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नेपाल बॉर्डर पर चीन का Level-4 अलर्ट, नई झील टूटने का खतरा; क्या फिर आएगी बड़ी बाढ़?

Nepal Flood: तिब्बत-नेपाल सीमा पर बाढ़ के बाद चीन ने 'लेवल-4' अलर्ट जारी किया है। वहां बनी नई 'अवरोधक झील' के टूटने से निचले इलाकों में भीषण बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

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नेपाल में बाढ़ से मची तबाही (फोटो- AP)

Nepal Flood: चीन ने तिब्बत-नेपाल सीमा पर अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बाद ’लेवल-चार’ का अलर्ट जारी किया है और चेतावनी दी है कि दो नदियों के संगम के पास बनी एक नई ’अवरोधक झील’ के टूटने का खतरा काफी बढ़ गया है जिससे निचले इलाकों में भीषण बाढ़ आ सकती है। अवरोधक झील वह झील होती है जो किसी प्राकृतिक रुकावट के कारण नदी या जलधारा का रास्ता बंद हो जाने से बनती है। प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए चीन की आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली में चार स्तर हैं। इनमें ’लेवल-1’ सबसे गंभीर और ’लेवल-4’ सबसे निचला स्तर है।

झील में कितना पानी जमा?

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी ’शिन्हुआ’ की खबर के अनुसार, गुरुवार सुबह तक झील में अनुमानित 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका था। पूर्वानुमान के मुताबिक, लगातार हो रही बारिश के कारण अगले तीन दिन में झील में पानी का प्रवाह करीब 30 लाख घन मीटर तक पहुंच सकता है जिससे इसके टूटने का खतरा और बढ़ गया है। ऐसी स्थिति में बाढ़ का पानी नीचे की ओर तेजी से बह सकता है और चीन-नेपाल सीमा पर स्थित गिरोंग पोर्ट और आसपास के निचले इलाकों में भारी तबाही मचा सकता है।

इसके मद्देनजर जल संसाधन मंत्रालय ने स्थानीय अधिकारियों को ’अवरोधक झील’ और बारिश की स्थिति पर कड़ी नजर रखने, मौसम और जल प्रवाह के पूर्वानुमान तथा जोखिम के आकलन को बेहतर बनाने व निचले इलाकों में संभावित रूप से प्रभावित होने वाले लोगों की सटीक पहचान करने के निर्देश दिए हैं।

बचाव कार्य में ड्रोन्स का इस्तेमाल

इस बीच, चीन ने नेपाल सीमा के पास तिब्बत के बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्यों में मदद के लिए उपग्रहों और ड्रोनों को तैनात किया है। चीन राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन (सीएनएसए) ने बताया कि उसने प्रभावित क्षेत्र की आपातकालीन तस्वीरें लेने और पुरानी तस्वीरें जुटाने के लिए उपग्रह संसाधनों का इस्तेमाल शुरू किया है। अब तक आपदा के आकलन और राहत कार्यों में मदद के लिए संबंधित विभागों को आपदा से पहले की पांच और आपदा के बाद की 10 तस्वीरें उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। ’शिन्हुआ’ की खबर के अनुसार, चीन ने इलाके का व्यापक हवाई सर्वेक्षण करने के लिए उच्च-गुणवत्ता वाले कैमरों से लैस अपे ड्रोन ’विंग लोंग’ को भी तैनात किया है। वहीं, बचावकर्मी अभियान के दौरान छोटे ड्रोनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन ड्रोन में लगे उच्च-गुणवत्ता वाले कैमरों की मदद से बाढ़ प्रभावित इलाके का वास्तविक-समय में 3डी मॉडल तैयार किया जाएगा। इससे बचाव अभियान के नियंत्रण केंद्र को पूरे क्षेत्र की स्थिति समझने और उन इलाकों को चिह्नित करने में मदद मिलेगी, जहां सबसे पहले तलाशी अभियान चलाने की जरूरत है। इसके अलावा, बचावकर्मी घने वन क्षेत्रों और कीचड़ में समा चुके इलाकों में लापता लोगों का पता लगाने के लिए ड्रोन में लगे यूएवी का भी इस्तेमाल कर रहे हैं।

सैकड़ों लोग फंसे

चीन के अनुसार, 26 अगस्त को तिब्बत-नेपाल सीमा के पास गिरोंग काउंटी के गिरोंग पोर्ट में अचानक आई बाढ़ के बाद कई विदेशी पर्यटकों समेत 558 लोग लापता हो गए थे। हालांकि, इस विशाल ’अवरोधक झील’ के कारण राहत और बचाव कार्य प्रभावित हो रहे हैं। अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि 555 पर्यटकों सहित 1,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इस आपदा में भारी संख्या में लोग हताहत हुए हैं।

’शिन्हुआ’ की खबर के अनुसार, सांस्कृतिक व पर्यटन अधिकारियों के समन्वय से गिरोंग काउंटी में कुल 499 ग्रामीणों व श्रमिकों और 555 प्रभावित पर्यटकों को निकाला गया।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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