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सिर्फ कम प्रीमियम देखकर न खरीदें हेल्थ इंश्योरेंस, पॉलिसी चुनने से पहले जरूर चेक करें ये 5 बातें

कागज पर सबसे सस्ती दिखने वाली हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी जरूरी नहीं कि सबसे अच्छी हो। इसलिए पॉलिसी खरीदने से पहले उसके दस्तावेज को अच्छी तरह से पढ़ें।

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हेल्थ इंश्योरेंस

कोरोना महामारी के बाद हेल्थ इंश्योरेंस की अहमियत बढ़ी है। इसके चलते हेल्थ इंश्योरेंस लेने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है। हालांकि, इसके साथ ही हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम भी तेजी से बढ़ा है। बीमा कंपनियों का कहना है कि बढ़ते इलाज खर्च को कवर देने के लिए प्रीमियम बढ़ाना उनकी मजबूरी है। ऐसे में अगर आप खुद और अपने परिवार के लिए हेल्थ इंश्योरेंस प्लान खरीदने की योजना बना रहे हैं तो कुछ बातों का खास ख्याल रखें। बीमा विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ कम प्रीमियम या ज्यादा सम इंश्योर्ड (बीमा राशि) के आधार पर पॉलिसी चुनने से क्लेम करते समय मुश्किलों और अचानक होने वाले खर्चों का सामना करना पड़ सकता है।

इन बातों की जांच-पड़ताल पहले करें

बीमा विशेषज्ञों का कहना है कि नई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने से पहले, पॉलिसीहोल्डर्स को अच्छी तरह से जांच-पड़ताल करनी चाहिए और कवरेज, किन चीजों को शामिल नहीं किया गया है (एक्सक्लूज़न), वेटिंग पीरियड, क्लेम की शर्तों और इससे जुड़े खर्चों का ध्यानपूर्वक मूल्यांकन करना चाहिए। इससे यह पक्का करने में मदद मिल सकती है कि मेडिकल इमरजेंसी के समय पॉलिसी से सही फाइनेंशियल सुरक्षा मिले। कवरेज, किन चीज़ों को शामिल नहीं किया गया है (एक्सक्लूजन) और अपनी जेब से होने वाले खर्चों (आउट-ऑफ-पॉकेट कॉस्ट) की जांच करें।

अपनी जरूरत को पहचानें

अपनी मुख्य हेल्थकेयर जरूरतों को पहचानें। ये आपकी उम्र, सेहत की स्थिति, परिवार के आकार, पहले से मौजूद बीमारियों और आर्थिक ज़िम्मेदारियों के आधार पर अलग-अलग हो सकती हैं। पॉलिसी चुनने से पहले हेल्थकेयर पर होने वाले संभावित खर्च, मौजूदा मेडिकल जरूरतें और परिवार के कितने सदस्य इसमें शामिल होंगे, जैसे कारकों पर विचार किया जाना चाहिए। अगर आपको पहले से कोई गंभीर बीमारी है, तो पॉलिसी खरीदने से पहले उस बीमारी पर लागू होने वाले वेटिंग पीरियड, किन चीज़ों पर कवर नहीं मिलेगा (एक्सक्लूज़न) और कवरेज की सीमाओं को ध्यान से देख लें।

बीमा की रकम (सम इंश्योर्ड) किसी तय नियम के बजाय आपकी हेल्थकेयर की ज़रूरतों और परिवार के हालात के हिसाब से काफ़ी होनी चाहिए। उदाहरण के लिए, एक फैमिली फ्लोटर पॉलिसी में इंडिविजुअल पॉलिसी के मुकाबले ज़्यादा बीमा रकम की जरूरत हो सकती है, क्योंकि इसमें कवर परिवार के कई सदस्यों के बीच बंटा होता है।

