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FD में सबसे बड़ी गलती: लोग ब्याज दर देखते हैं, लेकिन यह नहीं देखते

Fixed Deposit: एफडी में निवेश करते समय लोग सिर्फ ज्यादा ब्याज दर देखते हैं, जबकि बैंक की विश्वसनीयता, टैक्स, अवधि और प्रीमैच्योर निकासी नियमों को नजरअंदाज करना बड़ी वित्तीय गलती हो सकती है।

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FD निवेशकों की एक आम भूल

Photo : iStock

Fixed Deposit : जब भी लोग फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में पैसा लगाने का फैसला करते हैं, तो सबसे पहले और अक्सर सिर्फ एक ही चीज देखते हैं, ब्याज दर (FD Interest Rate)। जिस बैंक या वित्तीय संस्था की ब्याज दर ज्यादा दिखाई देती है, वहां निवेश करने का मन बन जाता है। लेकिन वित्तीय एक्सपर्ट्स का कहना है कि FD चुनते समय केवल ब्याज दर पर ध्यान देना एक बड़ी गलती हो सकती है। दरअसल, निवेश का फैसला करते समय कई दूसरे महत्वपूर्ण पहलुओं को भी समझना जरूरी है। सिर्फ ऊंचे रिटर्न के लालच में लिया गया फैसला बाद में परेशानी का सबब बन सकता है।

सिर्फ ज्यादा ब्याज दर ही सब कुछ नहीं

मान लीजिए दो बैंक FD पर अलग-अलग ब्याज दर दे रहे हैं। एक बैंक 7 प्रतिशत और दूसरा 7.5 प्रतिशत का रिटर्न दे रहा है। अधिकांश लोग बिना ज्यादा सोच-विचार के 7.5 प्रतिशत वाली FD चुन लेते हैं। हालांकि यह देखना भी जरूरी है कि बैंक कितना भरोसेमंद है, उसकी वित्तीय स्थिति कैसी है और आपकी जमा राशि कितनी सुरक्षित रहेगी। कई बार थोड़े ज्यादा ब्याज के लिए लोग ऐसे संस्थानों में निवेश कर देते हैं जहां जोखिम अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है।

बैंक की सुरक्षा और विश्वसनीयता पर भी दें ध्यान

FD में निवेश का मुख्य उद्देश्य सुरक्षित रिटर्न पाना होता है। इसलिए निवेश करने से पहले बैंक या वित्तीय संस्था की विश्वसनीयता जरूर जांचनी चाहिए। अगर कोई बैंक या संस्था बहुत ज्यादा ब्याज दर ऑफर कर रही है, तो उसके पीछे की वजह समझना भी जरूरी है। कई बार ज्यादा ब्याज दर निवेशकों को आकर्षित करने की रणनीति हो सकती है। ऐसे में संस्था की साख और वित्तीय मजबूती की जानकारी लेना समझदारी माना जाता है।

समय से पहले FD तोड़ने के नियम जानना जरूरी

कई निवेशक FD बनाते समय यह नहीं देखते कि जरूरत पड़ने पर उसे समय से पहले तोड़ने पर क्या नियम लागू होंगे। अधिकांश बैंक प्रीमैच्योर विड्रॉल पर पेनाल्टी लगाते हैं, जिससे मिलने वाला ब्याज कम हो सकता है। अगर भविष्य में अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाए और FD तोड़नी पड़े, तो नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए FD कराने से पहले प्रीमैच्योर क्लोजर की शर्तों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए।

टैक्स का असर भी समझें

FD से मिलने वाला ब्याज पूरी तरह आपके हाथ में नहीं आता। इस पर इनकम टैक्स नियमों के अनुसार टैक्स भी लग सकता है। कई लोग सिर्फ घोषित ब्याज दर देखकर निवेश कर देते हैं, लेकिन टैक्स कटने के बाद वास्तविक रिटर्न कम हो सकता है। इसलिए FD का चयन करते समय पोस्ट-टैक्स रिटर्न यानी टैक्स के बाद मिलने वाले वास्तविक लाभ का भी आकलन करना चाहिए।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग लाभ

कई बैंक वरिष्ठ नागरिकों को सामान्य ग्राहकों की तुलना में अधिक ब्याज दर प्रदान करते हैं। ऐसे में परिवार के बुजुर्ग सदस्यों के लिए FD कराते समय उपलब्ध अतिरिक्त लाभों की जानकारी लेना फायदेमंद हो सकता है। इसके अलावा कुछ बैंक विशेष अवधि वाली FD योजनाओं पर भी अतिरिक्त रिटर्न देते हैं। इसलिए निवेश से पहले विभिन्न विकल्पों की तुलना करना जरूरी है।

FD की अवधि चुनना भी महत्वपूर्ण

सिर्फ ब्याज दर देखकर लंबी अवधि की FD करा लेना हमेशा सही फैसला नहीं होता। निवेशक को अपनी वित्तीय जरूरतों और लक्ष्यों के अनुसार अवधि चुननी चाहिए। अगर निकट भविष्य में पैसों की जरूरत पड़ सकती है, तो बहुत लंबी अवधि की FD उपयुक्त नहीं हो सकती। वहीं, लंबे समय के लक्ष्यों के लिए अलग रणनीति अपनाई जा सकती है।

फिक्स्ड डिपॉजिट को सुरक्षित निवेश का विकल्प माना जाता है, लेकिन इसमें निवेश करते समय सिर्फ ब्याज दर पर ध्यान देना बड़ी गलती साबित हो सकती है। बैंक की विश्वसनीयता, जमा राशि की सुरक्षा, टैक्स, प्रीमैच्योर विड्रॉल के नियम और निवेश की अवधि जैसे पहलुओं का मूल्यांकन करना भी उतना ही जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि समझदारी से चुनी गई FD न केवल बेहतर रिटर्न देती है, बल्कि निवेशक को वित्तीय सुरक्षा और मानसिक शांति भी प्रदान करती है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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