FII Selling: भारतीय शेयर बाजार के लिए विदेशी निवेशकों की निकासी (FII Selling) के लिहाज से मार्च 2026 बेहद दबाव भरा महीना रहा। FII ने इस दौरान CDSL के आंकड़ों के मुताबिक ₹1.17 लाख करोड़ से ज्यादा की निकासी की है। इनमें वित्तीय शेयर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। बढ़ती बॉन्ड यील्ड, रुपये की कमजोरी और RBI के कदमों ने बाजार की दिशा पूरी तरह बदल दी।
Financial Stocks में सबसे बड़ी बिकवाली
मार्च में FII Selling की वजह से फाइनेंशियल सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। फाइनेंस स्टॉक्स से इस दौरान FIIs ने ₹60,655 करोड़ की निकासी की है, जो कुल आउटफ्लो का आधे से ज्यादा हिस्सा रहा। यह साफ संकेत है कि विदेशी निवेशकों ने सबसे ज्यादा जोखिम बैंकिंग और NBFC स्पेस में कम किया। AUC घटकर ₹19.04 लाख करोड़ पर आ गया, जो 22 महीने का निचला स्तर है।
Bank Nifty पर दबाव और वैल्यूएशन में गिरावट
भारी बिकवाली का असर सीधे बैंकिंग इंडेक्स पर दिखा। Nifty Bank मार्च में 17% से ज्यादा गिरा, जो महामारी के बाद सबसे बड़ी मासिक गिरावट है। सेक्टर का मार्केट कैप ₹9 लाख करोड़ से ज्यादा घटा। HDFC Bank जैसे बड़े शेयर में तेज गिरावट ने पूरे सेक्टर की धारणा को कमजोर किया।
बॉन्ड यील्ड का झटका और MTM रिस्क
10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड 7% के पार पहुंच गई, जो एक साल का उच्चतम स्तर है। इससे बैंकों के G-Sec पोर्टफोलियो पर MTM लॉस का खतरा बढ़ गया। ब्रोकरेज अनुमानों के मुताबिक, बैंकिंग सिस्टम को ₹4,000–5,000 करोड़ तक का संभावित नुकसान हो सकता है, जिससे निवेशकों की चिंता और गहरी हुई।
RBI की रणनीति और लिक्विडिटी पर असर
रुपया मार्च में 4.24% कमजोर हुआ, जो छह साल की सबसे बड़ी गिरावट है। RBI ने रुपये को सपोर्ट करने के लिए लिक्विडिटी को नियंत्रित रखा, जिससे फाइनेंशियल कंडीशन टाइट हुई। इसका असर बैंकों की लेंडिंग और मार्जिन पर पड़ने की आशंका है, खासकर आने वाले क्वार्टर्स में।
सेक्टरवाइज बिकवाली का व्यापक असर
बिकवाली केवल वित्तीय सेक्टर तक सीमित नहीं रही। NSDL के आंकड़ों के मुताबिक Auto सेक्टर में ₹12,498 करोड़, Construction में ₹9,154 करोड़ और Metals में ₹3,165 करोड़ की निकासी हुई। FMCG, Realty और Healthcare जैसे डिफेंसिव सेक्टर भी दबाव से नहीं बच सके, जो बाजार में व्यापक कमजोरी को दिखाता है।
| सेक्टर (हिंदी) | Mar-26 (₹ करोड़) | Feb-26 (₹ करोड़) | Jan-26 (₹ करोड़) |
|---|---|---|---|
| वित्तीय सेवाएं | -60,655 | 8,418 | -8,592 |
| ऑटोमोबाइल | -12,498 | 3,586 | -3,594 |
| निर्माण (कंस्ट्रक्शन) | -9,154 | 4,487 | -1,532 |
| धातु एवं खनन | -3,165 | 5,638 | 11,526 |
| एफएमसीजी | -5,419 | -1,951 | -7,497 |
| उपभोक्ता सेवाएं | -2,141 | -4,172 | -5,513 |
| रियल्टी | -4,693 | 734 | -2,655 |
| हेल्थकेयर | -4,638 | -329 | -6,162 |
| टेलीकॉम | -5,603 | -1,881 | -4,777 |
| निर्माण सामग्री | -3,144 | 321 | -857 |
| सेवाएं | -2,575 | 1,491 | -1,971 |
| तेल एवं गैस | -4,129 | 5,381 | -940 |
| उपभोक्ता ड्यूरेबल्स | -2,902 | -756 | -1,050 |
| पावर | -230 | 4,506 | -1,867 |
| कैपिटल गुड्स | 3,148 | 12,135 | 2,761 |
| आईटी | -1,874 | -16,949 | -1,835 |
| केमिकल्स | -232 | 248 | 140 |
| टेक्सटाइल्स | -319 | -100 | -275 |
बाजार पर बड़ा असर और गिरती हिस्सेदारी
इस भारी आउटफ्लो का असर पूरे बाजार पर दिखा। Sensex और Nifty दोनों में 11.5% से ज्यादा की गिरावट आई, जबकि Midcap और Smallcap इंडेक्स भी करीब 11% टूटे। FII की हिस्सेदारी घटकर 15.14% पर आ गई और कुल AUC ₹62.46 लाख करोड़ पर आ गया, जो बाजार में भरोसे की कमी को दर्शाता है।
आगे की दिशा क्या होगी
बढ़ती बॉन्ड यील्ड, महंगा कच्चा तेल और भू-राजनीतिक तनाव अभी भी बाजार के लिए बड़े जोखिम बने हुए हैं। RBI की अगली नीति और वैश्विक संकेत तय करेंगे कि विदेशी निवेशक कब वापस लौटते हैं। फिलहाल संकेत यही हैं कि बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।
डिस्क्लेमर: TimesNow Hindi किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।
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