H-1B Visa Fee: अमेरिका में नौकरी करने का सपना देखने वाले विदेशी कर्मचारियों खासकर भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स के लिए H-1B वीजा को लेकर एक नया अपडेट सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नए H-1B वीजा से जुड़े 100,000 अमेरिकी डॉलर की फीस वाले नियम को एक और साल के लिए बढ़ा दिया है। व्हाइट हाउस के मुताबिक, यह पाबंदी 21 सितंबर 2026 से अगले 12 महीनों तक प्रभावी रहेगी।
इस नियम के तहत अमेरिका के बाहर मौजूद कुछ विदेशी कर्मचारियों के लिए H-1B याचिका के साथ 1 लाख डॉलर फीस देनी होगी। हालांकि, इसमें कुछ अपवाद भी हैं और राष्ट्रीय हित में कुछ मामलों में छूट देने का अधिकार भी रखा गया है। हालांकि, मौजूदा H-1B वीजा धारकों के रिन्यूअल पर इस फैसला का सीधा असर नहीं होगा।
H-1B वीजा क्या है
H-1B वीजा अमेरिका की ऐसी व्यवस्था है, जिसके जरिए अमेरिकी कंपनियां स्पेशल स्किल वाले विदेशी कर्मचारियों को नौकरी पर रख सकती हैं। भारतीय प्रोफेशनल्स इस कार्यक्रम के बड़े लाभार्थी समूहों में शामिल हैं। खासकर आईटी सेक्टर में भारतीय कर्मचारियों की बड़ी संख्या H-1B वीजा के जरिए अमेरिका जाती है और कंपनियों में काम करती है।
क्यों लिया गया यह फैसला
व्हाइट हाउस का कहना है कि 2025 में 1 लाख डॉलर की फीस लागू किए जाने के बाद सबसे बड़ी आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों द्वारा H-1B रजिस्ट्रेशन में 92 % की कमी दर्ज की गई। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य कम वेतन वाले विदेशी श्रमिकों की भर्ती को कम करना और अमेरिकी कर्मचारियों और नए ग्रेजुएट्स के लिए नौकरी के अवसरों को बढ़ाना है।
H-1B आवेदनों की जांच होगी कड़ी
इसके साथ ही H-1B आवेदनों की जांच भी और कड़ी की जाएगी। नए आदेश के अनुसार, संबंधित अमेरिकी एजेंसियां यह भी जांचेंगी कि H-1B कर्मचारी के लिए आवेदन करने वाले नियोक्ता ने कहीं उसी तरह के पद पर अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी तो नहीं की है या भविष्य में ऐसा करने की योजना तो नहीं बना रहा।
इस फैसले का असर उन कंपनियों पर पड़ सकता है जो अमेरिका के बाहर से नए H-1B कर्मचारियों को लाने की योजना बना रही हैं। वहीं, नियम को लेकर कानूनी चुनौती भी जारी है और इसकी वैधता पर अदालतों में मामला चल रहा है।
