सुरक्षा के लिहाज से आजकल घरों और सोसायटियों में सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाना काफी आम हो गया है। हालांकि, जब बात किराए के मकान की आती है, तो मकान मालिक और किरायेदार के बीच सीसीटीवी कैमरों को लेकर अक्सर विवाद छिड़ जाता है। मकान मालिक सुरक्षा का हवाला देकर कैमरे लगवाते हैं, जबकि किरायेदारों को अपनी प्राइवेसी में खलल पड़ने का डर रहता है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि भारतीय कानून के अनुसार मकान मालिक किन जगहों पर कैमरे लगा सकता है और कहां ऐसा करना पूरी तरह से गैर-कानूनी है।
क्या है मकान मालिक के हक़?
कानूनी नियमों के अनुसार, मकान मालिक अपनी प्रॉपर्टी की सुरक्षा के लिए कॉमन एरिया (Common Areas) में सीसीटीवी कैमरे लगाने का पूरा हक रखता है। यानी बिल्डिंग की मेन एंट्री/एग्जिट गेट, सीढ़ियों, लिफ्ट, पार्किंग एरिया, बालकनी या कॉमन गैलरी जैसी सार्वजनिक जगहों पर सुरक्षा के उद्देश्य से कैमरे लगाए जा सकते हैं। इस तरह के सीसीटीवी इंस्टॉलेशन को कानून गलत नहीं मानता, बशर्ते इसका उद्देश्य सिर्फ सुरक्षा हो न कि किरायेदारों के निजी जीवन पर नजर रखना या उनकी जासूसी करना।
दूसरी तरफ, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर नागरिक को 'निजता का अधिकार' (Right to Privacy) दिया गया है। मकान मालिक किसी भी सूरत में किरायेदार के घर/कमरे के अंदर, वॉशरूम या ऐसे किसी प्राइवेट हिस्से के सामने कैमरा नहीं लगा सकता, जहां से घर के अंदर की गतिविधियां दिखाई देती हों। इसके अलावा, यदि कैमरे का एंगल सीधे किरायेदार के मुख्य दरवाजे के इस तरह सामने सेट किया गया है कि दरवाजा खोलते ही घर के अंदर का दृश्य रिकॉर्ड होता हो, तो इसे प्राइवेसी का सीधा उल्लंघन माना जाता है।
कब आप कर सकते हैं विरोध?
अगर आपका मकान मालिक आपकी निजता का हनन करते हुए या जानबूझकर आप पर नजर रखने के इरादे से गलत जगह सीसीटीवी लगाता है, तो आप इसका विरोध कर सकते हैं। सबसे पहले उनसे कैमरे का एंगल बदलने या हटाने का अनुरोध करें। अगर मकान मालिक बात नहीं सुनता है, तो आप प्राइवेसी वायलेशन के खिलाफ स्थानीय पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करा सकते हैं या भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट के तहत प्राइवेसी हनन की धाराओं में कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं।
