आज के दौर में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल काफी तेजी से बढ़ रहा है। शॉपिंग करने से लेकर यूटिलिटी बिलों का भुगतान करने तक, लोग सुविधा के लिए बड़े पैमाने पर क्रेडिट कार्ड का उपयोग कर रहे हैं। क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करना बेहद आसान होता है, लेकिन जब महीने के अंत में बैंक द्वारा क्रेडिट कार्ड का बिल जनरेट किया जाता है, तब कार्डधारकों को अपनी भारी-भरकम फिजूलखर्ची का अहसास होता है। बैंक अपने ग्राहकों को कुल बिल का भुगतान करने के साथ-साथ 'मिनिमम अमाउंट ड्यू' (Minimum Amount Due) भरने का विकल्प भी देते हैं। अधिकांश लोग पूरा बिल चुकाने के बजाय केवल मिनिमम ड्यू भरकर खुद को सुरक्षित और लेट फीस से मुक्त समझ लेते हैं। हालांकि, बहुत कम लोग यह जानते हैं कि यह आसान सा दिखने वाला विकल्प असल में उन्हें एक बड़े कर्ज के जाल (Debt Trap) में फंसा सकता है और उनके सिबिल स्कोर (CIBIL Score) को बुरी तरह खराब कर सकता है।
क्या है मिनिमम ड्यू?
व्यावहारिक रूप से देखा जाए तो मिनिमम ड्यू का विकल्प उन लोगों के लिए एक अस्थायी राहत की तरह होता है जो किसी महीने अचानक वित्तीय तंगी का सामना कर रहे होते हैं और पूरा बिल चुकाने में असमर्थ होते हैं। बैंक आपको यह विकल्प इसलिए प्रदान करते हैं ताकि आपका अकाउंट आधिकारिक रूप से 'डिफॉल्ट' न घोषित हो। लेकिन मिनिमम ड्यू भरने का यह कतई मतलब नहीं है कि आपका बाकी कर्ज माफ हो गया है। आमतौर पर मिनिमम ड्यू आपके कुल क्रेडिट कार्ड बिल का लगभग 5 प्रतिशत होता है। जब आप केवल इस न्यूनतम राशि का भुगतान करते हैं, तो बचा हुआ 95 प्रतिशत हिस्सा बकाया कर्ज के रूप में बना रहता है। इसके बाद बैंक उस बची हुई राशि पर भारी-भरकम ब्याज वसूलना शुरू कर देते हैं।
अगर आप हर महीने सिर्फ मिनिमम ड्यू चुकाने की आदत बना लेते हैं, तो क्रेडिट कार्ड पर लगने वाला सालाना ब्याज 30 से 40 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में आपका मूल कर्ज घटने के बजाय केवल ब्याज की राशि बढ़ती जाती है और आप अनजाने में ही बैंक के ब्याज चक्रव्यूह में फंस जाते हैं।
कैसे नुकसान पहुंचाता है मिनिमम ड्यू?
केवल वित्तीय नुकसान ही नहीं, बल्कि लगातार मिनिमम ड्यू चुकाने की आदत आपके क्रेडिट प्रोफाइल को भी गहरा नुकसान पहुंचाती है। बैंकिंग विशेषज्ञों के अनुसार, भले ही मिनिमम ड्यू भरने से आपका कार्ड तुरंत ब्लैकलिस्ट या डिफॉल्ट न हो, लेकिन हर महीने ऐसा करने से बैंकों और क्रेडिट ब्यूरो के पास यह संदेश जाता है कि आप अपनी वित्तीय देनदारियों को संभालने में सक्षम नहीं हैं। लगातार बकाया राशि बने रहने से आपका 'क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो' (Credit Utilization Ratio) काफी बढ़ जाता है। इसके चलते वित्तीय संस्थान आपको एक रिस्की (जोखिम भरा) ग्राहक मानने लगते हैं, जिससे आपका सिबिल स्कोर तेजी से नीचे गिरने लगता है। भविष्य में जब भी आपको होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन की सख्त जरूरत होगी, तब खराब सिबिल स्कोर और high-risk प्रोफाइल के कारण बैंक आपके लोन आवेदन को खारिज कर सकते हैं या बहुत ऊंची ब्याज दरों पर लोन देंगे।
