प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को 12 साल पुरे हो गए हैं और पिछले 12 वर्षों के भीतर मोदी सरकार द्वारा टैक्सपेयर्स को दिया गया सबसे बड़ा और ऐतिहासिक तोहफा है 'न्यू टैक्स रूल्स' (New Tax Rules) की शुरुआत है। पहले के पुराने टैक्स ढांचे में टैक्सपेयर्स को छूट का दावा करने के लिए कई तरह के निवेश और कागजी दस्तावेजों के चक्रव्यूह से गुजरना पड़ता था। सरकार ने इस प्रक्रिया को बेहद आसान बनाने के लिए नए टैक्स सिस्टम को पेश किया और हाल के वर्षों में इसमें बड़े बदलाव किए। इसके अलावा GST में भी कई बड़े बदलाव हुए हैं। आइए जानते हैं 12 साल में इनकम टैक्स रिफॉर्म से लेकर GST तक टैक्सपेयर्स को क्या बड़े तोहफे मिले?
इनकम टैक्स से लेकर GST तक
इनकम टैक्स के इस सरलीकरण के अलावा, अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax) के मोर्चे पर 1 जुलाई 2017 को लागू किया गया 'गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स' (GST) देश का अब तक का सबसे बड़ा टैक्स सुधार माना जाता है। जीएसटी के आने से पहले आम जनता को एक्साइज ड्यूटी, वैट (VAT), सर्विस टैक्स और ऑक्ट्रॉय जैसे दर्जनों छुपे हुए टैक्स चुकाने पड़ते थे, जिसे 'टैक्स के ऊपर टैक्स' (Cascading Effect) कहा जाता था। मोदी सरकार ने "एक देश, एक टैक्स" के संकल्प के साथ इन सभी अप्रत्यक्ष करों को समाप्त कर पूरे देश के लिए एक एकल पारदर्शी व्यवस्था बनाई। इतना ही नहीं, समय-समय पर जीएसटी काउंसिल की बैठकों के जरिए आम आदमी के रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजों, जैसे- राशन का सामान, घरेलू उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक्स पर लगने वाले टैक्स की दरों को 28% के उच्चतम स्लैब से घटाकर 18% या 12% के दायरे में लाया गया, जिससे सीधा लाभ उपभोक्ताओं की जेब को मिला।
क्या क्या हुआ बदलाव?
टैक्सपेयर्स के लिए केवल टैक्स की दरों को कम करना ही बड़ी बात नहीं रही, बल्कि टैक्स भरने की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाना भी एक क्रांतिकारी कदम रहा। सरकार ने 'फेसलेस असेसमेंट' (Faceless Assessment) और 'टैक्सपेयर्स चार्टर' (Taxpayers' Charter) की शुरुआत की। इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि अब टैक्सपेयर्स को अपनी स्क्रूटनी या किसी भी तरह की टैक्स संबंधी पूछताछ के लिए आयकर अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते। सब कुछ पूरी तरह से ऑनलाइन और अज्ञात (Anonymous) तरीके से होता है, जिसने भ्रष्टाचार की गुंजाइश को खत्म कर दिया है। इसके साथ ही, जहां पहले टैक्स रिफंड (Tax Refund) वापस आने में महीनों या कभी-कभी सालों का समय लग जाता था, वहीं आधुनिक तकनीक और आईटीआर (ITR) प्रोसेसिंग के अपग्रेड होने से अब करदाताओं का रिफंड मात्र कुछ ही दिनों या हफ्तों में सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर हो जाता है।
इसके अलावा, कॉरपोरेट जगत और व्यापार करने वाले लोगों के लिए भी सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाए। साल 2019 में सरकार ने डोमेस्टिक कंपनियों के लिए बेस कॉरपोरेट टैक्स की दर को 30% से घटाकर सीधे 22% कर दिया, जबकि नई मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए इसे और भी कम करके 15% के स्तर पर लाया गया। इस ऐतिहासिक कटौती ने न केवल भारतीय उद्योगों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया, बल्कि 'मेक इन इंडिया' (Make in India) के तहत देश में नए रोजगार पैदा करने और विदेशी निवेश को आकर्षित करने में भी अहम भूमिका निभाई। व्यापारियों के लिए छोटे-मोटे टैक्स कंप्लायंस और दस्तावेजीकरण के बोझ को काफी कम कर दिया गया, जिससे देश में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (Ease of Doing Business) को एक बड़ा बढ़ावा मिला।
