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FII में भगदड़, भारतीय बाजार से हर घंटे निकाल रहे ₹1000 करोड़, 16 दिन में ₹1 लाख करोड़ की निकासी

विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से लगातार निकासी कर रहे हैं। पिछले 16 सत्र में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से 1 लाख करोड़ की बिकवाली की है। इस तरह FII हर घंटे 1000 करोड़ रुपये निकाल रहे हैं।

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विदेशी निवेशक तेजी से छोड़ रहे भारतीय बाजार

FII Selling In India Market: भारतीय शेयर बाजार पर विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने दबाव बढ़ा दिया है। सिर्फ 16 ट्रेडिंग सेशंस में FIIs ने ₹1 लाख करोड़ निकाल लिए, जो हर घंटे करीब ₹1000 करोड़ की निकासी के बराबर है। ग्लोबल तनाव, महंगा तेल और कमजोर रुपया इस ट्रेंड के प्रमुख कारण बनकर उभरे हैं।

वर्ष / अवधिकुल निकासी (₹ लाख करोड़)कुल ट्रेडिंग सेशंसबिकवाली वाले सेशंसप्रति घंटे औसत बिकवाली (₹ करोड़)
2026 (YTD)~1.28–1.30~5033~400–450*
26 फरवरी–20 मार्च1.0016लगभग सभी~1,000
20252.40241156~166
20241.29238134~90

बाजार पर गहराता असर

26 फरवरी से 20 मार्च के बीच विदेशी निवेशकों ने भारतीय सेकेंडरी मार्केट से ₹1,00,040 करोड़ की निकासी की। लगभग 16 ट्रेडिंग दिनों के इस दौर में यह आंकड़ा प्रति घंटे करीब ₹1000 करोड़ बैठता है। साल 2026 में अब तक 50 में से 33 सेशंस में बिकवाली दर्ज होना इस ट्रेंड की गंभीरता को दर्शाता है।

ग्लोबल तनाव और महंगा क्रूड बना बड़ा जोखिम

अमेरिका-ईरान-इजरायल तनाव ने क्रूड ऑयल की कीमतों को तेजी से ऊपर धकेला है। भारत अपनी जरूरत का 85-90 प्रतिशत तेल आयात करता है, ऐसे में $100 प्रति बैरल से ऊपर का स्तर अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है। इससे महंगाई, चालू खाता घाटा और फिस्कल बैलेंस पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

कमजोर रुपया बढ़ा रहा विदेशी निवेशकों का नुकसान

रुपये में गिरावट ने विदेशी निवेशकों के लिए जोखिम को और बढ़ा दिया है। बाजार में गिरावट के साथ-साथ करेंसी डिप्रिसिएशन से उन्हें दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। यही वजह है कि बिकवाली का सिलसिला और तेज हो गया है, जिससे रुपये पर भी अतिरिक्त दबाव बन रहा है।

भारत महंगा, दूसरे बाजार ज्यादा आकर्षक

विश्लेषकों के अनुसार भारत की वैल्यूएशन अभी भी कई ग्लोबल बाजारों के मुकाबले ऊंची है। अमेरिका, यूरोप, चीन और कोरिया जैसे बाजारों में बेहतर रिटर्न और नई टेक्नोलॉजी थीम्स में निवेश के अवसर बढ़े हैं। इससे ग्लोबल कैपिटल का रुख भारत से हटकर अन्य बाजारों की ओर गया है।

FII होल्डिंग 13 महीने के निचले स्तर पर

विदेशी निवेशकों का एसेट्स अंडर कस्टडी (AUC) घटकर 15 मार्च तक ₹65.63 लाख करोड़ रह गया, जो एक महीने पहले ₹71.77 लाख करोड़ और दिसंबर 2025 में ₹74.27 लाख करोड़ था। बाजार में उनकी हिस्सेदारी भी घटकर 15.3 प्रतिशत पर आ गई, जो एक साल पहले 16.3 प्रतिशत थी।

DII की खरीदारी भी नहीं रोक पाई गिरावट

घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने इस दौरान ₹1,16,586 करोड़ की रिकॉर्ड खरीदारी की। प्रति घंटे करीब ₹1200 करोड़ का निवेश होने के बावजूद बाजार गिरावट से नहीं बच सका। यह दिखाता है कि विदेशी पूंजी का प्रभाव अभी भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाता है।

कैटेगरीकुल फ्लो (₹ करोड़)अवधिप्रति दिन औसत (₹ करोड़)प्रति घंटे औसत (₹ करोड़)
FII (बिकवाली)-1,00,04016 सेशंस~6,252~1,000
DII (खरीदारी)+1,16,58616 सेशंस~7,286~1,200

निफ्टी-सेंसेक्स धड़ाम

भारी बिकवाली के चलते सेंसेक्स और निफ्टी में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज हुई। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी क्रमशः लगभग 7.5 प्रतिशत और 7.8 प्रतिशत तक टूटे। इससे व्यापक बाजार में कमजोरी साफ नजर आई।

कैसी है आगे की राह?

विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये की स्थिरता, वैल्यूएशन में सुधार और कमाई की स्पष्ट ग्रोथ दिखने पर ही विदेशी निवेशकों की वापसी संभव है। फिलहाल जियोपॉलिटिकल तनाव और महंगे क्रूड के चलते बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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