शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की वापसी, इतने हजार करोड़ की खरीदारी की, समझें इसके मायने
- Edited by: आलोक कुमार
- Updated Feb 8, 2026, 12:20 PM IST
एफपीआई ने कुल मिलाकर 2025 में भारतीय इक्विटी से शुद्ध 1.66 लाख करोड़ रुपये निकाले थे। वहीं विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) फरवरी के पहले सप्ताह में भारतीय इक्विटी में 8,100 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है।
विदेशी निवेशक
भारतीय शेयर बाजार निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। करीब डेढ़ साल बिवकाली करने के बाद आखिरकार विदेशी निवेश स्टॉक मार्केट में लौट आए हैं। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) फरवरी के पहले सप्ताह में शुद्ध खरीदार बन गए हैं। बेहतर रिस्क रिवॉर्ड रेश्यो और अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते के कारण उन्होंने भारतीय इक्विटी में 8,100 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार यह निवेश हाल के महीनों में हुई लगातार निकासी के बाद आया है। एफपीआई ने जनवरी में 35,962 करोड़ रुपये, दिसंबर में 22,611 करोड़ रुपये और नवंबर में 3,765 करोड़ रुपये निकाले थे।
2025 में निकाले थे 1.66 लाख करोड़
एफपीआई ने कुल मिलाकर 2025 में भारतीय इक्विटी से शुद्ध 1.66 लाख करोड़ रुपये निकाले थे। यह निकासी मुद्रा में उतार-चढ़ाव, वैश्विक व्यापार तनाव, अमेरिकी शुल्क की चिंता और इक्विटी के ऊंचे मूल्यांकन के कारण हुई थी। आंकड़ों के मुताबिक एफपीआई ने इस महीने (छह फरवरी तक) 8,129 करोड़ रुपये का निवेश किया है। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रधान प्रबंधक (शोध) हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि हालिया खरीदारी जोखिम लेने की बढ़ती क्षमता और भारत के वृद्धि परिदृश्य में नए भरोसे को दर्शाती है।
उन्होंने आगे कहा कि यह सेंटिमेंट ग्लोबल अनिश्चितताओं में कमी, घरेलू ब्याज दर की उम्मीदों में स्थिरता और भारत-अमेरिका व्यापार और पॉलिसी डेवलपमेंट को लेकर आशावाद से सपोर्टेड था। यह बदलाव जनवरी के आउटफ्लो के बिल्कुल उलट है, जब ग्लोबल रिस्क-ऑफ माहौल और बढ़े हुए अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के बीच FPIs भारतीय बाजारों से बाहर निकल गए थे।
अमेरिका से ट्रेड डील का असर
एंजेल वन के सीनियर फंडामेंटल एनालिस्ट वकारजावेद खान ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में सफलता ने भू-राजनीतिक अनिश्चितता को कम करने और बाजार में तेजी लाने में मदद की, साथ ही अमेरिकी यील्ड को स्थिर किया और FY26 के लिए केंद्रीय बजट में घोषित सहायक उपायों, जिसमें फिस्कल स्टिमुलस और सेक्टर-स्पेसिफिक इंसेंटिव शामिल हैं। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा कि रुपये की मजबूती ने भी सेंटिमेंट को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाई। रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 90.30 से मजबूत हुआ, हालांकि 6 फरवरी को बाजार बंद होने तक यह फिर से कमजोर होकर लगभग 90.70 पर आ गया।
उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि रुपया स्थिर होगा और मार्च 2026 के अंत तक धीरे-धीरे 90 प्रति डॉलर से नीचे मजबूत होगा, जिससे अतिरिक्त FPI इनफ्लो शुरू हो सकता है, हालांकि परिणाम इस बात पर निर्भर करेंगे कि ग्लोबल व्यापार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संबंधित डेवलपमेंट कैसे सामने आते हैं।
बाजार के प्रतिभागी सतर्क रूप से आशावादी बने हुए हैं। खान ने कहा कि अगर कॉर्पोरेट कमाई की गति जारी रहती है और ग्लोबल व्यापार तनाव सीमित रहता है तो और इनफ्लो हो सकता है, हालांकि रुपये की लगातार कमजोरी, बढ़े हुए वैल्यूएशन और अमेरिकी पॉलिसी में संभावित बदलाव तेजी को सीमित कर सकते हैं।
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