FD Maturity Guide: एफडी (FD) को सुरक्षित निवेश के लिए पसंद किया जाता है। लेकिन जब FD मैच्योर हो जाती है और एकमुश्त रकम हाथ में आती है, तो अगला सवाल यही होता है कि इस पैसे को कहां रखा जाए। अगर तुरंत पैसों की जरूरत नहीं है तो दोबारा FD करवाना या SIP के जरिए निवेश करना, दोनों विकल्प सामने होते हैं। ऐसे में सही विकल्प चुनने के लिए निवेश के उद्देश्य और समयावधि को समझना जरूरी है।
दोबारा FD करवाने पर क्या फायदा?
FD मैच्योर होने के बाद पूरी रकम को फिर से FD में लगाया जा सकता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि निवेशक को ब्याज दर पहले से पता होती है और बाजार के उतार-चढ़ाव का सीधा असर निवेश पर नहीं पड़ता। अगर आपका लक्ष्य पूंजी को सुरक्षित रखना है या आने वाले कुछ वर्षों में इस पैसे की जरूरत पड़ सकती है, तो दोबारा FD पर विचार किया जा सकता है।
हालांकि, FD का ब्याज सीमित होता है और ब्याज से होने वाली आय पर लागू टैक्स नियमों के अनुसार टैक्स देना पड़ सकता है। इसके अलावा, FD की ब्याज दरें समय के साथ बदल सकती हैं। इसलिए पुरानी FD मैच्योर होने के बाद नई FD करवाते समय उस समय उपलब्ध ब्याज दर और अवधि की तुलना करना जरूरी है।
SIP में निवेश करने का भी विकल्प
अगर एफडी मैच्योरिटी की रकम की लंबे समय तक जरूरत नहीं है तो SIP के जरिए म्यूचुअल फंड में निवेश पर विचार किया जा सकता है। खासकर लंबी अवधि के वित्तीय लक्ष्यों के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड से FD की तुलना में अधिक रिटर्न मिलने की संभावना हो सकती है। लेकिन यहां यह समझना जरूरी है कि म्यूचुअल फंड का रिटर्न बाजार से जुड़ा होता है और इसकी गारंटी नहीं होती।
FD की मैच्योरिटी से मिली पूरी रकम को एक साथ निवेश करने के बजाय इसे कुछ हिस्सों में बांटकर अलग-अलग समय पर SIP के जरिए लगाया जा सकता है। इससे बाजार में एक साथ बड़ी रकम लगाने का जोखिम कुछ हद तक कम करने में मदद मिल सकती है।
कौन-सा ऑप्शन ज्यादा बेहतर
अगर आपकी प्राथमिकता सुरक्षा, निश्चित ब्याज और कम जोखिम है तो दोबारा FD एक बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं लंबे समय के लक्ष्य हैं और बाजार के उतार-चढ़ाव को सहन करने की क्षमता है तो SIP पर विचार किया जा सकता है। जरूरी नहीं कि पूरी रकम एक ही जगह लगाई जाए। जरूरत के अनुसार कुछ पैसा FD और बाकी रकम SIP में रखने से सुरक्षा और बाजार आधारित निवेश, दोनों का संतुलन बनाया जा सकता है।