मुख्य फायदों को ही न देखें

सिर्फ इसलिए कोई पॉलिसी न चुनें कि उसमें ज़्यादा 'सम इंश्योर्ड' (बीमा राशि) या आकर्षक फीचर्स मिल रहे हैं। पॉलिसी की शर्तों को ध्यान से पढ़ें और समझें कि असल में उसमें क्या-क्या कवर किया गया है। अस्पताल में भर्ती होने से पहले और बाद के खर्च, किन चीज़ों पर खर्च कवर नहीं होगा (exclusions), कमरे के किराए की सीमा, किसी खास बीमारी के लिए खर्च की सीमा (sub-limits), को-पेमेंट की शर्तें और ऐसी दूसरी शर्तें देखें जिनसे आपके क्लेम पर असर पड़ सकता है।

पॉलिसी लेने वालों को यह देखना चाहिए कि क्या प्लान में 'नो-क्लेम बोनस', आने वाले सालों में 'सम इंश्योर्ड' (बीमा राशि) में बढ़ोतरी और 'सम इंश्योर्ड' की बहाली (रेस्टोरेशन) जैसी सुविधाएं मिलती हैं। भविष्य में हेल्थकेयर की ज़रूरतें बढ़ सकती हैं, इसलिए कवरेज बढ़ाने की सुविधा होना भी फायदेमंद है। एक व्यावहारिक तरीका यह हो सकता है कि बहुत महंगे बेस कवर के बजाय, एक सही बेस पॉलिसी के साथ टॉप-अप प्लान लिया जाए।

हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने से पहले जांचें ये 5 बातें

1. सम इंश्योर्ड: कवर पर्याप्त है या नहीं: पॉलिसी खरीदते समय सबसे पहले देखें कि बीमा राशि आपकी जरूरत के मुताबिक है या नहीं। बढ़ते मेडिकल खर्च को देखते हुए बहुत कम कवर लेने पर बड़े इलाज के समय अपनी जेब से काफी पैसा खर्च करना पड़ सकता है।

2. वेटिंग पीरियड जरूर चेक करें: अगर आपको पहले से कोई बीमारी है, तो पॉलिसी में उसके लिए वेटिंग पीरियड जरूर चेक करें। यह भी देखें कि बीमारी किस स्थिति में कवर होगी और इसके लिए क्या शर्तें लागू हैं।

3. रूम रेंट की लिमिट: कई पॉलिसियों में अस्पताल के कमरे के किराये पर सीमा होती है। अगर आप तय सीमा से महंगा कमरा लेते हैं, तो कुछ मामलों में इसका असर दूसरे अस्पताल खर्चों पर भी पड़ सकता है। इसलिए रूम रेंट कैप को ध्यान से पढ़ें। यह देखें कि पॉलिसी में अस्पताल में भर्ती होने का खर्च, प्री- और पोस्ट-हॉस्पिटलाइजेशन तथा डे-केयर प्रक्रियाएं किस सीमा तक कवर हैं। सिर्फ अस्पताल में भर्ती का कवर होना पर्याप्त नहीं है।

4. को-पेमेंट: को-पेमेंट का मतलब है कि क्लेम का एक हिस्सा आपको खुद चुकाना होगा। उदाहरण के लिए, अगर पॉलिसी में 20% को-पेमेंट है, तो पात्र खर्च का 20% हिस्सा आपकी जेब से जा सकता है। कम को-पेमेंट वाली पॉलिसी आपके लिए ज्यादा सुविधाजनक हो सकती है। हर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में कुछ चीजें कवर नहीं होतीं। इसलिए खरीदने से पहले क्या कवर नहीं है, इसकी पूरी सूची पढ़ें। बाद में क्लेम रिजेक्ट होने की स्थिति से बचने के लिए यह बेहद जरूरी है।

5. सब-लिमिट: कुछ पॉलिसियों में खास इलाज या खर्च के लिए अलग-अलग अधिकतम सीमा तय होती है। जैसे किसी विशेष बीमारी, प्रक्रिया या मेडिकल खर्च पर कुल सम इंश्योर्ड से कम भुगतान सीमा हो सकती है। इसलिए सब-लिमिट और उसकी शर्तों को जरूर जांचें।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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