Change Regime in ITR Rules: वेतनभोगी कर्मचारियों को जल्द ही उनके एम्प्लॉयर्स से फॉर्म 16 मिलेगा, जिसके बाद वे इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने के लिए जरूरी दस्तावेज जुटाना शुरू करेंगे। लेकिन क्या होगा अगर आपने पिछले साल एम्प्लॉयर को पुरानी टैक्स रिजीम चुनने की जानकारी दी थी और इस साल नई टैक्स रिजीम आपको फायदेमंद लग रही है? आयकर नियम टैक्सपेयर्स को ITR फाइल करते समय अपनी पसंद की टैक्स रिजीम चुनने की छूट देते हैं। यानी, अगर आपने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए सैलरी पर TDS के लिए पुरानी रिजीम चुनी थी, तो भी आप ITR दाखिल करते समय नई रिजीम चुन सकते हैं। इसी तरह, नई रिजीम चुनने वाले टैक्सपेयर्स पुरानी रिजीम का ऑप्शन चुन सकते हैं।
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नई टैक्स रिजीम है डिफॉल्ट रिजीम
नई टैक्स रिजीम अब डिफॉल्ट रिजीम है। ITR फॉर्म में टैक्सपेयर्स से पूछा जाता है, "क्या आप सेक्शन 115BAC की नई टैक्स रिजीम से बाहर निकलना चाहते हैं?" यदि करदाता 'हां' चुनता है, तो रिटर्न पुरानी रिजीम के तहत फाइल होता है, और 'नहीं' चुनने पर नई रिजीम लागू होती है।
आयकर अधिनियम की धारा 115BAC नई रिजीम के तहत टैक्स स्लैब और नियमों को कंट्रोल करती है। यह फ्लेक्सिबिलटी टैक्सपेयर्स को अपनी इनकम और डिडक्शन के आधार पर सबसे फायदे वाली रिजीम चुनने की सुविधा देता है।

टैक्स रिजीम चेंज करने का मिलता है ऑप्शन
कब मिलता पुरानी टैक्स रिजीम चुनने का ऑप्शन
हालांकि, पुरानी टैक्स रिजीम चुनने की सुविधा केवल तभी उपलब्ध है, जब ITR निर्धारित तारीख से पहले फाइल किया जाए। अगर ITR ड्यू डेट के बाद फाइल किया जाता है, तो ई-फाइलिंग पोर्टल पुरानी रिजीम का ऑप्शन नहीं देता और लेट ITR नई रिजीम के तहत ही दाखिल होगा।
ड्यू डेट के बाद फाइल होने वाले रिटर्न को 'बिलेटेड ITR' कहा जाता है, और इसमें करदाता को डिफॉल्ट नई रिजीम का पालन करना होगा।

TAX रिजीम बदल सकते हैं या नहीं?

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किसके लिए कौन सी होती है लास्ट डेट
इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख टैक्सपेयर्स की श्रेणी के आधार पर भिन्न होती है। जिन करदाताओं के खातों का ऑडिट आवश्यक नहीं है, उनके लिए ITR दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई है।
वहीं, जिनके खातों का ऑडिट आवश्यक है, लेकिन कोई अंतरराष्ट्रीय लेनदेन नहीं है, उनके लिए अंतिम तारीख 31 अक्टूबर है। ऐसे करदाताओं को 30 सितंबर तक ऑडिट रिपोर्ट जमा करनी होगी। अंतरराष्ट्रीय लेनदेन वाले टैक्सपेयर्स के लिए ITR फाइल करने की अंतिम तारीख 30 नवंबर है, बशर्ते ऑडिट रिपोर्ट 31 अक्टूबर तक जमा हो।

लेट आईटीआर फाइल करने पर नहीं मिलेगा ऑप्शन
टैक्सपेयर्स को एक्सपर्ट्स की सलाह
टैक्सपेयर्स को एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि वे अपनी इनकम, कटौतियों और टैक्स लायबिलिटी का सावधानीपूर्वक एनालिसिस करें ताकि सबसे उपयुक्त रिजीम का चयन कर सकें। समय पर ITR दाखिल करना न केवल नियमों का पालन सुनिश्चित करता है, बल्कि पुरानी रिजीम चुनने की सुविधा भी प्रदान करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि टैक्सपेयर्स को फॉर्म 16 और अन्य दस्तावेजों की जांच कर लेनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर टैक्स सलाहकार की मदद लेनी चाहिए।
