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महंगाई का एक और झटका! अब बिस्किट की बारी, जानें कितने तक बढ़ सकते हैं दाम?

कच्चे माल की कीमत बढ़ने का असर अब FMCG प्रोडक्ट पर दिखने लगा है। चीनी-चाय के बाद बिस्किट भी अब महंगे हो सकते हैं। क्योंकि, कंपनियां आने वाले दिनों में तमाम प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ा सकती हैं।

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चीनी और गेहूं जैसे कच्चे माल की महंगाई का असर

Food Inflation : रोजमर्रा की जरूरत का सामान खरीदने वाले लोगों को महंगाई का एक और झटका लग सकता है। चीनी, चाय और दूसरे FMCG सामान के बाद अब बिस्किट और कुकीज की कीमतों पर भी दबाव बढ़ गया है। कच्चे माल की लागत लगातार बढ़ने से बिस्किट कंपनियां कीमत बढ़ाने या पैकेट का वजन घटाने की तैयारी में हैं।

बिस्किट इंडस्ट्री की परेशानी इसलिए ज्यादा है, क्योंकि इसके उत्पादन में चीनी, गेहूं और मैदा व खाद्य तेल जैसे प्रमुख कच्चे माल का बड़ा हिस्सा होता है। इन कमोडिटीज की कीमतों में बढ़ोतरी ने कंपनियों के मार्जिन पर सीधा दबाव डाला है। ऐसे में आने वाले महीनों में ग्राहकों को या तो ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है या फिर उसी कीमत में कम बिस्किट मिल सकते हैं।

ब्रिटानिया ने दिए साफ संकेत

बिस्किट मार्केट की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल Britannia Industries ने कीमतों में बढ़ोतरी का संकेत दिया है। कंपनी ने चालू तिमाही में करीब 1.5% से 2% का प्राइसिंग इम्पैक्ट लेने की बात कही है। कंपनी ने तिमाही नतीजों के दौरान ही यह साफ कर दिया था। कंपनी के शीर्ष प्रबंधन का कहना है कि पहले की गई कीमत बढ़ोतरी से कमोडिटी महंगाई का केवल करीब आधा असर ही कवर हो पाया था। यानी इनपुट कॉस्ट का बड़ा हिस्सा अभी भी कंपनियों के मार्जिन को प्रभावित कर रहा है। इंडस्ट्री में यह संकेत इसलिए अहम है, क्योंकि Britannia के कदम का असर पूरे बिस्किट बाजार पर पड़ सकता है। दूसरी कंपनियां भी लागत बढ़ने की स्थिति में इसी तरह के कदम उठा सकती हैं।

कहां होगा सबसे ज्यादा असर?

बिस्किट की कीमत बढ़ाना जितना आसान लगता है, उतना है नहीं। खासकर 5 और 10 रुपये वाले पैकेट के मामले में कंपनियां सीधे MRP बढ़ाने से बचना चाहती हैं। क्योंकि, इन प्राइस पॉइंट्स पर ग्राहक काफी संवेदनशील होते हैं। इसलिए कंपनियां 'Shrinkflation' का सहारा ले सकती हैं। इसका मतलब है कि पैकेट की कीमत वही रहेगी, लेकिन उसके अंदर बिस्किट का वजन या संख्या कम कर दी जाएगी। यानी 10 रुपये का पैकेट आगे भी 10 रुपये का दिख सकता है, लेकिन उसमें पहले की तुलना में कम ग्राम बिस्किट हो सकते हैं। दूसरी तरफ बड़े फैमिली पैक और प्रीमियम कुकीज में सीधे कीमत बढ़ने की संभावना ज्यादा है।

क्यों बिगड़ रहा बिस्किट का गणित?

