8th Pay Commission लागू होने का इंतजार देशभर में काम करने वाले केंद्रीय कर्मचारी कर रहे हैं। गौरतलब है कि 3 सितंबर 2026 को, 8वें वेतन आयोग के गठन (3 नवंबर 2025) के बाद से दस महीने पूरे हो जाएंगे। इस बीच आयोग की बातचीत और चर्चाएं अब एक अहम चरण में पहुंच गई हैं और आने वाले महीनों में जयपुर, चंडीगढ़, पुडुचेरी और बेंगलुरु में बैठकें होनी हैं। बता दें कि जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले 8वें वेतन आयोग को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वेतन संशोधन, भत्ते, फिटमेंट फैक्टर और पेंशन सुधारों पर अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया है।
महंगाई को देखते हुए ज्यादा फिटमेंट की मांग
फिटमेंट फैक्टर केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए सबसे ज्यादा ध्यान दिए जाने वाले मुद्दों में से एक बना हुआ है। छठे और सातवें वेतन आयोग के तहत, सरकार ने क्रमशः 1.86 और 2.57 का फिटमेंट फैक्टर तय किया था। इस बार, महंगाई, बढ़ती जीवन-यापन की लागत और स्वास्थ्य सेवा के खर्चों को देखते हुए कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठनों ने ज़्यादा फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव दिया है। अलग-अलग संगठनों ने 3.61, 3.833 और 4.00 के प्रस्ताव दिए हैं। हालांकि, ये मांगें कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठनों की हैं, न कि 8वें वेतन आयोग द्वारा आधिकारिक तौर पर तय किया गया फिटमेंट फैक्टर।
7वें वेतन आयोग में न्यूनतम सैलरी 18 हजार की गई थी
7वें वेतन आयोग के तहत, 2.57 के फिटमेंट फ़ैक्टर ने न्यूनतम बेसिक पे को ₹7,000 से बढ़ाकर ₹18,000 कर दिया था। अगर हालिया प्रस्तावों को अपनाया जाता है और सभी पर एक समान रूप से लागू किया जाता है, तो न्यूनतम बेसिक पे में काफ़ी बढ़ोतरी हो सकती है।
8वें वेतन आयोग के फिटमेंट फ़ैक्टर से जुड़े प्रस्ताव
सर्वे ऑफ इंडिया के मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन (MSA) ने 3.61 के फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव दिया है, जिससे न्यूनतम बेसिक पे बढ़कर लगभग ₹64,980 या लगभग ₹65,000 हो जाएगी। नेशनल काउंसिल JCM स्टाफ़ साइड और भारत पेंशनर्स समाज (BPS) ने 3.833 के फिटमेंट फ़ैक्टर का प्रस्ताव दिया है। मौजूदा न्यूनतम बेसिक पे ₹18,000 पर इसे लागू करने से बेसिक पे लगभग ₹69,000 हो जाएगी।
ये प्रस्ताव उन कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठनों की मांगों को दर्शाते हैं जो बदलती जीवन-यापन की लागत को देखते हुए बेहतर वेतन और पेंशन में संशोधन की मांग कर रहे हैं। हालांकि, अंतिम फिटमेंट फैक्टर का फैसला तभी किया जाएगा जब 8वां वेतन आयोग अपनी सिफारिशें सौंप देगा और सरकार उस पर अंतिम निर्णय ले लेगी।
कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर क्या असर होगा?
लेवल 1 पर, मौजूदा ₹18,000 की बेसिक पे (मूल वेतन) पर 3.61 का फैक्टर लगाने से ₹64,980 मिलते हैं, 3.833 से लगभग ₹69,000 मिलते हैं, और 4.00 से ₹72,000 मिलते हैं। इसलिए, लेवल 1 पर बेसिक पे में 3.61 और 4.00 वाले प्रस्तावों के बीच का अंतर हर महीने लगभग ₹7,020 है। प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर का असर पेंशन और बेसिक पे से जुड़े रिटायरमेंट के दूसरे फ़ायदों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, इसका अंतिम असर पे मैट्रिक्स और 8वें वेतन आयोग की दूसरी सिफारिशों पर निर्भर करेगा, और साथ ही इस बात पर भी कि पैनल सैलरी में बदलाव और सुधार से जुड़े दूसरे ज़रूरी बदलावों को कैसे शामिल करता है।
अगले साल आयोग पेश कर सकता है अपनी सिफारिशें
संक्षेप में, 3.61, 3.833 और 4.00 के आंकड़े अभी के लिए अलग-अलग संगठनों के प्रस्ताव हैं, न कि 8वें वेतन आयोग के पक्के आंकड़े। ये प्रस्ताव संबंधित यूनियनों ने अपनी शिकायतों, अनुभव और जीवन की चुनौतियों के आधार पर रखे हैं। आखिरी फिटमेंट फैक्टर अंततः वेतन आयोग की सिफारिशों और सरकार के फैसले पर निर्भर करेगा। उम्मीद है कि 8वें वेतन आयोग का पैनल मई-जून 2027 तक, यानी आज से लगभग 8 महीने बाद, एक रिपोर्ट के रूप में अपनी सिफारिशें पेश करेगा।
