

अगर आप सिर्फ अपना ब्रोकर बदल रहे हैं, यानी पुराने डीमैट अकाउंट से शेयर निकालकर खुद के ही किसी दूसरे नए अकाउंट में डाल रहे हैं, तो यह प्रोसेस अब बेहद सरल हो चुका है। आजकल भारत की दोनों मुख्य डिपॉजिटरी, NSDL और CDSL, निवेशकों को ऑनलाइन ट्रांसफर की शानदार सुविधा देती हैं। इसके अलावा, कई आधुनिक स्टॉक ब्रोकर्स तो अपने मोबाइल ऐप या वेब प्लेटफॉर्म के अंदर ही इसका सीधा और आसान विकल्प दे देते हैं। खुद के दूसरे अकाउंट में शेयर ट्रांसफर करने के लिए आपको मुख्य रूप से अपने नए डीमैट अकाउंट का नंबर, डीपी आईडी (DP ID) और क्लाइंट आईडी (Client ID) की जरूरत होती है। जैसे ही आप इन जानकारियों को भरकर प्रोसेस को पूरा करते हैं, आपके शेयर्स पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक और सुरक्षित तरीके से ट्रांसफर हो जाते हैं।

किसके पास हैं आपके शेयर?

शेयर ट्रांसफर की इस प्रक्रिया को शुरू करने से पहले NSDL और CDSL के बीच का फर्क समझना बहुत जरूरी है। भारत में आपके शेयर्स इन्हीं दो डिपॉजिटरी के पास सुरक्षित रखे जाते हैं। शेयर ट्रांसफर करते समय यह जरूर देख लें कि आपके दोनों अकाउंट किस डिपॉजिटरी के पास हैं। अगर आपके दोनों डीमैट अकाउंट एक ही डिपॉजिटरी के पास हैं, तो इस प्रक्रिया को 'इंट्रा-डिपॉजिटरी ट्रांसफर' कहा जाता है और यह बहुत जल्दी और आसानी से हो जाता है। इसके अगर आपका एक अकाउंट NSDL के पास है और दूसरा CDSL के पास, तो इसे 'इंटर-डिपॉजिटरी ट्रांसफर' कहते हैं। इसमें आपको थोड़ी ज्यादा जानकारियां भरनी पड़ सकती हैं और समय भी थोड़ा अधिक लग सकता है, हालांकि इस पूरी प्रक्रिया में आपका ब्रोकर आपकी पूरी मदद करता है।

क्या हैं नियम?

अपने ही दूसरे अकाउंट में शेयर ट्रांसफर करने की तुलना में किसी दूसरे व्यक्ति को शेयर 'गिफ्ट' करने के नियम थोड़े अलग होते हैं। अगर आप अपनी पत्नी, बच्चों या किसी मित्र को शेयर ट्रांसफर करना चाहते हैं, तो सबसे पहली शर्त यह है कि सामने वाले व्यक्ति के पास भी एक एक्टिव डीमैट अकाउंट होना जरूरी है। इस तरह के ट्रांसफर को 'ऑफ-मार्केट ट्रांसफर' कहा जाता है। ऑनलाइन प्रोसेस या फिजिकल फॉर्म भरते समय आपको ट्रांसफर के कारणों की एक सूची मिलती है, जहां आपको अनिवार्य रूप से 'गिफ्ट' का विकल्प चुनना होता है।

शेयर ट्रांसफर करते समय निवेशकों को कुछ बेहद महत्वपूर्ण बातों का खास ख्याल रखना चाहिए ताकि उनका ट्रांजैक्शन न फंसे। सबसे पहली बात यह है कि सभी डिटेल्स को दोबारा बारीकी से चेक करें। ऑनलाइन ट्रांसफर रुकने या रिजेक्ट होने की सबसे बड़ी और आम वजह गलत अकाउंट नंबर या गलत DP ID भरना होती है। इसलिए फाइनल सबमिट बटन दबाने से पहले एक-एक नंबर का मिलान दो बार जरूर कर लें। दूसरी महत्वपूर्ण बात टैक्स के चक्कर को समझना है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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