बिस्किट कंपनियों की लागत बढ़ने के पीछे कई वजहें हैं। चीनी की कीमतों में तेजी ने खासा दबाव बनाया है। उत्पादन और सप्लाई से जुड़ी दिक्कतों के अलावा घरेलू बाजार में कीमतों पर भी दबाव बना हुआ है। दूसरी बड़ी चुनौती खाद्य तेल की है। खास तौर पर Palm Oil की कीमत में सालाना आधार पर 20% से ज्यादा की बढ़ोतरी ने बेकरी और पैकेज्ड फूड कंपनियों की लागत बढ़ाई है। गेहूं और मैदा की कीमतों के साथ-साथ पैकेजिंग, ईंधन, ट्रांसपोर्ट और फ्रेट की लागत भी बढ़ी है। यानी कंपनियों के सामने सिर्फ एक कच्चे माल की समस्या नहीं है। चीनी, तेल, आटा और लॉजिस्टिक्स की लागत का एक साथ बढ़ना मार्जिन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

FMCG कैटेगरीसंभावित बढ़ोतरीमहंगे कच्चे मालकंपनियों की रणनीति
बिस्किट और पैकेज्ड स्नैक्स1.5%–2%चीनी, पाम ऑयल, गेहूं/मैदा₹5-₹10 पैक में Shrinkflation, बड़े पैक में सीधी कीमत बढ़ोतरी
साबुन और Personal Care2%–5%क्रूड ऑयल, केमिकल्स, पैकेजिंगचुनिंदा प्रोडक्ट्स पर सीधी कीमत बढ़ोतरी
डिटर्जेंट और Home Care6%–7%LABSA और क्रूड आधारित इनपुटMRP बढ़ाने के साथ प्रमोशनल मार्जिन में कटौती
चाय और कॉफी2%–5%चाय पत्ती की बढ़ी कीमतकीमत अपडेट और ऑफर/बंडल में कमी

पूरे FMCG सेक्टर पर बढ़ा दबाव

कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव केवल बिस्किट तक सीमित नहीं है। FMCG सेक्टर में साबुन, डिटर्जेंट, पेय पदार्थ और दूसरे पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट्स पर भी कीमत बढ़ाने की तैयारी चल रही है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पैकेज्ड स्नैक्स और बिस्किट में हालिया प्राइसिंग एक्शन करीब 1.5% से 2% के दायरे में है। वहीं पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स में करीब 2% से 5%, होम केयर कैटेगरी में 6% से 7% और चाय-कॉफी जैसे पेय पदार्थों में 2% से 5% तक का दबाव बताया गया है।

कंपनीक्या कहा / संकेतग्राहक पर संभावित असर
Britannia Industriesचालू तिमाही में 1.5%–2% का प्राइसिंग इम्पैक्ट लेने की बात कही। कंपनी के मुताबिक पिछली कीमत बढ़ोतरी से कमोडिटी महंगाई का करीब आधा असर ही कवर हुआ।बड़े पैक में सीधे दाम बढ़ सकते हैं, जबकि ₹5 और ₹10 पैक में वजन घट सकता है।
Hindustan Unilever (HUL)इनपुट लागत के दबाव के बीच अलग-अलग कैटेगरी में कीमत बढ़ाने के संकेत दिए।साबुन, पर्सनल केयर और दूसरे रोजमर्रा के सामान महंगे हो सकते हैं।
Bikaji Foodsबढ़ती लागत के बीच मार्जिन बचाने के लिए प्राइसिंग एक्शन की जरूरत का संकेत दिया।पैकेज्ड स्नैक्स की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
Godrej Consumer Productsसाबुन में करीब 5% और डिटर्जेंट में 6%–7% तक कीमत बढ़ाने की रणनीति का संकेत।रोजमर्रा के Home & Personal Care सामान का खर्च बढ़ सकता है।
Maricoवैल्यू-ऐडेड हेयर ऑयल कैटेगरी में इनपुट महंगाई का असर ग्राहकों तक पहुंचाने की बात सामने आई।कुछ हेयर ऑयल प्रोडक्ट्स महंगे हो सकते हैं।
Tata Consumer Productsचाय-कॉफी में बढ़ती लागत के बीच 2%–5% तक कीमत/प्रमोशनल बदलाव का दबाव।चाय और पेय पदार्थों का बिल बढ़ सकता है।
Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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