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भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 674 बिलियन डॉलर के पार, गोल्ड रिजर्व भी 2.66 बिलियन डॉलर बढ़ा

3 जुलाई 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 7.260 बिलियन डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा, गोल्ड रिजर्व में भी बढ़त दर्ज की गई।

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भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 674 बिलियन डॉलर के पार (Photo: iStock)

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़त दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 3 जुलाई 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) बढ़कर 674.193 बिलियन अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया। एक सप्ताह पहले की तुलना में इसमें 7.260 बिलियन डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बता दें, फरवरी 2026 के अंत में देश का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड 728.494 बिलियन डॉलर के स्तर तक पहुंच गया था। हालांकि इसके बाद पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता के कारण रिजर्व में गिरावट देखने को मिली।

फॉरेन करेंसी एसेट्स और गोल्ड रिजर्व भी बढ़ा

विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा फॉरेन करेंसी एसेट्स (Foreign Currency Assets) होता है। 3 जुलाई 2026 तक एफसीए भी बढ़कर 545.578 बिलियन डॉलर हो गया। इसमें एक सप्ताह के दौरान 4.510 बिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई। वहीं, गोल्ड रिजर्व भी बढ़कर 105.205 बिलियन डॉलर पहुंच गया। इसमें 2.669 बिलियन डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई, जो बताती है कि भारत का स्वर्ण भंडार भी लगातार मजबूत हो रहा है।

IMF में भारत की रिजर्व पोजिशन भी बढ़ी

इसके अलावा स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDRs) में 65 मिलियन डॉलर की बढ़त दर्ज की गई है और यह बढ़कर 18.623 बिलियन डॉलर हो गया है। वहीं, IMF में भारत की रिजर्व पोजिशन भी 15 मिलियन डॉलर बढ़कर 4787 बिलियन डॉलर हो गई।

क्या होता है विदेशी मुद्रा भंडार?

विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश के पास मौजूद विदेशी मुद्राओं, सोने (Gold), विशेष आहरण अधिकार (SDR) और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में रिजर्व पोजिशन का कुल संग्रह होता है। यह किसी देश की आर्थिक मजबूती का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। विदेशी मुद्रा भंडार जितना अधिक होगा, देश उतनी ही मजबूती से आयात, विदेशी कर्ज और वैश्विक आर्थिक संकट जैसी परिस्थितियों का सामना कर सकता है।

विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने से क्या फायदा

विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ना केवल सरकार या RBI के लिए ही अच्छी खबर नहीं होती, बल्कि इसका सीधा फायदा आम लोगों और देश की अर्थव्यवस्था को भी मिलता है। मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार से रुपये को स्थिरता और मजबूती मिलती है, जिससे कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य जरूरी वस्तुओं के आयात का भुगतान करना आसान होता है। इसके अलावा, वैश्विक आर्थिक संकट या बाजार में उतार-चढ़ाव की स्थिति में देश की अर्थव्यवस्था को सहारा मिलता है। बढ़ता विदेशी मुद्रा भंडार विदेशी निवेशकों का भरोसा भी बढ़ाता है, जिससे निवेश आकर्षित होता है। साथ ही, आयात महंगा होने का जोखिम कम हो सकता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की वित्तीय साख भी मजबूत होती है।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनाला author

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने ... और देखें

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